गार्ड्स की फायरिंग से उठी आंधी में घिरे ‘खान सर’; सरेंडर से इनकार, सोमवार को अग्रिम जमानत याचिका की तैयारी; दमकल विभाग ने थमाया अल्टीमेटम
Khan Sir controversy: बिहार की राजधानी पटना इन दिनों एक ऐसे विवाद की आग में जल रही है जो शिक्षा के मंदिरों की दहलीज़ से निकलकर अदालत के कटघरे तक जा पहुँची है। यूट्यूब पर लाखों छात्रों के चहेते शिक्षक, ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ (KGS) के संचालक फैज़ल खान उर्फ ‘खान सर’ इन दिनों भारी कानूनी संकट में घिरे हुए हैं। उन पर हत्या के प्रयास (BNS की धारा 109) और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर मुकदमा दर्ज हो चुका है। यह एक गैर-जमानती अपराध है जिसमें दोषी पाए जाने पर दस साल तक की सज़ा हो सकती है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी की फिराक में है और वे फिलहाल भूमिगत बताए जा रहे हैं।
वह रात जब शिक्षा की दुनिया में गूँजी गोलियाँ
मामले की शुरुआत होती है 2 जून 2026 की रात से। पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ (KGS) के बाहर प्रतिद्वंद्वी ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान’ के कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की गई। इस हमले में करीब 20 उपद्रवी शामिल थे, जिन्होंने संस्थान की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और खान सर के सुरक्षाकर्मियों से मारपीट की। फैज़ल खान ने ‘ज्ञान बिंदु’ कोचिंग सेंटर के संचालक रौशन आनंद पर इस हमले, तोड़फोड़ और फायरिंग का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर पटना पुलिस ने रौशन आनंद को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन आनंद ने अपना बचाव करते हुए कहा कि खान सर ने उन्हें फंसाने की पूरी साजिश रची है। जांच आगे बढ़ी तो पूरा मामला पलट गया। पुलिस जांच में सामने आया कि फायरिंग KGS कोचिंग सेंटर के गार्ड्स ने ही की थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में खान सर के दोनों निजी सुरक्षाकर्मी हवा में गोलियाँ चलाते साफ दिखे। जब पुलिस ने गार्ड्स प्रमोद कुमार और तालेबर सिंह से पूछताछ की, तो उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने खान सर के आदेश पर ही फायरिंग की थी। इस बयान के बाद मामले का पूरा रुख बदल गया और खान सर स्वयं मुख्य आरोपी बन गए।
कानून का शिकंजा: FIR से लेकर भूमिगत होने तक
फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद कदमकुआं थाने में फैजल खान उर्फ खान सर और उनके सुरक्षा गार्ड प्रमोद कुमार और तालेबर सिंह पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। इस मामले में दोनों गार्ड को जेल भेजा जा चुका है और पुलिस को फैजल खान की तलाश है। एफआईआर दर्ज होते ही पटना की राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल मच गई। शनिवार को दिनभर पटना के सियासी और कानूनी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि खान सर पटना सिविल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने वाले हैं। इस खबर के फैलते ही अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और पुलिस भी मुस्तैद दिखी, लेकिन खान सर सामने नहीं आए। खान सर के वकील अरविंद कुमार महुआर ने साफ किया, “खान सर के कोर्ट में सरेंडर करने का कोई चांस नहीं है। उन्हें इस पूरे मामले में एक सोची-समझी रणनीति के तहत फंसाने की साजिश रची जा रही है। हम इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी रुख अपनाते हुए माननीय अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। यह याचिका सोमवार (8 जून 2026) को कोर्ट में पेश की जा सकती है।” हैरान करने वाली बात यह है कि गायब होने से ठीक पहले खान सर ने खुद कहा था कि वे कानून का सम्मान करते हैं और जांच में खाकी का पूरा साथ देंगे, लेकिन अब वे खुद पुलिस से आंख मिचौली खेल रहे हैं।
कोचिंग सेंटर पर लटकी तालाबंदी की तलवार
कानूनी पेचीदगियों के बीच खान सर के संस्थान को एक और मोर्चे पर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है अग्नि सुरक्षा। दिल्ली के मालवीय नगर और मुजफ्फरपुर की हालिया दुखद घटनाओं के बाद बिहार दमकल सेवा विभाग ने पटना के सभी बड़े होटलों, अस्पतालों और कोचिंग संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू किया है। इस जांच में खान ग्लोबल स्टडीज और खान हॉस्पिटल, दोनों में अग्नि सुरक्षा के गंभीर उल्लंघन पाए गए हैं। जांच में पाई गई प्रमुख कमियाँ इस प्रकार हैं खान ग्लोबल स्टडीज में: मानक के अनुरूप 25,000 लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक नहीं है। डाउन कमर सिस्टम और फायर अलार्म सिस्टम अनुपस्थित हैं। सेटबैक की व्यवस्था नहीं है और सीढ़ियाँ तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
खान कोचिंग सेंटर में: पूरे परिसर में केवल एक ही सीढ़ी है। ऑटोमेटिक डिटेक्शन और स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं है। हाइड्रेंट सिस्टम और भूमिगत जल टैंक (अंडरग्राउंड वॉटर टैंक) जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी नदारद हैं। प्रशासन ने खान ग्लोबल स्टडीज को इन कमियों को दूर करने के लिए 7 से 10 दिन और खान हॉस्पिटल को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी साफ है — यदि तय समय में सुधार नहीं हुआ तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी होगा और संतोषजनक जवाब न मिलने पर भवन को खाली कराकर सील कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पटना में इसी नियम के तहत पहले ही 5 होटलों और 1 व्यावसायिक परिसर को सील किया जा चुका है।
500 करोड़ का साम्राज्य और वर्चस्व की खूनी जंग
यह पूरा मामला दरअसल पटना में कोचिंग उद्योग की उस भयावह प्रतिस्पर्धा का नतीजा है जो हर साल लगभग 500 करोड़ रुपये के कारोबार के लिए लड़ी जाती है। लाखों छात्र रोज़ इन कोचिंग संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन जब इस शिक्षा के बाज़ार में वर्चस्व की लड़ाई गोलियों की आवाज़ तक पहुँच जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने घोषणा की है कि अगले तीन महीनों में कोचिंग संस्थानों के लिए एक सख्त नियमावली लागू की जाएगी, ताकि इस तरह की हिंसक प्रतिद्वंद्विता पर अंकुश लगाया जा सके।
आगे क्या?
सोमवार, 8 जून 2026 को पटना सिविल कोर्ट में खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है। खान सर के वकील के मुताबिक शनिवार को अग्रिम जमानत दाखिल करने की समय सीमा खत्म हो गई थी, इसलिए अब सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में अर्जी लगाई जाएगी। कानूनी टीम गिरफ्तारी से सुरक्षा की माँग करेगी। यह मामला अब केवल एक शिक्षक और एक कोचिंग संस्थान का नहीं रहा। यह उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है जहाँ शिक्षा, व्यवसाय, और वर्चस्व की जंग एक-दूसरे में इस कदर उलझ जाती है कि गोलियाँ चलती हैं और बच्चों का भविष्य दाँव पर लग जाता है। पटना की अदालत और बिहार सरकार का अगला कदम ही तय करेगा कि ‘खान सर’ जैसे जन-शिक्षक का भविष्य किस ओर जाएगा।
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