हंसराज कॉलेज मचा बवाल: कॉलेज ने 30 छात्रों को सस्पेंड किया, वर्तमान छात्र संघ के सदस्य भी शामिल, सोशल मीडिया पर ‘मानहानि’ का आरोप

हंसराज कॉलेज मचा बवाल: दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज ने 30 छात्रों को अनुशासनहीनता और सोशल मीडिया पर कॉलेज की छवि खराब करने के आरोप में निलंबित कर दिया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि ये छात्र विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक और अपमानजनक पोस्ट शेयर कर रहे थे, जिससे संस्थान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। यह कार्रवाई छात्रों द्वारा कॉलेज के फैसलों के खिलाफ चले आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही है।

सूत्रो के अनुसार, निलंबन का आदेश कॉलेज के प्राचार्य प्रो. बी.के. कटियार ने जारी किया है। आरोपित छात्रों में से अधिकांश छात्र संघ के सदस्य हैं, जो हाल ही में कॉलेज के कुछ प्रशासनिक निर्णयों का विरोध कर रहे थे। इनमें फीस वृद्धि, परीक्षा पैटर्न में बदलाव और कैंटीन सुविधाओं को लेकर शिकायतें शामिल हैं। कॉलेज प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि छात्रों ने सोशल मीडिया पर फर्जी स्क्रीनशॉट और गलत सूचनाएं फैलाईं, जो ‘डिफेमेशन’ की श्रेणी में आती हैं।

छात्र संगठनों का विरोध, प्रदर्शन की चेतावनी

छात्र संगठनों ने इस फैसले को ‘अनुचित और दमनकारी’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। दिल्ली स्टूडेंट्स यूनियन (डीएसयू) के सदस्यों ने कहा कि यह निलंबन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। एक प्रभावित छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने केवल अपनी समस्याओं को उठाया था, लेकिन प्रशासन ने इसे मानहानि बता दिया। हम कोर्ट जाएंगे।” आज दोपहर कॉलेज गेट पर छात्रों ने धरना शुरू कर दिया है, और डीयू परिसर में विरोध प्रदर्शन तेज होने की आशंका है।

कॉलेज का पक्ष: ‘नियमों का पालन जरूरी’

प्राचार्य प्रो. कटियार ने एक बयान में कहा, “कॉलेज अनुशासन को सर्वोपरि मानता है। सोशल मीडिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रों को निलंबन अवधि के दौरान कॉलेज में प्रवेश पर रोक है, और आगे की जांच के बाद फैसला लिया जाएगा।” कॉलेज ने प्रभावित छात्रों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। डीयू प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मामला प्रॉक्टर कार्यालय तक पहुंच चुका है।

पृष्ठभूमि और संभावित प्रभाव

यह घटना डीयू के कई कॉलेजों में चल रहे छात्र आंदोलनों की कड़ी है। पिछले महीने ही रामजस कॉलेज में इसी तरह की घटना पर विवाद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में कॉलेज प्रशासनों को डिजिटल नैतिकता पर सख्ती बरतनी पड़ रही है, लेकिन इससे छात्र-प्रशासन संबंध और खराब हो सकते हैं। निलंबित छात्रों की संख्या में वृद्धि या कानूनी लड़ाई की स्थिति बन सकती है। कॉलेज ने छात्रों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें। मामले पर नजर रखी जा रही है।

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