सेक्टर-51 से सटे होशियापुर गांव में कथित अवैध बहुमंजिला निर्माण को लेकर फिर राजनीतिक ताप बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के नोएडा महानगर अध्यक्ष ने स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर नोएडा प्राधिकरण और संबंधित अधिकारीयों की भूमिका पर तीखे सवाल उठाये हैं। उनके आरोपों के अनुसार, जिन जमीनों पर पहले खेत और खुला हरित क्षेत्र था, वहां अचानक कई बहुमंजिला फ्लैट खड़े हो गए हैं और यह सब कैसे संभव हुआ, इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। सपा नेता ने पोस्ट में लिखा कि उस इलाके की भूमि को लेकर पारंपरिक तौर पर खुले स्थान और कृषि-उपयोग का दावा रहा है, लेकिन अब वही जगह बहुमंजिला इमारतों से आच्छादित दिखाई दे रही है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा, “खाली खेतों पर कैसे खड़ी हो गईं इमारतें?” और यह मांग की कि जिन परियोजनाओं का निर्माण हुआ है, क्या उनके पास नोएडा प्राधिकरण से वैध स्वीकृति थी या नियमों को दरकिनार कर निर्माण कराया गया।
महंगे फ्लैट खरीदने वालों के साथ अन्याय के आरोप भी लगाए गए हैं। सपा महानगर अध्यक्ष ने कहा कि सेक्टरों के निवासी वर्षों तक अधिकृत परियोजनाओं में फ्लैट खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, बैंक ईएमआई चुकाते हैं और नियमों का पालन करते हैं; वहीं कुछ गांव क्षेत्रों में कथित बिना मानकों के बहुमंजिला भवन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे कानून के अनुपालन करने वालों के साथ अन्याय होता है। मास्टर प्लान और भवन मानकों पर भी सवाल उठे हैं। सपा नेता का कहना है कि यदि संबंधित निर्माण मास्टर प्लान, संरचनात्मक मानक और सेटबैक नियमों के अनुरूप नहीं हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जांच की मांग करते हुए पूछा कि क्या इन इमारतों के लिए ज़रूरी सर्वे, प्लॉटिंग अनुमति, भवन अनुमति और अन्य नियामक दस्तावेज़ उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। नोएडा प्राधिकरण ने अब तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। प्राधिकरण के एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मामले की जानकारी ली जा रही है और जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। वहीं स्थानीय प्रशासन के स्तर पर भूमि रिकॉर्ड और भूमि उपयोग (जोनिंग) के हिसाब से भी सत्यापन आवश्यक है, जो संबंधित कार्यालयों द्वारा किया जाना चाहिए। स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ निवासी जिन्होंने लंबे समय से इलाके में रहकर नियमों के तहत आवास खरीदा है, उन्होंने न्याय की मांग की और कहा कि यदि अवैध निर्माण साबित होते हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और प्रभावित आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों के साथ न्याय किया जाना चाहिए। दूसरी ओर कुछ स्थानीय लोग बताते हैं कि इलाके में विकास का दबाव बढ़ा है और जमीन की कीमतों के कारण कई भूमियों के उपयोग में परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
कानूनी और प्रशासनिक रास्ता
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सबसे पहले भूमि रिकॉर्ड, साइट प्लान, भवन नक्शे और अनुमति पत्रों का ऑडिट आवश्यक है। यदि दस्तावेज़ों में अनियमितता मिलती है तो प्राधिकरण नोटिस जारी कर निर्माण को रोक सकता है, जुर्माना लगा सकता है और चरम मामलों में अवैध निर्माण के खंडन (डिमोलिशन) की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। साथ ही, स्थानीय आबादी या राजनीतिक दल संबंधित मामले को जनहित याचिका के रूप में भी अदालत पहुँचाकर समाधान की मांग कर सकते हैं।
अब आगे क्या होगा
इस विवाद ने नोएडा प्राधिकरण की पारदर्शिता और भूमि उपयोग नियमन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सपा नेता की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है और यदि मीडिया, नागरिक संगठनों या स्थानीय निवासी सक्रिय रहते हैं तो मामला तेज़ी से सार्वजनिक जांच या प्रशासनिक कार्रवाई में बदल सकता है। न्यूज़ रिपोर्टिंग जारी रहेगी; प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक बयान मिलने पर मामले की नई जानकारी जनता के साथ साझा की जाएगी।

