मुंबई ‘तरबूज कांड’: एक परिवार के चार लोगों की रहस्यमयी मौत, बाज़ार में तरबूज की बिक्री धड़ाम जाँच जारी, राजनीति गरम

मुंबई ‘तरबूज कांड’: FDA ने 11 सैंपल जब्त किए, पुलिस हर पहलू से कर रही है जाँच; APMC मंडी में तरबूज की कीमतें गिरकर ₹5-7 प्रति किलो पर आईं। दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके से सामने आए एक दर्दनाक और रहस्यमयी मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों पति, पत्नी और उनकी दो बेटियों की कथित रूप से तरबूज खाने के बाद मृत्यु हो गई। घटना 26 अप्रैल की रात की बताई जा रही है। इस घटना के बाद से न केवल आम जनता में दहशत का माहौल है, बल्कि तरबूज के कारोबार पर भी गहरी चोट पड़ी है और राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।

क्या हुआ उस रात?

मामला पायधुनी के रहने वाले डोकाडिया परिवार का है। अब्दुल्ला और नसरीन डोकाडिया के घर एक पारिवारिक दावत आयोजित की गई थी। इस मौके पर बिरयानी बनाई गई थी, जिसे रात करीब 10 बजे तक कुल 9 लोगों ने मिलकर खाया। पार्टी सामान्य माहौल में खत्म हुई और मेहमान अपने-अपने घर लौट गए। लेकिन रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच परिवार के चार सदस्यों अब्दुल्ला, नसरीन और उनकी दो बच्चों ने तरबूज खाया, जिसके कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उन्हें तेज उल्टी और दस्त की शिकायत हुई।

तरबूज खाने के कुछ ही घंटों बाद रविवार सुबह 5:30 से 6:00 बजे के बीच चारों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टियां, दस्त और चक्कर आने लगे। शुरुआत में परिवार ने अपने फैमिली डॉक्टर से संपर्क किया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत जे.जे. अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान सुबह 10:15 बजे 13 वर्षीय जैनब की मौत हो गई। इसके बाद कुछ ही समय में पत्नी नसरीन और बड़ी बेटी आयशा ने भी दम तोड़ दिया। सबसे अंत में रविवार रात करीब 10:30 बजे परिवार के मुखिया अब्दुल्ला डोकाडिया की भी मौत हो गई। गौरतलब है कि जिन 5 रिश्तेदारों ने केवल चिकन पुलाव खाया था, उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई तबीयत सिर्फ उन चार लोगों की बिगड़ी जिन्होंने बाद में तरबूज खाया था।

जाँच: पुलिस, FDA और फॉरेंसिक टीम मैदान में

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) ने 11 सैंपल एकत्र किए हैं, जिनमें बिरयानी में इस्तेमाल मसाले, कच्चा चावल, कच्चा चिकन, अधखाई खजूर और तरबूज के टुकड़े शामिल हैं। डीसीपी जोन-1 मुंबई डॉ. प्रवीण मुंडे ने वीडियो संदेश में कहा कि इन मौतों को अप्राकृतिक मृत्यु की श्रेणी में रखकर जाँच की जा रही है।

जेजे अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. संजय सुरासे ने कहा कि परिवार ने संभवतः किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किया था। उन्होंने कहा “हम मानते हैं कि खाने में किसी विषाक्त या रासायनिक पदार्थ की मिलावट हो सकती है। फूड पॉइजनिंग के मामलों में इतनी तेज़ी से हालत इस तरह बिगड़ना बेहद असामान्य है। हम एक जहरीले या रासायनिक पदार्थ की संभावना पर विचार कर रहे हैं।” पोस्टमार्टम में चारों के शव में पेनकिलर जैसा कोई पदार्थ मिलने की प्रारंभिक रिपोर्ट भी सामने आई है, हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस मामले के वित्तीय और मानसिक स्वास्थ्य पहलू की भी जाँच कर रही है। अब्दुल्ला के बैंक स्टेटमेंट की जाँच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि वे किसी आर्थिक तनाव में तो नहीं थे।

बाज़ार पर असर: तरबूज की कीमतें औंधे मुँह गिरीं

इस घटना का सीधा और गहरा असर मुंबई के तरबूज कारोबार पर पड़ा है। नवी मुंबई के APMC बाज़ार में, जो एशिया के सबसे बड़े थोक फल बाज़ारों में से एक है, तरबूज की कीमतें घटकर महज ₹5 से ₹7 प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। सामान्यतः इसका थोक भाव ₹10 से ₹35 प्रति किलो होता है, जबकि खुदरा बाज़ार में यह ₹30 से ₹100 प्रति किलो तक बिकता था। APMC के फ्रूट मार्केट डायरेक्टर संजय पानसरे ने बताया कि माँग में भारी कमी आई है और व्यापारी यह मानने से इनकार करते हैं कि केवल तरबूज खाने से ऐसी मौत हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस समय प्रतिदिन करीब 40 वाहनों में लगभग 9 टन तरबूज बाज़ार में आते हैं और मुंबई भर में 360 टन आपूर्ति होती है लेकिन कहीं और ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि माँग में अचानक आई इस गिरावट से भारी नुकसान हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक धूप में रहने से तरबूज खराब हो जाते हैं।

आम जनता में दहशत

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में आम लोग इस घटना से सहमे हुए हैं। बाज़ारों में ग्राहक तरबूज खरीदने से बच रहे हैं और जो फल पहले ही खरीद चुके थे, वे उसे वापस लौटा रहे हैं। व्यापारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और गर्मी में तरबूज खाना जारी रखें, क्योंकि यह एक मौसमी फल है जो शरीर को हाइड्रेट रखता है।

राजनीतिक हलचल

यह मामला अब राजनीतिक अखाड़े में भी पहुँच गया है। विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र सरकार पर खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं और मृतकों के परिवार को न्याय दिलाने की माँग की है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जाँच के लिए कोई ठोस तंत्र नहीं है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने जाँच की निगरानी का आश्वासन दिया है और कहा है कि दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।

विशेषज्ञों की राय

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि फूड पॉइजनिंग के मामले आम हैं, लेकिन पूरे परिवार को जानलेवा हद तक प्रभावित करने वाले मामले दुर्लभ हैं और आमतौर पर बेहद दूषित भोजन या जहरीले पदार्थों के सेवन से होते हैं।

आगे क्या?

डॉक्टरों ने हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार करते हुए फिलहाल अपनी अंतिम राय सुरक्षित रखी है। FDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब माइक्रोबियल फूड पॉइजनिंग होती है, तो आमतौर पर लक्षण आने में 24 घंटे लगते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, FDA और FSL तीनों एजेंसियाँ समानांतर जाँच कर रही हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्यमयी कांड से पर्दा उठेगा। यह खबर विकासशील है और जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर अपडेट की जाती रहेगी।

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