पतंजलि में जुटे शीर्ष शिक्षाविद: भारतीय शिक्षा बोर्ड के राष्ट्रीय संवाद सत्र में तैयार हुआ शिक्षा सुधार का रोडमैप

हरिद्वार। देश की शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के समन्वय के माध्यम से व्यापक परिवर्तन लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इस दिशा में कार्यरत भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) द्वारा पतंजलि फेज-2 स्थित पीआरआई ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय संवादात्मक बैठक (इंटरैक्शन सेशन) का सफलतापूर्वक समापन हो गया है।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश के 12 विभिन्न राज्यों से आए शीर्ष शिक्षाविदों, विद्यालय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों ने सहभागिता की और भारतीय शिक्षा के भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए गंभीर मंथन किया।

भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का संगम बनेगा बोर्ड: डॉ. एन.पी. सिंह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. एन.पी. सिंह ने शिक्षा व्यवस्था में बोर्ड की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

“भारत की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने में भारतीय शिक्षा बोर्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है। बीएसबी केवल एक शैक्षणिक बोर्ड नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को एकीकृत करने वाला एक राष्ट्रीय शैक्षिक आंदोलन है।”

डॉ. सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत को उसकी जड़ों से जोड़ने वाली शिक्षा व्यवस्था आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप, भारतीय शिक्षा बोर्ड विद्यार्थियों के समग्र विकास, राष्ट्र निर्माण और भारत-केंद्रित शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविदों के अनुभव, सुझाव और विचार-विमर्श भविष्य की शिक्षा नीति और शैक्षणिक नवाचारों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। इस मंथन से निकलने वाले विचार देश की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक और दूरगामी परिवर्तन का आधार बनेंगे।

तीन दिवसीय सत्र के मुख्य बिंदु और उद्देश्य

इस तीन दिवसीय संवाद सत्र का मुख्य उद्देश्य संबद्ध (affiliated) विद्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं संस्थागत विषयों पर सार्थक चर्चा करना था। बोर्ड ने पारदर्शिता, स्पष्टता तथा सहयोगात्मक समाधान के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई:

  • पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकें: भारतीय मूल्यों और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के साथ नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा।
  • मूल्यांकन एवं आकलन प्रक्रियाएँ: छात्रों के सर्वांगीण विकास को मापने के लिए पारदर्शी और प्रभावी मूल्यांकन पद्धतियाँ।
  • संबद्धता संबंधी विषय (Affiliation): स्कूलों को बोर्ड से जोड़ने की प्रक्रियाओं को सरल और स्पष्ट बनाना।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम: शिक्षकों की दक्षता और गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आधुनिक स्वरूप देने के लिए विशेष प्रशिक्षण।
  • ओपन हाउस सत्र: विद्यालयों के प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं, शंकाओं और प्रश्नों का मौके पर ही विस्तृत निवारण।

सहभागियों ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली और नई शिक्षा नीति के अनुरूप इसके विजन की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय मूल्यों पर आधारित यह शिक्षा मॉडल देश की शिक्षा व्यवस्था को एक नई और सही दिशा देने वाला प्रयास है।

वरिष्ठ अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस राष्ट्रीय संवाद सत्र को सफल बनाने में भारतीय शिक्षा बोर्ड के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ अधिकारियों की मुख्य भूमिका रही। कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे:

अधिकारी का नाम पद / विभाग
डॉ. एन.पी. सिंह चेयरमैन, भारतीय शिक्षा बोर्ड (सेवानिवृत्त IAS)
वंदना पांडे प्रशिक्षण एवं गुरुकुल शिक्षा सलाहकार
लक्ष्मी प्रमाणिक शैक्षणिक निदेशक
राजबीर सिंह परीक्षा नियंत्रक
विवेक संबद्धता सलाहकार एवं प्रशिक्षण निदेशक

इस सत्र के समापन के साथ ही भारतीय शिक्षा बोर्ड ने देश में एक मूल्य-आधारित और आधुनिक शिक्षा क्रांति का रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसे आने वाले समय में देश के विभिन्न विद्यालयों में लागू किया जाएगा।

 

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