नोएडा भूमि घोटाला: महर्षि आश्रम जमीन फर्जीवाड़ा मामले में ईडी के रडार पर प्राधिकरण, काली कमाई खपाने का शक

दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर 110 स्थित महर्षि आश्रम की अधिसूचित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष जांच दल (SIT) का शिकंजा कसता जा रहा है। अब इस पूरे खेल में नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Authority) भी सीधे तौर पर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को तगड़ा अंदेशा है कि आश्रम की जमीन पर बने हजारों अवैध फ्लैटों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर काली कमाई (ब्लैकमनी) को खपाया गया है।

प्राधिकरण की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। नियमों के मुताबिक, किसी भी अधिसूचित (Notified) क्षेत्र में बिना प्राधिकरण की मंजूरी के कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि प्राधिकरण से बिना कोई नक्शा (मानचित्र) स्वीकृत कराए ही महर्षि आश्रम की जमीन पर लगभग 26 हजार फ्लैट और मकान खड़े कर दिए गए।

बड़ा सवाल: जब नोएडा प्राधिकरण ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध निर्माण को ढहाने के लिए तुरंत सक्रिय हो जाता है, तो महर्षि आश्रम परिसर में इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण को समय रहते क्यों नहीं रोका गया? क्या इसमें प्राधिकरण के अधिकारियों की मौन सहमति थी? ईडी और एसआईटी अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस अधिसूचित भूमि पर बिल्डरों और कॉलोनाइजर्स को फ्लैट बेचने की अनुमति प्राधिकरण स्तर से दी गई थी या नहीं, और क्या नियमों में ऐसा कोई प्रावधान भी है। जांच का दायरा बढ़ने पर इस खेल में शामिल कई बड़े बिल्डर्स और कॉलोनाइजर्स भी कानून के शिकंजे में आने वाले हैं।

सर्किल रेट से आधी कीमत पर बैनामा, कैश ट्रांजैक्शन का खेल

यह पूरा मामला ‘स्पिरिचुअल रिजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट’ की जमीन से जुड़ा है, जिसे कुछ भू-माफियाओं ने फर्जी कागजात तैयार कर अवैध रूप से बेच डाला।

जमीन का रकबा: करीब 40 बीघा

सरकारी सर्किल रेट के अनुसार कीमत: लगभग ₹33 करोड़

कागजों पर दिखाई गई बिक्री: महज ₹16 करोड़

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 33 करोड़ की जमीन को सिर्फ 16 करोड़ रुपये में बेचा गया ताकि सरकार को स्टांप ड्यूटी (राजस्व) के रूप में कम टैक्स देना पड़े। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों का दावा है कि इस जमीन का असली सौदा 33 करोड़ रुपये से भी कहीं अधिक में हुआ था। सौदे की बाकी बची हुई मोटी रकम कैश (नकद) यानी ब्लैक मनी के रूप में ली और दी गई। ईडी को अंदेशा है कि आश्रम की अन्य जमीनों पर बने हजारों फ्लैटों के सौदों में भी इसी तरह कैश का बड़ा लेन-देन कर काली कमाई को सफेद किया गया है।

इन खसरा नंबरों पर हुआ अवैध निर्माण

जांच एजेंसियों ने आश्रम की उस जमीन को चिन्हित कर लिया है जहां बिना अनुमति के धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया गया। लगभग 39 खसरा नंबरों पर अवैध रूप से फ्लैट बनाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित खसरा नंबर शामिल हैं: 700 से 715, 723, 724, 728, 730 से 735, 745 से 752, 759 से 764, 779, 780, तथा 795 से 798 आदि।

अब तक क्या हुई कार्रवाई?

इस महाघोटाले की परतें उघाड़ने में जुटी ईडी अब तक इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा, रजिस्ट्री विभाग के दो सब-रजिस्ट्रारों (उप-निबंधक) से भी लंबी पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। यदि जांच सही दिशा में आगे बढ़ी, तो जल्द ही नोएडा प्राधिकरण के उन तत्कालीन अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय है, जिनकी नाक के नीचे बिना नक्शा पास हुए हजारों फ्लैट बनकर बिक गए और वे आंखें मूंदे बैठे रहे।

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