ममता बनर्जी की ‘सुरक्षित सीट’ भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी से हार, TMC शासन का अंत, BJP का ऐतिहासिक ‘परिवर्तन’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में भूकंप ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सुरक्षित सीट भवानीपुर से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। अधिकारी ने उन्हें करीब 15,105 वोटों से हराया। ममता को 58,812 वोट मिले, जबकि सुवेंदु को 73,917 वोट। यह हार 2021 के नंदीग्राम वाले बदले की कहानी को दोहराती है और TMC के 15 साल के शासन का अंत करती है। भवानीपुर में गिनती के शुरुआती दौर में ममता भारी बढ़त बनाए हुए थीं, कभी-कभी 19,000 वोटों से आगे भी रहीं, लेकिन बाद के राउंड में सुवेंदु ने लगातार बढ़त बनाई और आखिर में जीत दर्ज की। यह हार ममता के लिए न सिर्फ व्यक्तिगत झटका है, बल्कि पूरे TMC के लिए बड़ा धक्का, क्योंकि भाजपा ने पूरे राज्य में 206 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि TMC मात्र 81 सीटों पर सिमट गई।

हार के प्रमुख कारण

1. भारी एंटी-इनकंबेंसी और विकास की मांग:
भवानीपुर सहित शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में मतदाताओं में TMC सरकार के खिलाफ गुस्सा साफ दिखा। भ्रष्टाचार, TMC कार्यकर्ताओं द्वारा कथित हिंसा, और रोजगार-सड़क-शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं पर नाकामी ने वोटरों को भाजपा की ओर मोड़ दिया। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि शहरों के मतदाता सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं थे, इसलिए वे बदलाव चाहते थे।

2. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का प्रभाव:
चुनाव से पहले मतदाता सूची की विशेष समीक्षा में लाखों नाम कटे, जिसमें भवानीपुर से भी 50,000 से ज्यादा नाम हटाए गए। SIR में TMC प्रभाव वाले कई क्षेत्रों में ज्यादा डिलीट हुए, जिसे TMC ने ‘वोटर दमन’ बताया, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे स्वच्छ सूची बनाने की प्रक्रिया करार दिया। कई सीटों पर डिलीट वोटरों की संख्या जीत के मार्जिन से ज्यादा थी, जिसने TMC के पारंपरिक वोट बैंक (खासकर कुछ समुदायों) को प्रभावित किया।

3. सुवेंदु अधिकारी का ‘जायंट स्लेयर’ इमेज:
सुवेंदु, जो पहले ममता के करीबी सहयोगी थे, अब ‘परिवर्तन’ के चेहरे बन चुके हैं। नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी उन्होंने ममता को हराकर अपनी ताकत साबित की। उन्होंने हिंदू वोटों के समेकन (consolidation) का जिक्र करते हुए कहा कि यह बंगाल की किस्मत बदल रहा है।

4. महिलाओं और युवाओं में नाराजगी:
आर.जी. कर मामले जैसी घटनाओं ने महिलाओं में गुस्सा पैदा किया। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भवानीपुर की महिलाएं ममता से खासे नाराज थीं। उच्च मतदान प्रतिशत (92.93%) और युवा वोटरों ने बदलाव का साथ दिया।

आम जनता की प्रतिक्रियाएं

कोलकाता और भवानीपुर के स्थानीय लोगों ने मिश्रित लेकिन ज्यादातर भाजपा समर्थक प्रतिक्रियाएं दीं। एक स्थानीय दुकानदार रामेश्वर दास ने कहा, “15 साल हो गए, TMC ने सिर्फ हिंसा और भर्ती घोटाले दिए। सुवेंदु जीत गए तो विकास होगा, रोजगार आएगा।” एक महिला मतदाता (नाम गुप्त) ने बताया, “महिलाओं की सुरक्षा नहीं रही। ममता दीदी खुद महिला होकर महिलाओं की आवाज नहीं बनीं।” युवा वोटर अंकित ने कहा, “SIR से कुछ नाम कटे, लेकिन जो बचे थे उन्होंने सच्चाई देखकर वोट दिया। अब ‘परिवर्तन’ का समय है।”  TMC समर्थक निराश हैं। एक TMC कार्यकर्ता ने कहा, “यह षड्यंत्र है, EC ने BJP का काम किया। हम वापसी करेंगे।”

ममता का बयान और TMC की प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी ने हार के बाद गिनती केंद्र से बाहर आकर आरोप लगाया, “लूट, लूट, लूट… यह अनैतिक जीत है। BJP ने 100 से ज्यादा सीटें लूटीं। चुनाव आयोग BJP का आयोग है।” उन्होंने इसे ‘अवैध’ बताया और कहा कि वे वापसी करेंगे। TMC ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

राज्य पर असर

भाजपा की यह जीत 2011 के TMC वाले ‘परिवर्तन’ को याद दिलाती है, लेकिन उलट दिशा में। पीएम मोदी ने इसे ‘नए युग’ की शुरुआत बताया और ‘बदला’ नहीं, ‘बदलाव’ का आह्वान किया। सुवेंदु अधिकारी अब राज्य की नई राजनीति के केंद्र में हैं। भवानीपुर की यह हार सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि TMC युग के अंत की प्रतीक है। बंगाल अब नई सरकार और नए एजेंडे की ओर बढ़ रहा है। आगे क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन फिलहाल ‘परिवर्तन’ की हवा साफ महसूस हो रही है।

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