एयर इंडिया दुर्घटना के एक साल बाद भी अनुत्तरित सवाल, परिवार आंसुओं में, जाँच रिपोर्ट अधूरी

एयर इंडिया की उड़ान AI-171 की भीषण दुर्घटना को आज एक वर्ष पूरा हो गया, लेकिन 260 जिंदगियाँ निगल लेने वाले इस हादसे का सच अभी भी अँधेरे में है। अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में शुक्रवार को पीड़ित परिवार आँसू बहाते हुए उस स्थल पर एकत्र हुए जहाँ एक साल पहले उनके अपनों की जानें गई थीं हाथों में तस्वीरें, होठों पर दुआएँ और दिलों में सैकड़ों सवाल।

वो काली दोपहर — 32 सेकंड में तबाही

12 जून 2025 को दोपहर 1:39 बजे IST पर एयर इंडिया की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान (पंजीकरण VT-ANB) अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में जा गिरा रनवे से मात्र 1.7 किलोमीटर की दूरी पर।  विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई और जमीन पर 19 और लोगों की जानें गईं — कुल मृतक संख्या 260 रही। यह एक दशक में दुनिया की सबसे बड़ी विमान दुर्घटना थी। विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक सहित अन्य यात्री सवार थे। एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक विश्वाश कुमार रमेश थे, जिन्हें मलबे से निकाल कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सालगिरह पर श्रद्धांजलि, आँखें नम

दुर्घटना स्थल पर शुक्रवार को एक महिला अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीर को सीने से लगाकर रोती रही, जबकि एक अन्य परिवार ने अपने बेटे की याद में छात्रावास के खंडहरों पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखेरीं। एक चालक सुरेश पाटनी भी उस जगह आए जहाँ विमान आग के गोले में बदल गया था। एक व्यक्ति ने कहा, “हमारा घर अभी भी उसी जगह पर है, लेकिन यहाँ रहने का मन नहीं करता… उन्हीं चेहरों और यादों की याद आती रहती है।” गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित अन्य पीड़ितों को दुर्घटना स्थल पर श्रद्धांजलि दी गई। ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून भी स्थल पर पहुँचीं और अपना सम्मान अर्पित किया।

जाँच रिपोर्ट अधूरी — परिवारों में आक्रोश

अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) के अनुलग्नक 13 के तहत, किसी भी दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट 12 महीनों के भीतर जारी होनी चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो वर्षगाँठ पर एक अंतरिम वक्तव्य देना अनिवार्य है। पीड़ित परिवार शुक्रवार तक अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे थे, किंतु भारत का विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB) केवल एक अंतरिम रिपोर्ट जारी करने की स्थिति में है। सूत्रों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट लगभग तीन महीने और विलंबित हो सकती है, क्योंकि इंजन संबंधी विश्लेषण का काम अभी पूरा नहीं हुआ है।

जाँच में AAIB के साथ-साथ अमेरिकी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB), बोइंग, GE एयरोस्पेस और फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) भी भागीदार हैं।

प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या सामने आया?

AAIB की 15 पृष्ठों की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया था कि उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही विमान के दोनों इंजनों के ईंधन नियंत्रण स्विच एक के बाद एक  एक सेकंड के अंतराल में ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ स्थिति में आ गए, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए।

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछ रहा है कि उसने ईंधन क्यों बंद किया, जिस पर दूसरे का जवाब था कि उसने ऐसा नहीं किया।  अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कॉकपिट रिकॉर्डिंग इस दृष्टिकोण का समर्थन करती है कि कैप्टन ने ईंधन की आपूर्ति काट दी।

पायलट संघ का विरोध — “अंतरिम रिपोर्ट भ्रम पैदा करेगी”

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स यूनियन के अध्यक्ष चरणवीर राँधवा ने अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “अंतरिम रिपोर्ट से केवल अटकलें और गलतफहमियाँ बढ़ेंगी।” उन्होंने भारत सरकार और AAIB से अनुरोध किया कि वे कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी न करें। यूनियन का कहना है कि जाँचकर्ताओं को बोइंग और एयर इंडिया से अधिक तकनीकी डेटा माँगना चाहिए ताकि “पायलट आत्महत्या सिद्धांत का खंडन” किया जा सके।

अंतिम रिपोर्ट से क्या तय होगा?

अंतिम रिपोर्ट यह निर्धारित करेगी कि यह त्रासदी किसी तकनीकी खराबी, मानवीय कार्रवाई, सिस्टम विफलता या इन सभी के संयोजन का परिणाम थी। एयर इंडिया के लिए यह वर्षगाँठ ऐसे समय में आई है जब एयरलाइन टाटा समूह के स्वामित्व में वापस आने के बाद पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। इस दुर्घटना ने उसके प्रयासों पर गहरी चोट की थी।

नागरिक उड्डयन मंत्री का बयान

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने आज सोशल मीडिया पर लिखा — “आज जब हम AI-171 दुर्घटना की पहली वर्षगाँठ मनाते हैं, हम गहरे दुख के साथ उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने अपनी जानें गँवाईं। जाँच पूरी सावधानी और व्यावसायिकता के साथ जारी है।” यह दुर्घटना बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के इतिहास में पहली घातक दुर्घटना थी। एक साल बाद भी सच का इंतजार जारी है — और 260 परिवारों के लिए हर दिन उस इंतजार का बोझ और भारी होता जा रहा है।

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