SIR का तीसरा चरण घोषित, 22 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में होगा अभियान, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख फ़िलहाल बाहर

40 करोड़ मतदाताओं को कवर करेगा SIR का तीसरा दौर, पहले दो चरणों में 60 करोड़ से अधिक मतदाताओं की सूची साफ़ हो चुकी, भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) के तीसरे और अंतिम चरण की घोषणा कर दी है। आयोग के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह अभियान “आने वाले कुछ दिनों” में शुरू होगा और देश के शेष 22 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 40 करोड़ मतदाताओं को इसके दायरे में लाया जाएगा।

किन राज्यों को भेजे गए पत्र?

निर्वाचन आयोग ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। हालाँकि, ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को फ़िलहाल तीसरे चरण के प्रारंभिक दौर से बाहर रखा गया है।

देरी की वजह क्या रही?

आयोग के अनुसार तीसरे चरण को शुरू करने में विलंब इसलिए हुआ, क्योंकि केरल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों के कारण इसे रोका गया था। चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद आयोग ने अब इस अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

अब तक क्या हुआ पहले दो चरणों का लेखा-जोखा

अब तक SIR 10 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में संपन्न हो चुकी है उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा और बिहार। असम में ‘विशेष पुनरीक्षण’ कराया गया। देश के 99 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ मतदाताओं की सूचियों की सफाई हो चुकी है।

5 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए

दूसरे चरण की समाप्ति के बाद जारी आँकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची में 10.2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जब दूसरे चरण की घोषणा 27 अक्टूबर को की गई थी, तब इन राज्यों में मतदाताओं की कुल संख्या 50.99 करोड़ से अधिक थी, जो अब घटकर 45.81 करोड़ रह गई — यानी 5.18 करोड़ नामों की कटौती हुई। कुल 66,88,636 मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इनमें सबसे ज़्यादा 25.47 लाख नाम उत्तर प्रदेश से और 24.16 लाख नाम पश्चिम बंगाल से काटे गए। इसके अलावा, आपत्तियों और सुनवाई की प्रक्रिया के बाद 63.16 लाख अतिरिक्त नाम भी मतदाता सूची से हटाए गए।

विवादों का लंबा सिलसिला

यह अभियान अपनी शुरुआत से ही विवादों में रहा है। बिहार में SIR लागू होने से पहले ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में इसे चुनौती देने के लिए राजनीतिक दलों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और तत्कालीन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वयं भारत के मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष इस अभियान के विरोध में अपना पक्ष रखा था। बिहार में SIR से पहले आयोग के अधिकारियों ने दावा किया था कि ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के कई नागरिक मतदाता सूची में मिले। विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया है कि SIR का उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगियों के साथ नहीं जुड़े मतदाताओं को निशाना बनाना है।

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्यों बाहर?

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे बर्फ़बारी से प्रभावित पर्वतीय क्षेत्रों को पहाड़ी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण प्रारंभिक चरण में शामिल नहीं किया जाता रहा है। इन क्षेत्रों में बाद में अलग कार्यक्रम के तहत पुनरीक्षण कराने की योजना है।

आगे की राह

निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह राष्ट्रव्यापी अभियान मतदाता सूचियों को स्वच्छ, अद्यतन और त्रुटिमुक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा है, ताकि भविष्य के चुनाव और अधिक पारदर्शी हों।  SIR में घर-घर सर्वेक्षण के ज़रिए मतदाताओं की पहचान, सत्यापन और सूची से अवैध या मृत नामों को हटाने का काम किया जाता है। तीसरे चरण की शुरुआत के साथ देश के सभी 99 करोड़ मतदाताओं को इस अभियान के दायरे में लाने का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।

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