पश्चिम बंगाल चुनाव: ईवीएम विवाद, रिपोलिंग और काउंटिंग स्टाफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ममता बनर्जी की चिंता बढ़ी 

पश्चिम बंगाल चुनाव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना (4 मई) से महज दो दिन पहले राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए ईवीएम tampering और swapping के आरोपों, 15 बूथों पर रिपोलिंग तथा काउंटिंग स्टाफ में केंद्र सरकार कर्मचारियों की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। टीएमसी इसे साजिश बता रही है, जबकि भाजपा और चुनाव आयोग (EC) इसे आधारहीन दावा मानकर खारिज कर रहे हैं।

ईवीएम विवाद और रिपोलिंग की पृष्ठभूमि

29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम tampering, बटन पर टेप चिपकाने और बूथ जामिंग की शिकायतें मिली थीं। इन पर 77 शिकायतों के आधार पर चुनाव आयोग ने 15 बूथों (मगराहाट पश्चिम में 11 और डायमंड हार्बर में 4) पर मतदान रद्द कर 2 मई को रिपोलिंग का आदेश दिया। आज सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक इन बूथों पर मतदान चल रहा है।  ममता बनर्जी ने खुद भवनानिपुर स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया और ईवीएम में tampering, का आरोप लगाते हुए “जान-दे देंगे” तक की बात कही। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना भी दिया। हालांकि, बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इन आरोपों को “बेबुनियाद” बताया और कहा कि सभी स्ट्रॉन्ग रूम CCTV निगरानी में सुरक्षित हैं तथा 70,000 केंद्र बल तैनात हैं।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केंद्र कर्मचारी ही काउंटिंग स्टाफ

टीएमसी की सबसे बड़ी चिंता काउंटिंग प्रक्रिया को लेकर थी। चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक हर काउंटिंग टेबल पर कम से कम एक सुपरवाइजर या असिस्टेंट केंद्र सरकार या पीएसयू का कर्मचारी होना चाहिए। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज कर दी थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सुनवाई के बाद कोई अंतरिम आदेश देने की जरूरत नहीं बताई, जो टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  टीएमसी का तर्क है कि राज्य कर्मचारियों को बाहर रखना निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, जबकि EC का कहना है कि यह उनकी प्राधिकार क्षेत्र में आता है और पूर्वाग्रह का कोई आधार नहीं। भाजपा ने इसे टीएमसी की हार की तैयारी बताया।

एग्जिट पोल और आम जनता की प्रतिक्रिया

कई एग्जिट पोल में भाजपा को टीएमसी पर बढ़त दिखाई गई है, हालांकि ममता बनर्जी पहले भी पोल्स को गलत साबित कर चुकी हैं। राज्य में मतदान प्रतिशत 90% से ऊपर रहा, जो लोकतंत्र की मजबूती दर्शाता है।

आम जनता की आवाज:

कोलकाता के एक शिक्षक रामेश्वर दास ने कहा, “ईवीएम पर सवाल उठाना ठीक है, लेकिन सबूत के बिना आरोप लगाना लोकतंत्र को कमजोर करता है। रिपोलिंग अच्छा कदम है।” डायमंड हार्बर की एक महिला मतदाता रुक्मिणी देवी बोलीं, “हम शांतिपूर्ण मतदान चाहते हैं। जो जीते, उसे स्वीकार करें। हिंसा नहीं होनी चाहिए।” युवा व्यापारी अंकित राय ने टिप्पणी की, “केंद्र कर्मचारी काउंटिंग में हों तो पारदर्शिता बढ़ेगी। ममता दीदी को हार स्वीकार करनी पड़ेगी।” भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने शांति की अपील की और 2021 जैसी हिंसा न दोहराने की चेतावनी दी।

विश्लेषण: रणनीति या घबराहट?

टीएमसी, जो पहले ईवीएम पर कम सवाल उठाती थी, अब “EVM चोरी” का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। विश्लेषक इसे आगामी मतगणना में हार की आशंका से जोड़ रहे हैं। वहीं, EC ने सभी आरोपों की जांच का आश्वासन दिया है। 4 मई को मतगणना के दिन राज्य में कड़ी सुरक्षा रहेगी। पूरे देश की नजरें बंगाल पर टिकी हैं, जहां लोकतंत्र की परीक्षा फिर से हो रही है। चाहे जो परिणाम हो, सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है।

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