सास गिरिबाला सिंह गिरफ्तार, पति समर्थ सिंह पहले से हिरासत में; हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द की
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल-अभिनेत्री त्विशा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु के मामले की जाँच अब अपने सबसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में ‘टनल व्यू’ नामक एक अत्याधुनिक जाँच तकनीक को अपनाया है, जिसके जरिये 12 मई को हुई त्विशा की मौत के अंतिम घंटों का मिनट-दर-मिनट डिजिटल पुनर्निर्माण किया जा रहा है। त्विशा शर्मा, जो भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में 12 मई को फांसी के फंदे पर मृत पाई गई थीं, उनके मामले में CBI ने ‘टनल व्यू’ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए CCTV फुटेज, मोबाइल फोन डेटा, वाई-फाई लॉग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधि, स्मार्ट डिवाइस डेटा, फोरेंसिक रूम मैपिंग और गवाहों के बयानों को एक एकीकृत, टाइम-स्टैम्प्ड डिजिटल मॉडल में तब्दील किया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि त्विशा घर में किस कमरे में कब थीं, किसने किस समय घर में प्रवेश किया या निकला, और मृत्यु से पहले की घटनाओं का सटीक क्रम क्या था।
गिरिबाला सिंह गिरफ्तार, हाईकोर्ट ने पलटी अग्रिम जमानत
CBI ने गुरुवार को त्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह को साढ़े छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। गिरिबाला एक सेवानिवृत्त जज हैं और भोपाल में उपभोक्ता न्यायालय की अध्यक्ष भी रही हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों और उन पर लगे गंभीर आरोपों को देखते हुए यह जमानत उचित नहीं थी। वेकेशन जज देवनारायण मिश्रा ने 17 पन्नों के आदेश में यह फैसला सुनाया। त्विशा के परिवार ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि न्याय की जीत हुई है। उनका कहना था कि गिरिबाला 36 वर्षों तक न्यायिक सेवा में रहीं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि वे कानून से ऊपर हैं। त्विशा के पति और वकील समर्थ सिंह पहले से ही CBI की हिरासत में हैं।
डिलीट किए गए चैट और गर्भपात विवाद भी जाँच के दायरे में
CBI दिल्ली की स्पेशल क्राइम यूनिट की टीम ने भोपाल पहुँचकर केस डायरी, गवाहों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए हैं। एजेंसी ने स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज FIR को फिर से पंजीकृत किया है, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के आरोपों में नामजद किया गया है। जाँचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि त्विशा का मनोचिकित्सा उपचार कब शुरू हुआ, क्या उनके परिवार को इसकी जानकारी दी गई थी और उचित सहमति प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। इसके अलावा, आरोप है कि समर्थ ने अपने मोबाइल फोन से त्विशा और उसके परिवार के साथ हुई कई व्हाट्सऐप बातचीत को डिलीट कर दिया, जिसे तकनीकी विशेषज्ञ अब रिकवर करने में जुटे हैं। इससे पहले SIT जाँच के दौरान समर्थ से तीन घंटे की कड़ी पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने कहा कि त्विशा हाल ही में हुए गर्भपात के बाद गहरे मानसिक तनाव में थीं। हालांकि त्विशा के परिवार ने इस दावे को सिरे से नकार दिया है।
CBI की रणनीति: आमने-सामने बिठाकर होगी पूछताछ
अधिकारियों के अनुसार CBI की योजना है कि माँ-बेटे यानी गिरिबाला और समर्थ को पूछताछ के दौरान एक-दूसरे के सामने बिठाया जाए, ताकि उनके बयानों में विरोधाभास उजागर हो सके। दो गिरफ्तारियों के साथ और डिजिटल साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से जोड़ने के बाद यह जाँच अपने सबसे गहन चरण में प्रवेश कर चुकी है।
परिवार के आरोप और गिरिबाला का बचाव
त्विशा के परिवार ने गिरिबाला और समर्थ पर दहेज के लिए गंभीर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है और यह भी आरोप है कि गिरिबाला ने अपने न्यायिक अनुभव का इस्तेमाल करते हुए अपराध स्थल के साथ छेड़छाड़ की। दूसरी ओर, गिरिबाला ने 18 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि त्विशा नशे की लत की शिकार थीं एक दावा जिसे त्विशा के परिवार ने दृढ़ता से नकारा। 
क्या है ‘टनल व्यू’ तकनीक?
‘टनल व्यू’ वह जाँच पद्धति है जिसमें CCTV, फोन रिकॉर्ड, वाई-फाई लॉग, इंटरनेट गतिविधि, स्मार्ट डिवाइस डेटा, फोरेंसिक मैपिंग और गवाहों के बयानों को एक केंद्रित और एकीकृत टाइमलाइन में पिरोया जाता है। इससे किसी अपराध के अंतिम क्षणों का वस्तुतः डिजिटल पुनर्निर्माण संभव होता है जो न केवल साक्ष्य जुटाने में, बल्कि अदालत में उन्हें प्रस्तुत करने में भी निर्णायक भूमिका निभाता है। इस मामले में CBI का यह कदम यह संकेत देता है कि जाँच एजेंसी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर एक अटूट कड़ी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में आरोपियों से और सघन पूछताछ और फोरेंसिक रिपोर्टों के आधार पर मामले में नए मोड़ आने की संभावना है।

