हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर: हिंसा की आग में कई महीनों तक झुलसने के बाद मणिपुर में धीरे-धीरे शांति लौट रही थी, लेकिन ताज़ा घटनाओं ने इस प्रदेश के ज़ख्म फिर हरे कर दिए हैं।
बच्चों की मौत से भड़की चिंगारी
मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में 7 अप्रैल को एक रॉकेट हमले में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद कई जिलों में फिर से तनाव की स्थिति बन गई। रविवार की रात हज़ारों लोग मणिपुर के कई जिलों में सड़कों पर उतर गए और जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।
अप्रैल में पाँच मौतें, एक भी गिरफ्तारी नहीं
7 अप्रैल से अब तक मणिपुर में पाँच लोगों की जान जा चुकी है जिनमें दो बच्चे और एक बीएसएफ जवान शामिल हैं और किसी भी मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। 7 अप्रैल को तीन और लोग उस वक्त मारे गए जब सीआरपीएफ जवानों ने एक भीड़ पर गोलीबारी की, जो गेलमोल स्थित हथियार डिपो को लूटने की कोशिश कर रही थी। 10 अप्रैल को उखरूल जिले के लितान क्षेत्र में पश्चिम बंगाल के रहने वाले एक बीएसएफ जवान को गोली मारकर हत्या कर दी गई।
18 अप्रैल की रैली में हिंसा 21 गिरफ्तार
मणिपुर पुलिस ने इंफाल पश्चिम जिले में 18 अप्रैल को आयोजित एक विरोध रैली के दौरान हुई हिंसा के मामले में 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह रैली पटसोई से सगोलबंद तक, इंफाल-जिरीबाम सड़क पर निकाली गई थी, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठी। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके और गुलेल व बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई। घटना में सीआरपीएफ की 232वीं बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।
अरंबाई तेंगोल सदस्य भी गिरफ्तार सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट
पुलिस ने अरंबाई तेंगोल संगठन के एक सदस्य टेंसुबम लामयानबा मैतेई (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया है। उस पर सोशल मीडिया पर भड़काऊ और हिंसा को उकसाने वाली सामग्री पोस्ट करने का आरोप है। “मैतेई नोंग्सा लामयानबा” नाम के फेसबुक अकाउंट से धमकियाँ और हिंसा के लिए उकसावे वाली पोस्ट साझा की जा रही थीं।
पुलिस की चेतावनी भड़काने वाले बख्शे नहीं जाएंगे
इंफाल वेस्ट के एसपी के. शिवकांत सिंह ने चेतावनी दी है कि हिंसा में शामिल लोगों के साथ-साथ ऐसे कृत्यों के लिए भीड़ को उकसाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की आड़ में आए असामाजिक तत्वों ने रैलियों में शामिल होकर हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया है इनमें पेट्रोल बम फेंकना, लोहे के टुकड़ों वाली गुलेल चलाना और भारी पत्थरबाजी करना शामिल है। पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि कुछ उकसाने वाले लोग भीड़ जमा होने से पहले ही पेट्रोल, केरोसिन बम और गुलेल जैसे हथियार लोगों तक पहुँचा रहे थे।
पृष्ठभूमि
मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। फरवरी 2025 में विवादास्पद मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, लेकिन इसके बावजूद राज्य में ताज़ा हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं।

