दादरी विधानसभा: क्या तेजपाल सिंह नागर के खिलाफ जनता, किस पर सजेगा दादरी का ताज

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी लगभग एक साल बाकी है, लेकिन सूबे की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राम मंदिर दानपेटी चोरी मामले से लेकर पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी तक, हर मुद्दा अब सीधे चुनावी रंग ले रहा है। इसी सरगर्मी के बीच गौतमबुद्धनगर की दादरी विधानसभा सीट पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां से मौजूदा भाजपा विधायक तेजपाल सिंह नागर तीसरी बार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पार्टी उन्हें फिर टिकट देगी, और अगर हां, तो क्या ग्रेटर नोएडा की हाउसिंग सोसायटियों में बढ़ती नाराज़गी उनकी राह में रुकावट बनेगी।

राम मंदिर दानपेटी चोरी का साया प्रदेश की सियासत पर

अयोध्या राम मंदिर में दान की रकम में हुई कथित गड़बड़ी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी ड्राइवर समेत आठ कर्मचारियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जो दान के रूप में मिली नकदी और जेवरात की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े थे। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है, जबकि विश्व हिंदू परिषद ने सपा और कांग्रेस पर 2027 के चुनावों से पहले इस विवाद से राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश का आरोप लगाया है। साफ है कि यह मामला आस्था से जुड़े होने के कारण आने वाले चुनाव में एक बड़ा भावनात्मक मुद्दा बन सकता है, और इसका असर पश्चिमी यूपी की सीटों पर भी देखा जा सकता है।

प्रधानी चुनाव पर हाईकोर्ट की तगड़ी फटकार

स्थानीय राजनीति की बुनियाद हिलाने वाला एक और फैसला हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से आया है। हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के तौर पर बनाए रखने के सरकारी फैसले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल संवैधानिक रूप से पांच साल का ही होता है और सरकार इसे प्रशासनिक आदेश से आगे नहीं बढ़ा सकती। प्रदेश की 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया पूरी न होने के कारण चुनाव में देरी हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 तय करते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय-सीमा वाला हलफनामा मांगा है, हालांकि सूत्रों के मुताबिक अब पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाने की संभावना है। गांव-गांव में प्रधानी का यह असमंजस आम जनता और स्थानीय कार्यकर्ताओं में बेचैनी की वजह बना हुआ है, और दादरी जैसी ग्रामीण-शहरी मिश्रित सीट पर इसका सीधा असर बूथ स्तर की राजनीति पर पड़ना तय है।

दादरी का दर्द: ऊंची इमारतें, मगर सुरक्षा ज़मीन पर

दादरी विधानसभा का बड़ा हिस्सा ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाउसिंग सोसायटियों से बनता है, और यहीं से सबसे तीखी शिकायतें उठ रही हैं। आंकड़े चिंताजनक हैं ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 100 से अधिक सोसायटियां और लगभग पांच लाख की आबादी होने के बावजूद एक भी आधुनिक, समर्पित फायर स्टेशन नहीं है,  जिससे आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड को दूर से बुलाना पड़ता है और रिस्पांस टाइम बढ़ जाता है। एक स्थानीय समिति ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में बताया कि कई सोसायटियों में कागज़ों पर तो फायर सुरक्षा मानक पूरे दिखाए जाते हैं, लेकिन हकीकत में स्प्रिंकलर और अलार्म सिस्टम खराब रहते हैं और हाइड्रेंट में पानी का दबाव नाकाफी होता है।  हाल के महीनों में अजनारा होम्स से फायर उपकरण चोरी और ला रेज़ीडेंसिया सोसायटी में आग जैसी घटनाएं इन्हीं खामियों की तस्दीक करती रही हैं।

पुलिसिंग और बढ़ते अपराध की चिंता भी कम नहीं है हाल ही में सिरसा गांव में हुए निक्की मर्डर केस ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, हालांकि विधायक तेजपाल नागर ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और डीसीपी ग्रेटर नोएडा से सीधे फोन पर मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी। इसके अलावा मेट्रो और सार्वजनिक बस सेवा की कमी सोसायटी निवासियों की पुरानी शिकायत बनी हुई है, जो रोज़मर्रा के आवागमन को मुश्किल बनाती है।

विधायक का दावा: “स्वर्णिम दौर” का विकास

दूसरी तरफ विधायक तेजपाल सिंह नागर अपने कार्यकाल को उपलब्धियों से भरा बताते हैं। हाल की प्रेस वार्ता में उन्होंने चार साल में दादरी में लगभग ₹3,925 करोड़ के विकास कार्य होने का दावा किया, जिसमें नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी और विधायक निधि से मिली राशि शामिल है। वे लगातार “गांव चलो अभियान” के तहत क्षेत्र के गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधा संवाद कर रहे हैं, और ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों में जनसंपर्क के दौरान सोसायटी अध्यक्षों ने उनका स्वागत कर भाजपा को समर्थन देने का भरोसा भी दिलाया है। 

टिकट पर सस्पेंस, विपक्ष ने भी ठोकी ताल

भाजपा के भीतर दादरी सीट को लेकर समीकरण अभी पूरी तरह तय नहीं हैं। मौजूदा विधायक तेजपाल सिंह नागर मजबूत दावेदार बने हुए हैं, लेकिन पार्टी के भीतर प्रणीत भाटी, गीता पंडित, बिजेंद्र भाटी और अविनाश शर्मा जैसे नए नाम भी चर्चा में हैं। 2022 में नागर ने 2,18,068 वोट लेकर सपा प्रत्याशी राजकुमार भाटी (79,850 वोट) और बसपा प्रत्याशी (40,456 वोट) को बड़े अंतर से पीछे छोड़ा था, और सपा आज तक इस सीट पर जीत का खाता नहीं खोल सकी है। फिर भी समाजवादी पार्टी ने इस सीट को हल्के में नहीं लिया अखिलेश यादव ने 29 मार्च को दादरी से ही “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” शुरू कर इसे अपने मिशन 2027 का लॉन्चपैड बनाया, यह संकेत देते हुए कि पार्टी इस कमज़ोर गढ़ में संगठन मज़बूत करना चाहती है। बसपा भी पीछे नहीं मायावती ने साफ किया है कि इस बार आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिलेगा, और साफ-सुथरी छवि वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। 

निष्कर्ष

दादरी विधानसभा की लड़ाई इस बार सिर्फ पार्टी की लहर पर नहीं टिकेगी। एक तरफ विधायक के विकास कार्यों के आंकड़े हैं, तो दूसरी तरफ हाउसिंग सोसायटियों में सुलगती फायर-सुरक्षा, पुलिसिंग और कनेक्टिविटी की शिकायतें। भाजपा का टिकट तेजपाल नागर को मिलेगा या नया चेहरा आएगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा — लेकिन सपा और बसपा दोनों ने इस सीट पर अपनी सक्रियता बढ़ाकर यह जरूर बता दिया है कि 2027 में दादरी का मुकाबला पहले जैसा एकतरफा नहीं रहने वाला।

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