नोएडा महर्षि आश्रम जमीन घोटाला: SIT और ED की जांच में बड़े खुलासे! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कसा शिकंजा, दिल्ली की तर्ज पर चल सकता है बुलडोजर

नोएडा। सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम की 3.36 एकड़ ट्रस्ट भूमि की अवैध बिक्री और उस पर अनधिकृत निर्माण के मामले में अब जांच एजेंसियों का दोहरा शिकंजा कसता जा रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने में जुटा है।

SIT की जांच: मुख्य सचिव की अगुवाई में लखनऊ में पूछताछ

प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित SIT ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को लखनऊ तलब कर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली है। इसके अलावा निबंधन विभाग और जिला प्रशासन से भी पूरे प्रकरण का ब्यौरा मांगा गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि नोएडा प्राधिकरण के कुछ पूर्व अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को आगे कर इस जमीन पर फ्लैट निर्माण कराए हैं। इससे सोसाइटी के बुनियादी ढांचे — पानी, सीवर, बिजली और सड़क — पर अतिरिक्त और अनियोजित बोझ पड़ रहा है।

फर्जी कोषाध्यक्ष और नकली पैन कार्ड से रची गई साजिश

ED की जांच में इस घोटाले की पर्त-दर-पर्त परतें खुल रही हैं। स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMFI) ट्रस्ट की जमीन की अवैध बिक्री को जमीन घोटाले के रूप में चिह्नित किया गया है। जांच के अनुसार जी. राम चंद्र मोहन इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। उसने वर्ष 2010 में स्वयं को ट्रस्ट का फर्जी कोषाध्यक्ष बताते हुए एक मिलता-जुलता छद्म नाम तैयार किया और फर्जी पैन कार्ड के जरिए बैंक खाते खोले। इस पूरी साजिश में उसका साथ दिया आकाश मालवीय ने, जिसने खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी सेल डीड पर हस्ताक्षर किए। नोएडा के गेझा-तिलपताबाद क्षेत्र में आने वाली यह जमीन वर्ष 2024-25 में सिंह वाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बेची गई थी।

निबंधन विभाग की मिलीभगत पर भी उठे सवाल

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल निबंधन विभाग की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि रजिस्ट्रेशन विभाग की साठगांठ से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रियां कराई गईं, जिससे भोले-भाले खरीदारों को नुकसान उठाना पड़ा। ED ने इस मामले में निबंधन विभाग के दो सब-रजिस्ट्रारों को बुलाकर पूछताछ की है और वर्ष 1992 से अब तक की सभी संबंधित रजिस्ट्रियों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है।

दो आरोपी गिरफ्तार, बड़े नामों पर नजर

ED ने 15 मई को नोएडा में छापेमारी कर इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी अब मनी लॉन्ड्रिंग के तारों को उन तक पहुंचाने में जुटी है, जिन्होंने इस पूरे घोटाले से सीधे या परोक्ष रूप से लाभ उठाया।

क्या दिल्ली की तरह गिराई जाएंगी इमारतें?

एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस तरह दिल्ली में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला है, क्या उसी तर्ज पर महर्षि आश्रम की जमीन पर खड़े हुए अवैध कमर्शियल और आवासीय ढांचों पर भी कार्रवाई होगी? यह सवाल अब केवल स्थानीय निवासियों का नहीं, बल्कि अदालत और जांच एजेंसियों के सामने भी है। SIT और ED की समानांतर जांच से यह स्पष्ट है कि इस प्रकरण में जल्द ही बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई प्रभावशाली लोगों पर शिकंजा कस सकता है।

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