नई दिल्ली/गुरुग्राम से बड़ी खबरें: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आज दो अलग-अलग लेकिन गंभीर मुद्दे सुर्खियों में हैं। एक तरफ दिल्ली में बिजली बिलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, जबकि दूसरी ओर गुरुग्राम में एक युवा पेशेवर की आत्महत्या ने परिवार और समाज को झकझोर दिया है। दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इनसे स्थानीय स्तर पर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
दिल्ली बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय विवाद में एक नया मोड़ आया है। अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) ने दिल्ली सरकार या संबंधित पक्षों की 30,000 करोड़ रुपये के बकाये पर दायर याचिका खारिज कर दी है। ये बकाया डिस्कॉम्स (बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड) को लिक्विडेशन प्लान के तहत चुकाने वाले पुराने दायित्वों से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के बाद ये राशि (जिसे रेगुलेटरी एसेट्स कहा जाता है) उपभोक्ताओं से अतिरिक्त सरचार्ज के रूप में वसूली जा सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे दिल्लीवासियों के बिजली बिलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, हालांकि सरकार सब्सिडी देकर इसका बोझ कम करने की कोशिश कर रही है। यह फैसला पावर सेक्टर की पुरानी देनदारियों को साफ करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, लेकिन आम उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ने की आशंका है।
दूसरी घटना गुरुग्राम की है, जहां अमेरिकन एक्सप्रेस (Amex) में मैनेजर पद पर कार्यरत 33 वर्षीय रिषभ दीक्षित ने शादी के महज 4 महीने बाद आत्महत्या कर ली। प्रेम विवाह के बाद गुरुग्राम के पिरामिड सोसाइटी, सेक्टर-76 स्थित अपने फ्लैट में शुक्रवार सुबह रिषभ को फांसी के फंदे पर लटका हुआ पाया गया। पुलिस के अनुसार, गुरुवार रात पत्नी सोनम गुप्ता (जो मुंबई में नौकरी करती हैं) से फोन पर छोटी-सी बहस हुई थी। रिषभ बार-बार पत्नी से अपने पास रहने की अपील कर रहे थे, लेकिन असहमति के बाद उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगली सुबह सोनम फ्लैट पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। सोसाइटी सिक्योरिटी की मदद से दरवाजा खुलवाया गया तो रिषभ का शव मिला। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का मामला दर्ज किया है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। रिषभ उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले थे। पुलिस आगे जांच कर रही है और वैवाहिक विवाद को मुख्य वजह मान रही है।
ये दोनों घटनाएं दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करती हैं – एक आर्थिक-नीतिगत दबाव और दूसरी व्यक्तिगत-मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती। अधिकारियों ने दोनों मामलों पर नजर रखने और जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है। आमजन को सलाह दी जा रही है कि बिजली बिलों के अपडेट पर नजर रखें और किसी भी मानसिक तनाव की स्थिति में मदद लें।

