सेना ने कहा, AAP‑RJD प्रेस वार्ता में दिखे पूर्व सैनिक; दो निष्कासित, दो भगोड़े घोषित, दावे भ्रामक

भारतीय सेना ने उस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और Rashtriya Janata Dal (RJD) के सांसद मनोज झा के साथ चार पुरुष वर्दी में दिखाई दिए थे। सेना ने बताया कि जिन चार व्यक्तियों को सैन्य वर्दी पहने देखा गया, वे सक्रिय सैन्यकर्मी नहीं हैं बल्कि पहले से ही सेवा से निष्कासित या भगोड़ा घोषित किए जा चुके पूर्व सैनिक हैं। सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, उनमें से दो व्यक्तियों को पिछले वर्षों में अनुशासनहीनता तथा नियमों का उल्लंघन करने के आधार पर सेवाबाट निकाल दिया गया था, जबकि शेष दो को अवज्ञा के कारण भगोड़ा (deserter) घोषित किया गया था। बयान में कहा गया कि ये लोग सक्रिय सैनिकों की भाँति वर्दी पहनकर और सैनिकों के प्रतीक चिन्हों का उपयोग कर समाज में भ्रम फैला रहे हैं।

बयान में यह भी कहा गया कि उक्त व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर साझा किए जा रहे दावे तथ्यपरक नहीं हैं और जनता को गुमराह कर सकते हैं। सेना ने नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध जानकारी की सत्यता आधिकारिक स्रोतों से जाँचने का आवाहन किया है। साथ ही, सेना ने कहा कि आवश्यकतानुसार कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई के विकल्प खुले रखे गए हैं।

AAP और RJD नेताओं का पक्ष

इस घटनाक्रम पर AAP सांसद संजय सिंह और RJD सांसद मनोज झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए मुद्दों का दोहराव किया और सुरक्षा तथा पूर्व सैनिकों से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े किए। दोनों नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल संबंधित मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना था। हालांकि, सेना द्वारा जारी स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक दलों के कुछ कार्यकर्ताओं और समर्थक सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

सैन्य तथा सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ इस बात पर सहमति जताते हैं कि वर्दी और सैन्य प्रतीकों का अनुचित उपयोग संवेदनशील हो सकता है और इससे नागरिकों में भ्रांति पैदा हो सकती है। एक रक्षा विश्लेषक ने कहा, “पूर्व सैनिकों को भी अपने अधिकार हैं, पर सैन्य पहचान की नकल करना और उसे सार्वजनिक बहस में हथियार की तरह इस्तेमाल करना संवैधानिक और सार्वजनिक हित के लिहाज से सही नहीं।”

आगे की संभावनाएँ

भारतीय सेना के बयान के बाद प्रशासनिक जांच और मीडिया कवरेज बढ़ने की संभावना है। यदि वे लोग असल में निष्कासित या भगोड़ा घोषित हैं, तो उन पर वर्दी या सैन्य प्रतीकों के अनुचित उपयोग से संबंधित कानूनी कार्रवाई के अनुरोध उठ सकते हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक संदर्भ में इस घटना का विकल्पिक प्रचार-प्रसार भी देखा जा रहा है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ सकती है।

पत्रकारीय अनुरोध

इस मामले के और विवरण, संबंधित व्यक्तियों की पहचान और सेना द्वारा अपनाए जाने वाले अनुशासनात्मक कदमों की पुष्टि के लिए हमने सेना और संबंधित राजनीतिक दलों दोनों से टिप्पणी का अनुरोध किया है; उनसे प्राप्त प्रतिक्रियाएँ मिलते ही अपडेट जारी किया जाएगा।

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