वीज़ा विवाद, युद्ध की छाया, मानवाधिकार संकट और राजनीतिक भँवर में फँसा दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन
आज से फीफा विश्व कप 2026 का आगाज़ हो रहा है मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच मेक्सिको सिटी में पहला मैच खेला जाएगा। लेकिन इस महाकुंभ का उत्साह इस बार उन तमाम विवादों, संकटों और राजनीतिक उठापटक की भारी परछाईं तले दब गया है, जो पिछले कई महीनों से इस टूर्नामेंट को घेरे हुए हैं। 48 टीमों वाला यह विश्व कप अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको तीन देशों में एक साथ आयोजित हो रहा है और यही ‘तीन देशों की जटिलता’ इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी साबित हो रही है।
ईरान का संकट: युद्ध, वीज़ा और टिकट — सब विवादित
अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए। अब तक 1,255 लोग मारे जा चुके हैं और 12,000 से अधिक घायल हुए हैं। इस जंग की सीधी मार फुटबॉल पर पड़ी। ईरानी फुटबॉल महासंघ ने फीफा से अपने मैच अमेरिका की बजाय मेक्सिको में कराने की माँग की, लेकिन फीफा ने यह अनुरोध ठुकरा दिया। फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो ने कहा कि ईरान को “आना ही होगा।” ईरान का कहना है कि उसके प्रतिनिधिमंडल के करीब 15 प्रशासनिक और प्रबंधन कर्मचारियों को अमेरिकी वीज़ा नहीं मिला। इसके बाद ईरान को अपना विश्व कप प्रशिक्षण शिविर एरिज़ोना के टक्सन से हटाकर मेक्सिको के सीमावर्ती शहर तिजुआना में स्थानांतरित करना पड़ा। ताज़ा खबर यह है कि ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने उनके समर्थकों का टिकट आवंटन भी रद्द कर दिया है। ईरान 15 जून को लॉस एंजेलिस में न्यूज़ीलैंड से अपना पहला मैच खेलेगा।
वीज़ा का ‘रेड कार्ड’: खिलाड़ी, रेफरी, प्रशंसक — सभी प्रभावित
अमेरिकी सरकार को वीज़ा-संबंधी जटिलताओं और खिलाड़ियों तथा अधिकारियों के प्रवेश से इनकार को लेकर मानवाधिकार विशेषज्ञों और आव्रजन संगठनों की तीखी आलोचना झेलनी पड़ रही है। सोमाली फुटबॉल रेफरी उमर आर्टन, जो विश्व कप के मैचों में रेफरीइंग करने वाले थे, उन्हें इस हफ्ते अमेरिका में प्रवेश से वंचित कर दिया गया। इराक के स्ट्राइकर अयमान हुसैन को शिकागो ओ’हेयर हवाई अड्डे पर घंटों हिरासत में रखा गया और पूछताछ के बाद ही देश में प्रवेश दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान उनका फोन भी जाँचा गया। ट्रंप प्रशासन ने 39 देशों के नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध या पाबंदियाँ लगाई हैं। 48 क्वालिफाइड टीमों में से कोत द’इवोआर, हैती, ईरान और सेनेगल के प्रशंसक इस प्रतिबंध के दायरे में आते हैं।
मानवाधिकार संकट: एमनेस्टी की चेतावनी
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यह विश्व कप “दमन का मंच और सत्तावादी प्रथाओं का प्लेटफॉर्म” बन सकता है। रिपोर्ट में कहा गया “सशस्त्र एजेंट दरवाज़े तोड़ रहे हैं, बच्चों को हिरासत में ले रहे हैं और लाखों लोगों को देश से निकाल रहे हैं।” 2026 में अब तक ICE हिरासत में कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है। एक शरण-आवेदक जो पिछले साल क्लब वर्ल्ड कप फाइनल में अपने बच्चों के साथ न्यू जर्सी गया था, उसे ICE ने गिरफ्तार कर उसके देश वापस भेज दिया इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय प्रशंसकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
महँगाई की मार: टिकट और यात्रा खर्च आसमान पर
तीनों मेज़बान देशों के प्रशंसक टिकटों की आसमानी कीमतों पर रोष में हैं। मैनहट्टन के पेन स्टेशन से न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम जहाँ विश्व कप फाइनल होगा तक की ट्रेन यात्रा का किराया सामान्य 12.90 डॉलर की तुलना में लगभग 12 गुना हो गया है। मेक्सिको में तो विरोध प्रदर्शन तक हुए प्रदर्शनकारियों ने बैनर उठाए जिन पर लिखा था “यह आपका विश्व कप है, हमारी बेदखली है।”
मेक्सिको में हिंसा का साया
मेक्सिको के प्रसिद्ध पुरातत्व स्थल तेओतिहुआकान के एक पिरामिड के ऊपर हमलावर ने गोलियाँ चलाईं, जिसमें एक कनाडाई पर्यटक की मौत हो गई और कई घायल हुए। यह स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर है और विश्व कप के दौरान पर्यटन स्थल के रूप में प्रमुखता से उभरा था।
फीफा की दुविधा: मुनाफा बनाम ज़िम्मेदारी
फीफा ने जून 2025 में अमेरिका को दुनिया के सबसे आशाजनक फुटबॉल बाज़ार के रूप में देखा था 6.2 करोड़ प्रशंसक, 76 प्रतिशत मिलेनियल या जेन-ज़ी, और 12 अरब डॉलर के टूर्नामेंट राजस्व का अनुमान। यह महज़ आशावादिता नहीं थी यह व्यावसायिक तर्क था। लेकिन फीफा ने जब टूर्नामेंट को 48 टीमों तक विस्तारित किया और इन्फेंटिनो ने खुद एक सक्रिय ‘राजनेता’ की भूमिका निभाने की कोशिश की, तो ठीक उसी वक्त दुनिया दशकों की सबसे गहरी दरारों में टूट रही थी।
विश्लेषण: क्या फुटबॉल इसे जोड़ पाएगा?
फुटबॉल को हमेशा ‘दुनिया को जोड़ने वाला खेल’ कहा जाता रहा है। लेकिन 2026 का यह विश्व कप एक ऐसे दौर में शुरू हो रहा है जब दुनिया की दरारें पहले से कहीं ज़्यादा गहरी हैं। एक तरफ युद्ध, दूसरी तरफ वीज़ा की दीवारें, तीसरी तरफ मानवाधिकारों का हनन और इन सबके बीच फीफा का 12 अरब डॉलर का व्यावसायिक सपना। सवाल यह नहीं कि मेसी के उत्तराधिकारी कौन होंगे या ब्राज़ील वापसी करेगा या नहीं। असली सवाल यह है: क्या एक टूटी हुई दुनिया में फुटबॉल सच में पुल बना सकता है — या वह खुद इस दरार का शिकार हो जाएगा?, यह विश्व कप 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेला जाएगा।

