Lalita Gautam Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बीए की छात्रा ललिता गौतम की हत्या का मामला अब बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। बुधवार को न्याय की मांग को लेकर मेरठ कलेक्ट्रेट पर बुलाई गई दलित महापंचायत में भारी भीड़ जुटी, स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इस दौरान एसएसपी पर हिरासत में लिए गए एक वकील को थप्पड़ मारने का आरोप लगा, जिसके बाद वकील ने पुलिस वैन के भीतर ही फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की।
क्या है पूरा मामला
टीपी नगर क्षेत्र के गगन एंक्लेव निवासी बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ललिता गौतम (20) मूल रूप से किरोट गांव की रहने वाली थी। 15 मई को वह परीक्षा देने घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने काफी तलाश के बाद 16 मई को टीपी नगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। एक दिन बाद, 17 मई को थाना रोहटा क्षेत्र के उपसिया गांव के जंगल से उसका शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, शव की पहचान छिपाने के लिए हत्यारों ने तेजाब से उसे बुरी तरह जला दिया था। 18 मई को पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश चौधरी (रोहटा के कल्याणपुर निवासी) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अंकुश ने हत्या कबूल करते हुए बताया कि ललिता के साथ उसका करीब चार साल से प्रेम प्रसंग था और वह उससे शादी करना चाहता था, लेकिन पहले ललिता के परिवार ने और बाद में खुद ललिता ने इनकार कर दिया था। इसी बीच अंकुश को पता चला कि ललिता के जीवन में कोई और युवक भी है, जिसके बाद गुस्से में उसने जंगल में ले जाकर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के साथी आदेश ने सबूत छिपाने के इरादे से अंकुश का मोबाइल फोन अपने पास रख लिया था, जिसे बरामद कर आदेश को भी गिरफ्तार किया गया और मामले में साक्ष्य मिटाने की धाराएं जोड़ी गईं। पुलिस का दावा है कि परिजनों द्वारा लगाए गए सामूहिक दुष्कर्म के आरोप जांच में गलत साबित हुए हैं।
कलेक्ट्रेट पर उमड़ा जनसैलाब, गेट बंद होते ही शुरू हुआ धरना
छात्रा को न्याय दिलाने और दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान, दलित समाज के प्रतिनिधियों और कई सामाजिक संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कलेक्ट्रेट के बाहर विशाल दलित महापंचायत बुलाई गई थी। देखते ही देखते मेरठ के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और आसपास के जिलों से हजारों लोग वहां जुट गए। भीड़ की बढ़ती तादाद और उग्र तेवर देख प्रशासन ने कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया, जिससे नाराज प्रदर्शनकारी मुख्य सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और चारों ओर भीषण जाम लग गया। एसपी देहात अभिजीत कुमार और एसपी ट्रैफिक राकेश कुमार ने पहुंचकर सड़क खाली कराने और ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। कई घंटों की समझौता वार्ता विफल होने के बाद दोपहर बाद एसएसपी अविनाश पांडेय मौके पर पहुंचे और सड़क व यातायात बहाल करने के लिए लाठीचार्ज कराते हुए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस वैन में बैठा लिया गया।
वकील पर थप्पड़ और जान देने की कोशिश का आरोप
हिरासत में लिए गए वकील रवि गौतम का आरोप है कि पुलिस वैन में एसएसपी अविनाश पांडेय ने उसे थप्पड़ मारा, जिसके बाद उसने वैन के भीतर ही फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। वहीं पुलिस का कहना है कि रवि गौतम और किसान नेता दिग्विजय सिंह भाटी प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। भारतीय किसान यूनियन (अंबेडकर गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी को बाद में सड़क जाम कराने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस का पक्ष: “बाहरी तत्वों ने भड़काया”
एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा कि ललिता गौतम हत्याकांड का पुलिस पहले ही पूरी निष्पक्षता से खुलासा कर चुकी है और मुख्य आरोपी सहित उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी और राजनीतिक तत्वों ने पीड़ित परिवार को मोहरा बनाकर तथा आम जनता को भड़काकर ज्ञापन के नाम पर कलेक्ट्रेट के बाहर सड़क जाम करा दी, जिससे आम जनता को भारी असुविधा हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि जिले की कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और माहौल खराब करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
सियासत गरमाई, अखिलेश और चंद्रशेखर आजाद ने साधा निशाना
पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एसएसपी की वैन में घुसकर प्रदर्शनकारियों की पिटाई करने का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है और मेरठ में दलित समाज की बेटी के लिए न्याय मांगने पर प्रशासन ने पीड़ित परिवार पर ही प्रहार किया। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी सोशल मीडिया पर लाठीचार्ज और हिरासत की कार्रवाई को सरकार की “दलित विरोधी और दमनकारी मानसिकता” करार दिया और जल्द मेरठ पहुंचकर पीड़ित परिवार से मिलने की बात कही।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों (पर्दे के पीछे के लोगों समेत) की तुरंत गिरफ्तारी, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो, सभी दोषियों को फांसी की सजा दी जाए, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, फिलहाल मामले में मुख्य आरोपी अंकुश चौधरी और सहयोगी आदेश जेल में हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच जारी है और अन्य चिन्हित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और लाठीचार्ज को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।

