नागा-कुकी तनाव का नया मोर्चा, वार्ता विफल, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी
Violence Continues in Manipur: संघर्ष की आग में धधकते मणिपुर में एक बार फिर हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। इस बार मैतेई-कुकी टकराव की जगह नागा और कुकी समुदायों के बीच एक नया बंधक संकट खड़ा हो गया है, जो पिछले कुछ हफ्तों से सुलझने का नाम नहीं ले रहा। कुकी और नागा समुदायों के बीच बंधक संकट शुरू होने के एक हफ्ते से अधिक समय बाद भी, 44 लोगों में से 20 लोग अभी तक लापता हैं, और रोजाना चल रही वार्ता इस गतिरोध को तोड़ पाने में नाकाम रही है।
कैसे शुरू हुआ यह संकट?
कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) और यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने कांगपोकपी और नोनी जिलों में 13 मई को हुए एक हिंसक हमले के बाद यह संकट और गहरा दिया। इस हमले में तीन चर्च नेताओं और एक नागा व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद दोनों समुदायों ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर एक-दूसरे के नागरिकों को बंधक बना लिया। कोनसाखुल के ग्रामीणों के अपहरण के बाद नागा समूहों ने सेनापति में दो दर्जन से अधिक कुकी ग्रामीणों का अपहरण कर लिया। इनमें से 14 को वे अब भी बंधक बनाए हुए हैं। ताफौ गांव के मुखिया लेनखोमांग चोंगलोई ने बताया कि अगवा किए गए ज्यादातर लोग उस सुबह जंगल में लकड़ियां लेने गए थे और उन्हें वापसी के दौरान सेनापति में पकड़ लिया गया।
आंशिक रिहाई, लेकिन राहत अधूरी
शुरुआती दौर में मध्यस्थता के प्रयास कुछ रंग लाए। दोनों पक्षों से 14-14 लोगों की रिहाई के साथ कुल 28 बंधकों को मुक्त कराया गया, जिसे यूनाइटेड नागा काउंसिल, नागरिक समाज संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से संभव बनाया गया। नागा पक्ष ने इरेंग लियांगमाई गांव और सेनापति जिले में रोके गए 14 लोगों को रिहा किया। इसी तरह कुकी पक्ष ने 12 महिलाओं सहित 14 लोगों को छोड़ा, जिनमें डिमापुर के सेल्सियन प्रोविंशियल ऑफिस से जुड़े दो व्यक्ति भी शामिल थे। हालांकि लेइलोन वाइफेई गांव में बंधक बनाए गए छह पुरुषों के ठिकाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इम्फाल पश्चिम जिले में बंदी बनाई गई 12 नागा महिलाओं को भी मखान गांव में छोड़ा गया, लेकिन कम से कम छह नागा पुरुषों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
वार्ता विफल, सुरक्षाबलों की तलाशी जारी
केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां कांगपोकपी, सेनापति और आसपास के जिलों में 20 से अधिक लापता लोगों को ढूंढ निकालने के लिए विस्तृत संयुक्त तलाशी अभियान चला रही हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और मणिपुर पुलिस के जवान लेइलोन वाइफेई, सोंगतुन, खुनखो और पी. मोल्डिंग गांव के पहाड़ी इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं। दैनिक वार्ता में चर्च नेता और सामुदायिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, परंतु अब तक कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली है। एक सूत्र के अनुसार, “वार्ता जारी है। काफी मध्यस्थता और बातचीत के बाद कई लोगों को रिहा किया गया है, लेकिन 20 लोग अब भी बाकी हैं और संवाद का सिलसिला चल रहा है।”
सड़क नाकेबंदी से आम जनजीवन ठप
नागा और कुकी संगठनों की दोहरी नाकेबंदी से राजमार्ग ठप हो गया है और ईंधन संकट की आशंका गहरा गई है। छात्र समूह ने सेनापति के एसपी और प्रभारी अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करने और सभी बंधकों को बिना शर्त रिहा करने की मांग की है।
चर्च नेताओं की शांति पहल
मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच बढ़ते तनाव के बीच चर्च नेताओं ने शांति बहाली की बड़ी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि चर्च नेताओं की सक्रिय भूमिका हालात को सामान्य बनाने में बेहद अहम साबित हो सकती है।
नई सरकार, पुरानी मुसीबतें
मणिपुर में लगभग एक वर्ष तक लागू राष्ट्रपति शासन को 4 फरवरी, 2026 को हटाया गया और भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह को नए मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया गया। इस नई सरकार में कुकी और नागा समुदायों के उपमुख्यमंत्री भी शामिल हैं। परंतु अब कुकी-ज़ो संगठनों ने खेमचंद सरकार को बर्खास्त कर राज्य में फिर से राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग उठा दी है। मैतेई संगठन भी मौजूदा सरकार से असंतुष्ट हैं।
व्यापक पृष्ठभूमि: तीन साल से जल रहा मणिपुर
मणिपुर में 3 मई, 2023 से जातीय हिंसा जारी है। इसमें अब तक आधिकारिक रूप से 258 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, 1,108 से अधिक घायल हुए हैं और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हैं। लगभग 400 चर्च क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं। मणिपुर को हिंसा की चपेट में गए तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। राज्य में सामुदायिक खाई और चौड़ी होने तथा हिंसा का दायरा फैलने के बावजूद यह राष्ट्रीय चर्चा में हाशिये पर है।

