खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। यूनियन शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की। पलाउ-ध्वजांकित टैंकर एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) पर अमेरिकी हमले के बाद लापता तीनों नाविकों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना के साथ ही ओमान तट पर भारतीय नाविकों वाली जहाजों पर लगातार तीसरी घटना सामने आई है। बुधवार को सेटेबेलो पर हमले के अलावा, एक अन्य टैंकर एमटी जलवीर (MT Jalveer) में आग लगने की घटना हुई, जिसमें पांच भारतीयों को बचा लिया गया। इससे पहले सोमवार को एमटी मरिवेक्स (MT Marivex) पर भी हमला हुआ था।
घटना का विवरण
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 9 जून की रात को सेटेबेलो टैंकर पर “प्रिसीजन” हमला किया गया। अमेरिका का आरोप है कि जहाज निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था और ईरान से तेल ले जा रहा था, जो उनके लगाए गए समुद्री ब्लॉकेड का उल्लंघन था। अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम में गोले दागे, जिससे आग लग गई। जहाज पर कुल 24 भारतीय नाविक सवार थे। शुरुआत में 21 को बचाया गया, जबकि तीन लापता बताए गए। अब शिपिंग मंत्री ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी है। कुछ रिपोर्टों में दो नाविकों की पहचान आदित्य शर्मा (डेक कैडेट) और शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) के रूप में हुई है, जबकि मुख्य इंजीनियर पटनाला सुरेश भी लापता थे।भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने हमले की कड़ी निंदा की और कहा, “हम ओमान तट पर वाणिज्यिक जहाज सेटेबेलो पर हमले की निंदा करते हैं।” भारत ने अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जेसन मीक्स को तलब कर मजबूत विरोध दर्ज कराया। MEA ने क्षेत्र में वाणिज्यिक नौवहन और नागरिक ढांचे पर हमलों को रोकने की अपील की।
ओमान में तीसरी घटना
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एमटी जलवीर पर आग लगने की घटना शिनास पोर्ट के पास हुई। जहाज पर 20 क्रू मेंबर्स थे, जिनमें से पांच भारतीयों को गुजरते जहाजों ने बचाया और ओमान ले जाया गया। भारतीय दूतावास ने स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय अधिकारियों से समन्वय की बात कही।ये घटनाएं अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हो रही हैं। अमेरिका ने अप्रैल 2026 से ईरान संबंधित शिपिंग पर ब्लॉकेड लगा रखा है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवाजाही प्रभावित की है।
भारत की चिंता
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी वाणिज्यिक नौवहन पर हमलों का विरोध जताया है। खाड़ी क्षेत्र में हजारों भारतीय नाविक काम करते हैं, इसलिए सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। सरकार ने बचाए गए नाविकों की देखभाल और परिवारों से संपर्क का आश्वासन दिया है। विपक्षी दलों ने सरकार से मजबूत कूटनीतिक पहल की मांग की है। यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल सकती है, हालांकि दोनों देश रणनीतिक साझेदार बने हुए हैं। ओमान नौसेना और स्थानीय अधिकारियों ने बचाव अभियान चलाया। मृतकों के शवों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। यह घटना खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव की याद दिलाती है, जहां निर्दोष नाविक फंस रहे हैं। भारत सरकार से अपेक्षा है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए।

