‘मौत के गड्ढे’ को भरने में लगे 120 दिन, युवराज मेहता हादसे में अब भी बरकरार हैं सवाल

सेक्टर-150 में वह खतरनाक बेसमेंट आखिरकार भर दिया जा रहा है, जिसमें जनवरी में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के चार महीने बाद शनिवार से युद्ध स्तर पर शुरू हुई यह कार्रवाई स्थानीय लोगों और परिवार के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन लापरवाही, प्रशासनिक सुस्ती और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के सवाल अब भी गूंज रहे हैं।

युवराज मेहता गुरुग्राम में एक आईटी कंपनी में कार्यरत थे। 17 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे में ऑफिस से लौटते समय उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा अनियंत्रित होकर सेक्टर-150 के टी-पॉइंट पर सड़क किनारे बने निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरी। करीब 20-40 फीट गहरा यह गड्ढा पानी से भरा था। युवराज ने फोन पर पिता को अंतिम कॉल कर मदद मांगी- “पापा, मैं डूब रहा हूं… बचाओ”। दो घंटे तक तड़पने के बाद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी, ठंडे पानी, नुकीले सरिये और अपर्याप्त उपकरणों ने स्थिति और बिगाड़ दी।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों, परिवार और मीडिया ने नोएडा अथॉरिटी, बिल्डरों और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। बिना मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर्स के खुले पड़े गड्ढे को लेकर सवाल उठे। जांच में सामने आया कि बिल्डरों ने अनुमानित गहराई से ज्यादा खुदाई की थी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। दो बिल्डर कंपनियों (एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन) के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया। नोएडा अथॉरिटी के एक जूनियर इंजीनियर को भी बर्खास्त किया गया।

120 दिनों बाद शुरू हुई कार्रवाई

हादसे के तुरंत बाद गड्ढे में पानी भरा रहने के कारण भराई नहीं हो पाई। एक महीने तक भारी पंपों से पानी निकालने के बाद अब जेसीबी मशीनों से मिट्टी और मलबा डालकर इसे भरने का काम तेजी से चल रहा है। मौके पर पहुंचे प्रत्यक्षदर्शियों और बचाव कार्य में शामिल मनिंदर जैसे युवकों ने बताया कि अंदर नुकीले लोहे के सरिये, भारी पत्थर और निर्माण सामग्री का ढेर अब भी मौजूद है, जो इस गड्ढे की खतरनाक प्रकृति को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो यह हादसा टाला जा सकता था। हादसे के बाद भी लंबे समय तक केवल औपचारिक बैरिकेडिंग तक सीमित कार्रवाई हुई। कई निर्माण स्थलों पर इसी तरह खुले गड्ढे और बेसमेंट बिना सुरक्षा के पड़े रहने की शिकायतें आम हैं।

परिवार न्याय की आस में

युवराज के पिता राजकुमार मेहता हादसे के समय विदेश में थे। बेटे की मौत के सदमे से उबरते हुए वे इस महीने भारत लौट रहे हैं। परिवार के करीबियों के अनुसार वे दोषियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने की मांग करेंगे। परिवार का मानना है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही का परिणाम है।

निर्माण कार्यों में सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

यह घटना ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शहरी नियोजन, सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों की निगरानी को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि घने कोहरे के मौसम में और रिहायशी इलाकों के पास ऐसे प्रोजेक्ट्स की निगरानी सख्त होनी चाहिए। नोएडा अथॉरिटी को अब सक्रिय निगरानी और सख्त दिशानिर्देश जारी करने की जरूरत है ताकि कोई और परिवार इस तरह का दर्द न झेले। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि बेसमेंट भरने के बाद क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा, लेकिन पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग पूर्ण न्याय और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। युवराज मेहता का मामला अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि बेहतर शहरी प्रबंधन की मांग का प्रतीक बन गया है।

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