उत्तर प्रदेश में एक तरफ न्याय व्यवस्था पुराने मामलों में देर से सही हो रही है, वहीं दूसरी तरफ लगातार नई हिंसक घटनाएं राज्य की कानून व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। 2 जून 2026 को सामने आए विभिन्न मामलों ने इस तस्वीर को और स्पष्ट किया है। वाराणसी में 29 साल पुराने कस्टडी मौत मामले में दो पुलिस अधिकारियों और एक डॉक्टर को सजा मिली, मथुरा में डबल मर्डर के आरोपी को उम्रकैद हुई, प्रयागराज में पूरे परिवार के तीन सदस्यों सहित चार शव बरामद हुए, जबकि सोनभद्र में 1991 के ऐतिहासिक डाला गोलीकांड की याद ताजा हो गई।
वाराणसी: 29 साल बाद कस्टडी मौत में सजा
वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र में 5 फरवरी 1997 को हुई घटना में बुजुर्ग राजेंद्र प्रसाद सिंह की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। कोर्ट ने 29 साल बाद फैसला सुनाते हुए तत्कालीन दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 वर्ष की जेल, डॉ. केके जैन को 5 वर्ष की जेल और जांच अधिकारी दरोगा राधेश्याम सिंह को 6 माह की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि पीड़ित परिवार को दी जाएगी। मामला तब शुरू हुआ जब राजेंद्र प्रसाद सिंह बस में सीट विवाद के चलते पकड़े गए। आरोप है कि उन्हें चौकी पर पीटा गया और मौत के बाद चोरी का केस दर्ज कर आत्महत्या बताने की कोशिश की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी गड़बड़ी पाई गई। सीबीसीआईडी जांच के बाद केस दर्ज हुआ। विशेष जज अमित कुमार तिवारी की अदालत ने दो कॉन्स्टेबलों को बरी कर दिया, जबकि अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है। यह फैसला कस्टडी में मौत के मामलों में देर से ही सही, लेकिन न्याय की मिसाल बना है।

मथुरा: भीम सिंह-भारती हत्याकांड में उम्रकैद
मथुरा में 19 मार्च 2022 को हुए चर्चित डबल मर्डर केस में कोर्ट ने पवन कुंतल को आजीवन कारावास और 2.5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। पवन ने नौकरी दिलाने के झांसे में भीम सिंह और उनकी पत्नी भारती देवी से 50 लाख रुपये वसूले थे। जब पैसे वापस मांगे गए तो उसने दोनों को वृंदावन ले जाने के बहाने मारुति कार में बिठाया, कर्मयोगी गांव में गला घोंटकर हत्या की और शवों को जला दिया।परिवार ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जले हुए शव बरामद होने पर चश्मा, अंगूठी और पायल से शिनाख्त हुई। 14 गवाहों और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर जिला जज विकास कुमार ने फैसला सुनाया। दो लाख रुपये मुआवजे के रूप में पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे।
प्रयागराज: परिवार के तीन सदस्यों समेत चार शव बरामद, बेटा लापता
प्रयागराज के साउथ मलाका, हिवेट रोड पर एक मकान से बुजुर्ग कारोबारी वीरेंद्र वैश्य (70), पत्नी अंकिता वैश्य और बेटी मीनाक्षी वैश्य (45) के शव मिले। तीनों के सिर पर गंभीर चोट के निशान हैं, जिससे हत्या की आशंका है। ग्राउंड फ्लोर की बंद दुकान से एक अज्ञात शव भी बरामद हुआ है। पड़ोसियों को दुर्गंध आने पर सूचना दी। ऊपरी मंजिल का दरवाजा बाहर से ताला बंद था। परिवार का इकलौता बेटा अभिषेक वैश्य (फ्लोर क्लीनिंग का व्यवसायी) पिछले 3-4 दिनों से लापता है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और संपत्ति विवाद समेत सभी एंगल से जांच कर रही है। पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।
सोनभद्र: 1991 का डाला गोलीकांड आज भी याद
2 जून 1991 को डाला सीमेंट फैक्ट्री में निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर पुलिस फायरिंग में 9 लोग शहीद हो गए थे। कवि रामप्यारे विधि, शैलेंद्र राय, नरेश राम, दीनानाथ, रामधारी, सुरेंद्र द्विवेदी, नंदलाल, बालगोविंद और छात्र राकेश तिवारी सहित कई घायल हुए। 35 साल बाद भी 2 जून को शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह घटना श्रमिक अधिकारों और विरोध की आजादी पर सवाल उठाती रहती है। इन घटनाओं से एक तरफ न्याय प्रक्रिया की धीमी गति दिखती है, तो दूसरी तरफ नए अपराधों की निरंतरता। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन को पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय मिले, यही अपेक्षा है।

