लखनऊ अग्निकांड: अलीगंज में भीषण आग ने झुलसाई 18 जिंदगियां, सुरक्षा लापरवाही और अनियमित निर्माण की सच्चाई उजागर

राजधानी लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया/उषा मेहता मार्ग) इलाके में सोमवार दोपहर करीब 1:30 से 3 बजे के बीच एक तीन मंजिला कमर्शियल इमारत में लगी भीषण आग ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। आग मुख्य रूप से ऊपरी मंजिलों पर चल रहे लर्निंग स्पेस (कोचिंग/लाइब्रेरी), गेमिंग एसेट आउटसोर्सिंग और हेड हॉपर एनिमेशन स्टूडियो में फैली, जहां 30-35 छात्र, स्टाफ और युवा काम कर रहे थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 15 लोगों (ज्यादातर 20-30 वर्ष के युवा, जिनमें 12 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल) की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ सूत्रों में मौतों की संख्या 18 बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन ने 15 की पुष्टि की है। अधिकांश मौतें धुएं से दम घुटने से हुईं।

हादसे का भयावह मंजर

मुख्य द्वार पर आग लगने से निकास मार्ग बंद हो गया। पूरी बिल्डिंग में घना काला धुआं भर गया। बचकर निकले छात्रों और कर्मचारियों ने बताया कि कई लोग बाथरूम में बंद होकर दम घुटने से मारे गए। कुछ ने एयर कंडीशनर के तारों, रस्सियों या खिड़कियों से कूदकर जान बचाई, जिसमें कई घायल हुए। दमकल, NDRF और SDRF की टीमों ने भारी धुएं के बीच पीछे की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश किया और शव निकाले। एक रेस्क्यू टीम ने एक बिल्ली को भी बचाया। बिल्डिंग की गतिविधियां: ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और वेटरनरी क्लिनिक चल रहा था। ऊपरी मंजिलों पर कोचिंग/लाइब्रेरी और एनिमेशन स्टूडियो था। आग संभवतः शॉर्ट सर्किट या पेट शॉप के गोदाम से शुरू हुई। इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, जो लापरवाही की बड़ी वजह बनी। LDA के अनुसार बिल्डिंग आवासीय नक्शे पर बनी थी, लेकिन कमर्शियल गतिविधियां चल रही थीं।

पीड़ितों का आक्रोश

बच निकले 3D आर्टिस्ट मोहम्मद आसिफ ने बताया कि वे जलते तार पकड़कर नीचे उतरे, हाथ झुलस गए। अभिभावक LDA, कोचिंग संचालकों और प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। फायर सेफ्टी NOC की जांच हो रही है। घायलों का इलाज KGMU ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है।

गिरफ्तारियां और कार्रवाई

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुकदमा BNS की धाराओं 110, 105, 125, 3(5) और UP अग्नि शमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत दर्ज किया गया। गिरफ्तार, रामकृष्ण उपाध्याय (अलीगंज), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62 वर्ष, सीतापुर रोड), तुषांक कृष्ण जायसवाल (31 वर्ष, बालागंज), बिल्डिंग मैनेजमेंट से जुड़े हरिश गोयल और वरुण गोयल को पहले ही हिरासत में लिया गया था।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कार्यक्रम रद्द कर घटनास्थल का दौरा किया, उच्च स्तरीय SIT जांच के आदेश दिए और 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये, घायलों को 50,000 रुपये की सहायता घोषित की। CM ने अतिरिक्त 5 लाख रुपये एक्स-ग्रेशिया की घोषणा की। 

4 अधिकारियों को निलंबित किया गया: गौरव कुमार (अधिशासी अभियंता), कमलेंद्र कुमार सिंह (FSSO), अनिल कुमार (AE), प्रमोद पांडे (JE)। LDA और फायर विभाग की भूमिका की जांच जारी है।

बीजेपी नेताओं के दौरे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: अलीगढ़ दौरा रद्द कर लखनऊ पहुंचे, KGMU जाकर घायलों से मुलाकात की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: दिल्ली से पहुंचे।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक: सबसे पहले मौके पर पहुंचे।

पंकज चौधरी: प्रदेश अध्यक्ष, राजनाथ सिंह के साथ।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेताओं ने संवेदना जताई और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाए।

बड़े सवाल

यह हादसा फायर सेफ्टी, अवैध निर्माण और कोचिंग-स्टूडियो में लापरवाही को लेकर सवाल खड़े करता है। कुल 45-50 लोग अंदर थे, लेकिन रेस्क्यू आंकड़े कम क्यों? विगत हादसों से सबक क्यों नहीं लिया गया? प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसे हादस रोके जाएंगे। पीड़ित परिवारों के साथ पूरे देश का दर्द साझा है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति और घायलों को जल्द स्वस्थ होने की शक्ति दे। जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जो जवाबदेही तय करेगी।

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