सेक्टर के डी-ब्लॉक में बिना छंटाई का वर्षों पुराना पेड़ गिरा, उद्यान विभाग पर उठे सवाल, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की माँग
दिल्ली-एनसीआर में आज दोपहर आई भीषण आंधी और तेज़ बारिश ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की प्रशासनिक उदासीनता की कलई खोल कर रख दी। नोएडा के कई सेक्टर में, डी-ब्लॉक से लेकर 14 तक वर्षों से बिना छंटाई के खड़ा एक विशाल पेड़ दोपहर की तेज़ आंधी में धराशायी हो गया। हालाँकि सौभाग्यवश इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन पड़ोसियों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह किसी भी क्षण एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।

पेड़ का गिरना महज़ संयोग नहीं, लापरवाही की परिणति
स्थानीय निवासियों के अनुसार यह पेड़ कई वर्षों से धीरे-धीरे एक तरफ झुक रहा था और इसकी न तो नियमित छंटाई हुई, न ही कभी संरचनात्मक जाँच की गई। निवासियों ने बार-बार नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग को लिखित और मौखिक शिकायतें भेजीं, परंतु हर बार विभाग ने यह कहकर मामले को टाल दिया कि पेड़ की शाखाएँ बिजली के तारों को नहीं छू रही हैं, इसलिए तत्काल छंटाई आवश्यक नहीं है। स्थानीय निवासी ने बताया, “हमने विभागीय अधिकारियों को कई बार आगाह किया था कि यह पेड़ असंतुलित हो गया है और तेज़ हवाओं में किसी भी दिन गिर सकता है, लेकिन हमारी हर चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया। यदि उस वक्त कोई राहगीर वहाँ से गुज़र रहा होता या पास खड़े वाहन उसकी चपेट में आ जाते, तो आज कोई बड़ा शोक मनाने की नौबत होती।”
आज की आंधी ने एनसीआर में मचाई व्यापक तबाही
आज दिल्ली-एनसीआर में तेज़ आंधी-तूफान के दौरान धूलभरी हवाओं और आंधी ने कई जगहों पर पेड़ों की पत्तियाँ और कचरा हवा में उड़ाया। नोएडा और आसपास के इलाकों में तेज़ बारिश के साथ-साथ आंधी ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया और नोएडा के कई क्षेत्रों में पेड़ गिरने, बिजली के खंभे टूटने की सूचनाएँ मिलीं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर राजस्थान और उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश में 6 जून तक बारिश और तूफान का सिलसिला जारी रह सकता है और इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
मानसून पूर्व की सक्रियता बनी तबाही की वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, केरल में मानसून के आगमन के बाद उत्तर भारत में नमी बढ़ गई है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं, और यह मौसमी बदलाव 6 जून तक बने रहने की संभावना है। ऐसे में यदि नोएडा प्राधिकरण ने समय रहते जोखिमग्रस्त पेड़ों की पहचान और छंटाई का काम पूरा किया होता, तो इस तरह के हादसों से बचा जा सकता था।
उद्यान विभाग को पहले भी मिली थी चेतावनी, फिर भी चुप्पी
यह पहला मौका नहीं है जब नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग पर सवाल उठे हों। मई 2026 में नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने उद्यान विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्यों में देरी पर नाराज़गी जताई थी और मानसून से पहले पेड़ों की छंटाई में तेज़ी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर काम नदारद रहा। इसी तरह नोएडा के बरौला क्षेत्र में भी उद्यान विभाग के निदेशक को बार-बार शिकायतें भेजे जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और हर बार सिर्फ आश्वासन दिया गया।
विशेषज्ञ बोले — पुराने पेड़ों की नियमित जाँच ज़रूरी
वृक्ष विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून से पहले का यह काल सबसे संवेदनशील होता है। पुराने और असंतुलित पेड़, जिनकी वर्षों से छंटाई नहीं हुई हो, तेज़ हवाओं में सहज ही जड़ से उखड़ सकते हैं। ऐसे पेड़ पैदल यात्रियों, वाहनों और निकटवर्ती भवनों के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शहरी वन प्रबंधन में हर वर्ष मानसून पूर्व सभी पुराने एवं झुके हुए पेड़ों का सर्वेक्षण और आवश्यक छंटाई अनिवार्य होनी चाहिए।
प्राधिकरण का जवाब नदारद, जवाबदेही की माँग तेज़
नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया माँगी गई, परंतु समाचार संपादन तक विभाग की ओर से कोई बयान नहीं आया। स्थानीय निवासियों और नागरिक संगठनों ने माँग की है कि इस घटना की विभागीय जाँच हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और शहर के समस्त जोखिमग्रस्त पेड़ों का तत्काल सर्वेक्षण कर उन्हें चिह्नित किया जाए।
स्थानीय प्रतिनिधियों पर भी दबाव
क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधियों से यह माँग उठ रही है कि नोएडा प्राधिकरण को जवाबदेह बनाया जाए और आगामी मानसून सीजन से पहले नोएडा के सभी सेक्टरों में पेड़ों की स्थिति की व्यापक जाँच सुनिश्चित की जाए। उल्लेखनीय है कि नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग का वार्षिक बजट 170 करोड़ रुपये है और यह बजट पार्कों, ग्रीन बेल्ट और सेक्टरों के रखरखाव के लिए निर्धारित किया गया है। इतने बड़े बजट के बावजूद यदि एक पेड़ की छंटाई तक नहीं होती, तो यह गंभीर प्रश्न उठाता है कि यह राशि आखिर जा कहाँ रही है। यह घटना एक बार फिर यह स्पष्ट करती है कि नागरिकों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने की आदत किसी बड़े हादसे की नींव तैयार करती है। जब तक कोई जान नहीं जाती, तब तक प्रशासन की नींद नहीं खुलती, यह सवाल अब हर नोएडावासी पूछ रहा है।

