बेंगलुरु में प्री-मॉनसून तबाही: ओलावृष्टि और भारी बारिश ने मचाई अफरा-तफरी, 10 मौतें, अस्पताल की दीवार गिरी 

बेंगलुरु में प्री-मॉनसून तबाही: गर्मी से तपते बेंगलुरु में अचानक आई तेज़ ओलावृष्टि, भारी बारिश और तेज़ हवाओं ने शहर को तबाह कर दिया। एक ही शाम में शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी भर गया, पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिरे और सबसे दर्दनाक घटना शिवाजीनगर के बोवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल के कंपाउंड वॉल के गिरने से हुई, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। कुल मिलाकर इस प्री-मॉनसून तूफान में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि कई घायल हुए।

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 29 अप्रैल शाम को शहर में 78-80 मिमी तक बारिश दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर 111 मिमी तक पहुंच गई, जो अप्रैल के लिए रिकॉर्ड स्तर है। कांतीरवा स्टेडियम समेत कई इलाकों की सड़कें ओले से सफेद हो गईं। हवा की रफ्तार 75 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई। कई लोग इस तीव्र ओलावृष्टि को अपनी ज़िंदगी में पहली बार देखने का दावा कर रहे हैं।

क्या था तूफान का कारण?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तीव्र ओलावृष्टि कन्वेक्टिव एक्टिविटी (संवहनी गतिविधि) का नतीजा थी। अप्रैल की तेज़ गर्मी से ज़मीन गरम हो गई, नमी भरी हवा ऊपर उठी और ऊंचाई पर ठंडे तापमान के कारण नमी बर्फ के गोले (हेल) में बदल गई। कम ऊंचाई पर हवा की असंतुलित दिशा (low-level wind discontinuity) और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी का आना इसकी मुख्य वजह बनी|आईएमडी के बेंगलुरु मौसम केंद्र के प्रमुख एन. पुवियरासन ने बताया, “ऊंचे तापमान से उत्पन्न संवहनी गतिविधि, निचली स्तर की हवा की असंगति और नमी का संकेंद्रण इन बादलों को विकसित करने में मदद करता है।” ऐसे तूफान मार्च-अप्रैल में कर्नाटक में आम हैं, क्योंकि इस मौसम में गर्म हवा, नमी और हवा के ट्रफ (दबाव की रेखा) मिलते हैं, जिससे क्यूमुलोनिम्बस बादल बनते हैं और ओले गिरते हैं।

आम जनता की प्रतिक्रियाएं और दर्द

शहरवासी हैरान हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “सुबह तेज़ गर्मी थी, शाम को अचानक आसमान काला हो गया, ओले गिरने लगे और सड़कें बर्फ से ढक गईं।” बोवरिंग अस्पताल के पास दीवार गिरने की घटना सबसे दिल दहला देने वाली रही। पीड़ित ज्यादातर सड़क किनारे के ठेला-पटरी वाले विक्रेता थे, जो बारिश से बचने के लिए दीवार के पास खड़े हो गए थे। मरने वालों में एक छह साल की बच्ची भी शामिल थी, जो अपने सातवें जन्मदिन से पहले शॉपिंग करने गई थी। दो महिलाएं केरल से पर्यटक थीं। घटना स्थल पर बचाव कार्य चला, मलबे में दबे लोगों को निकाला गया। सात घायल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। पूरे शहर में 170 से ज्यादा पेड़ गिरे, 400 से अधिक शाखाएं टूटीं और 500 से ज्यादा इमरजेंसी कॉल्स आईं। इंदिरानगर, कोरमंगला, एमजी रोड, बीटीएम लेआउट आदि इलाकों में 2-3 फीट तक पानी भर गया, ट्रैफिक ठप हो गया और बिजली गुल रही।

सरकारी प्रतिक्रिया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। घायलों का मुफ्त इलाज कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने दीवार गिरने की घटना की जांच के आदेश दिए। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने इसे “चरम मौसम” की वजह बताया और नागरिक अधिकारियों पर लापरवाही से इनकार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये एक्स-ग्रेशिया देने की घोषणा की।

क्या दोबारा होगा ऐसा?

आईएमडी के अनुसार, अप्रैल में ऐसे प्री-मॉनसून शॉवर्स सामान्य हैं। यह शहर की मौसम की अनिश्चितता की याद दिलाते हैं—सुबह गर्मी, शाम को तूफान। विशेषज्ञ कहते हैं कि बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन की वजह से इनकी तीव्रता बढ़ सकती है, लेकिन मार्च-मई के शुरुआती दिनों में यह घटनाएं नियमित रूप से होती रहती हैं। आईएमडी ने 30 अप्रैल और 1 मई तक कुछ इलाकों में मध्यम से भारी बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। शहरवासियों को सतर्क रहने और मौसम अपडेट फॉलो करने की सलाह दी गई है। यह घटना बेंगलुरु की पुरानी इमारतों और बुनियादी ढांचे की कमजोरी की भी याद दिलाती है। दीवार का गिरना सिर्फ मौसम की नहीं, बल्कि रखरखाव की भी उपेक्षा का परिणाम लगता है। शहर की तेज़ शहरीकरण प्रक्रिया में ड्रेनेज सिस्टम और पुरानी दीवारों पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां कम हों।

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