प्रथम वर्ष व द्वितीय वर्ष के छात्रों के बीच भिड़ंत, ‘बी’ और ‘सी’ ब्लॉक बने रणभूमि; यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों की आँधी में घिर गई है। दनकौर थाना क्षेत्र में स्थित इस यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रों के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई और लात-घूंसे चले। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया।
लिफ्ट की मामूली नोक-झोंक बनी हिंसा की वजह
जो मामला सामने आया है वह अत्यंत साधारण कारण से शुरू हुआ, लेकिन उसका अंत बेहद शर्मनाक रहा। विवाद एक लिफ्ट के उपयोग को लेकर हुआ था। यह घटना यूनिवर्सिटी के ‘सी’ ब्लॉक की है, जहाँ प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों के बीच मारपीट हुई। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के ‘बी’ ब्लॉक में भी दो गुटों के बीच हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ। बताया जाता है कि पहले दोनों पक्षों के बीच मौखिक कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट की नौबत आ गई और छात्रों के दो गुट आपस में भिड़ गए, जिनमें जमकर लात-घूंसे चले।
वीडियो में दिखा खौफनाक मंज़र
वायरल वीडियो में छात्र एक-दूसरे पर जमकर लात-घूंसे बरसाते हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में कई छात्र विश्वविद्यालय परिसर के तीसरे तल पर आपस में मारपीट करते दिख रहे हैं और एक-दूसरे को उठा-उठाकर जमीन पर पटकते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में अन्य छात्र मौके पर मौजूद रहे, लेकिन उन्होंने लड़ाई रोकने के बजाय पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया। वायरल वीडियो में दिखाई दे रही लड़ाई किसी फिल्म के एक्शन दृश्य से कम नहीं थी। मारपीट के दौरान छात्रों को अंदरूनी चोट आई।
पुलिस ने लिया संज्ञान, जांच शुरू
सरेआम हुई इस घटना से विश्वविद्यालय प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया। वायरल वीडियो नोएडा पुलिस तक पहुँचा, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। कोतवाली दनकौर पुलिस का कहना है कि इस मामले में शिकायत नहीं मिली है, लेकिन पुलिस सोशल मीडिया में वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कह रही है। वीडियो के आधार पर मारपीट में शामिल छात्रों की पहचान की जा रही है और यूनिवर्सिटी प्रशासन से भी पूरे मामले की लिखित रिपोर्ट तलब की गई है।
प्रशासन ने कहा — समझौता हो गया, पर सवाल बाकी हैं
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि दोनों गुटों को समझाकर समझौता करा दिया गया है। लेकिन इस “समझौते” की आड़ में बड़े सवाल अनुत्तरित हैं जब तनाव पहले से चल रहा था, तो प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? कैंपस में सुरक्षा गार्ड और निगरानी तंत्र होने के बावजूद यह हिंसा कैसे हुई? इन सवालों पर अभिभावक वर्ग और समाज में गहरी नाराज़गी है।
यह पहला मामला नहीं लगातार सुर्खियों में है गलगोटिया
यह घटना कोई पहली बार की बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से मारपीट, गुटबाजी और हंगामे की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अन्य निजी यूनिवर्सिटियों से भी इस तरह की खबरें आती रहती हैं। शिक्षण संस्थानों में बढ़ती इस प्रकार की घटनाओं ने अभिभावकों की नींद उड़ा दी है और शिक्षा विभाग के समक्ष भी यह एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रियाएँ दीं। अनेक लोगों ने लिखा कि जो संस्थान भविष्य के इंजीनियर और पेशेवर तैयार करने का दावा करते हैं, वहाँ यदि कैंपस का माहौल ही हिंसा और गुंडागर्दी से भरा हो, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न लगता है। कई यूजर्स ने माँग की कि दोषी छात्रों को निष्कासित किया जाए और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ भी जवाबदेही तय की जाए।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोषी छात्रों के विरुद्ध क्या ठोस कदम उठाते हैं। केवल समझौते से काम नहीं चलेगा जब तक सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और कैंपस में अनुशासन की मजबूत संस्कृति नहीं बनेगी, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।

