सोशल मीडिया की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने उड़ाई बड़े नेताओं की नींद, जानिए क्या है वजह

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक ऐसे अनोखे और गैर-पारंपरिक आंदोलन की गूंज है, जिसने स्थापित राजनीतिक दलों और बड़े-बड़े राजनेताओं की रातों की नींद हराम कर दी है। इस डिजिटल और वैचारिक तूफान का नाम है—कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। सोशल मीडिया पर महज कुछ ही दिनों के भीतर करोड़ों की फैन फॉलोइंग हासिल करने वाले इस आंदोलन की कमान अभिजीत दीपके के हाथों में है। आम आदमी और युवाओं के हकों की बात करने वाले इस संगठन पर अब पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सीधे तौर पर वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

कैसे हुई इस ‘अनोखी’ पार्टी की शुरुआत?

इस पार्टी की नींव किसी पारंपरिक चुनावी एजेंडे पर नहीं, बल्कि समाज के एक तीखे गुस्से पर रखी गई। दरअसल, 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्टों के संदर्भ में ‘कॉकरोच’ और ‘सोसाइटी के पैरासाइट्स (परजीवी)’ जैसी टिप्पणी सामने आई। इस अपमानजनक शब्द को ढाल बनाते हुए 30 वर्षीय पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटजिस्ट अभिजीत दीपके ने अगले ही दिन यानी 16 मई 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (बिल्कुल बीजेपी के नाम की पैरोडी की तरह) लॉन्च कर दी। इसका टैगलाइन दिया गया—“वॉइस ऑफ द लेजी एंड अनएंप्लॉयड” (आलसी और बेरोजगारों की आवाज)। युवाओं ने इस नाम को हाथों-हाथ लिया और देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या 20 मिलियन (2 करोड़) के पार पहुंच गई, जिसने कई स्थापित पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया।

आम आदमी और युवाओं के लिए क्या खास करने वाली है CJP?

अभिजीत दीपके का कहना है कि यह केवल कोई मज़ाक या सैटायर (व्यंग्य) नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और आम आदमी की वास्तविक निराशा की आवाज़ है। CJP ने अपने एजेंडे और मेनिफेस्टो में आम आदमी के लिए कई बड़े और गंभीर मुद्दे उठाए हैं:

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षाओं में सुधार: हाल ही में देश में हुए परीक्षा विवादों, नीट (NEET), पेपर लीक और मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ियों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर एक ऑनलाइन मुहिम चलाई, जिसमें 7 लाख से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। CJP का आरोप है कि देश की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और मध्यम वर्ग के लिए निजी शिक्षा वहन करना नामुमकिन है।
  • न्यायपालिका में पारदर्शिता: CJP की मांग है कि देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या जजों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद कोई भी राजनीतिक पद, सरकारी इनाम या राज्यसभा की सीट नहीं मिलनी चाहिए।
  • महिलाओं को 50% आरक्षण: संसद और कैबिनेट में महिलाओं को बिना किसी देरी के सीधे 50 प्रतिशत आरक्षण देने की वकालत।
  • वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर कड़ा कानून: चुनाव के दौरान बिना किसी ठोस कारण के वोटर्स के नाम काटे जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग।

कौन हैं इसके संस्थापक अभिजीत दीपके?

इस आंदोलन के पीछे दिमाग 30 वर्षीय अभिजीत दीपके का है, जो मूल रूप से छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र के रहने वाले हैं।

  • उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और फिर अमेरिका की प्रतिष्ठित बोस्टन यूनिवर्सिटी (Boston University) से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स (Post Graduation) की डिग्री ली।
  • वह एक कुशल डिजिटल स्ट्रेटजिस्ट हैं और साल 2020 से 2022 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम के साथ भी वालंटियर के तौर पर काम कर चुके हैं। यही कारण है कि विपक्ष उन पर राजनीतिक कनेक्शन के आरोप भी लगा रहा है, हालांकि अभिजीत का कहना है कि CJP किसी भी मौजूदा राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं है।

धमकियों और विवादों के बीच जमीनी स्तर पर उतरने की तैयारी

अभिजीत दीपके ने हाल ही में खुलासा किया कि इस आंदोलन के तेजी से बढ़ने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां भी मिल रही हैं और उनके अकाउंट्स को हैक करने या बंद कराने की कोशिशें की जा रही हैं। विदेशी धरती से भारत लौटने के बाद अभिजीत ने दिल्ली में एक बड़े शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन की योजना बनाई थी। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इस भीड़ को नियंत्रित रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आरोप-प्रत्यारोप

बार काउंसिल और सत्तापक्ष के कुछ नेताओं का मानना है कि यह कुछ फर्जी रैकेट या सोशल मीडिया का एक अस्थायी ट्रेंड है जो जल्द ही खत्म हो जाएगा। लेकिन जिस तरह से देश का युवा वर्ग इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर एकजुट हो रहा है, उसने यह साफ कर दिया है कि रोजगार और बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर आम आदमी के भीतर का गुस्सा अब किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आने वाले दिनों में यह डिजिटल आंदोलन क्या मोड़ लेता है, इस पर पूरे देश के राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र बनी हुई है।

 

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