अमेरिका-ईरान समझौता: ट्रम्प ने वर्साय में रात्रिभोज के दौरान किया एमओयू पर हस्ताक्षर, 60 दिनों का युद्धविराम लागू , होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा

अमेरिका और ईरान के बीच महीनों की खूनी जंग और कठिन कूटनीतिक वार्ता के बाद आखिरकार एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय महल में आयोजित रात्रिभोज के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते (एमओयू) की हार्ड कॉपी पर अपने हस्ताक्षर किए।  इससे पहले रविवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डिजिटल तरीके से एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके साक्षी राष्ट्रपति ट्रम्प स्वयं थे। अब ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

समझौते में क्या है?

यह एमओयू एक प्रारंभिक ढाँचा है, न कि अंतिम शांति संधि। इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर 60 दिनों का युद्धविराम लागू होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए पुनः खोला जाएगा। समझौते के अनुसार दोनों पक्ष एमओयू पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध-पूर्व स्तर पर शिपिंग बहाल करने पर सहमत हैं। अमेरिका तत्काल अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा, जबकि ईरान “तकनीकी बाधाओं” को दूर करने और जलमार्ग में बिछी समुद्री सुरंगों (mines) को निष्क्रिय करने की जिम्मेदारी लेगा। समझौते के तहत ईरान को अनुपालन के आधार पर प्रतिबंधों से राहत मिलेगी। एमओयू युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाएगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है। इस दौरान परमाणु वार्ता आयोजित की जाएगी।

अमेरिका “अपने क्षेत्रीय भागीदारों के साथ” मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के कोष की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, हालांकि इसके कार्यान्वयन का तंत्र अंतिम समझौते में तय होगा।

परमाणु कार्यक्रम पर रुख

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अगले दौर की बातचीत के दौरान चर्चा होगी। संवर्धन रोकने की अवधि पर मतभेद बरकरार हैं — अमेरिका 20 वर्षों का विराम चाहता है जबकि ईरान 10 वर्षों से अधिक मानने को तैयार नहीं।  ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि एमओयू में तत्काल प्रतिबंध राहत शामिल नहीं है, यह मुद्दा बाद में तय होगा।

ईरान का रुख: समारोह नहीं, केवल डिजिटल हस्ताक्षर

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघई ने कहा कि एमओयू डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित हो चुका है और स्विट्ज़रलैंड में कोई औपचारिक हस्ताक्षर समारोह नहीं होगा।  ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने कहा कि समझौते के तहत सभी प्रतिबद्धताएं “एक्शन फॉर एक्शन” (जैसे को तैसा) के सिद्धांत पर आधारित हैं — यदि अमेरिका अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा, तो ईरान भी किसी भी हालत में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करेगा।

इज़रायल नाराज, नेतन्याहू बाहर

इज़रायल इस वार्ता में शामिल नहीं था और इज़रायली अधिकारी इस समझौते से स्पष्ट रूप से नाखुश दिख रहे हैं। रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज ने प्रतिज्ञा ली है कि इज़रायली सेनाएं लेबनान के उन क्षेत्रों से नहीं हटेंगी जो उनके कब्जे में हैं।  ट्रम्प की इस घोषणा से इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका लगा — हाल के दिनों में वे इस बारे में जानकारी जुटाने के लिए ट्रम्प प्रशासन के करीबी सहयोगियों को फोन कर रहे थे।

अमेरिकी राजनीति में विवाद

सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने इस समझौते को “अमेरिका की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक” बताया और कहा कि ट्रम्प ने यह युद्ध शुरू करके इसे ठीक से खत्म नहीं किया। सीनेटर एलिज़ाबेथ वॉरेन ने कहा, “मैं समझ सकती हूं कि इसमें ईरान कैसे जीतता है, लेकिन यह किसी अमेरिकी परिवार की मदद कैसे करता है, यह मुझे समझ नहीं आता।”

आगे की राह

यह समझौता एक 60-दिवसीय युद्धविराम का ढाँचा तय करता है, जिसके दौरान अनसुलझे मुद्दों विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन स्तर और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार की स्थिति पर आगे की बातचीत होगी।  ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि 60 दिनों की अवधि कोई कठोर समयसीमा नहीं है और अगर ईरान ठीक से “व्यवहार करता रहा” तो वार्ता आगे भी जारी रह सकती है। यह समझौता दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग को फिर से खोलने और मध्य-पूर्व में एक नई कूटनीतिक शुरुआत की ओर पहला कदम माना जा रहा है लेकिन असली परीक्षा अगले 60 दिनों की वार्ता में होगी।

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