नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: मुआवजे के लालच में अवैध निर्माण पड़ेगा भारी, प्रशासन ने बनानी शुरू की भूमाफियाओं की सूची

जेवर। जेवर तहसील के अधिग्रहित गांवों में अवैध निर्माण का खेल अब प्रशासन की पकड़ में आने लगा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों पर अवैध निर्माण कराने वालों की पहचान शुरू हो गई है। प्रशासनिक टीम गांव-गांव जाकर सर्वे कर रही है और अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों को चिन्हित किया जा चुका है। ऐसे लोगों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उन्हें भूमाफिया घोषित करते हुए उनका मुआवजा भी रोका जाएगा।

क्यों हो रहा है अवैध निर्माण?

दरअसल, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना के लिए सरकार ने जेवर तहसील के कई गांवों की जमीनें अधिग्रहित की थीं और किसानों को विस्थापित किया था। सभी विस्थापित किसानों को नियमानुसार मुआवजा भी दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग अधिक मुआवजा पाने की लालच में अधिग्रहित भूमि पर अवैध निर्माण करा रहे हैं, ताकि निर्माण के नाम पर अतिरिक्त मुआवजा वसूला जा सके।

घटिया सामग्री से निर्माण, जा चुकी है जान

चिंता की बात यह है कि ये अवैध निर्माण घटिया और निम्न स्तरीय निर्माण सामग्री का उपयोग करके कराए जा रहे हैं। इसके चलते अब तक कई हादसे हो चुके हैं और मजदूरों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। बावजूद इसके अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाने का फैसला किया।

धारा 11(4) के तहत हो रहा सर्वे

प्रशासन की टीम धारा 11(4) के रिकॉर्ड के आधार पर गांवों में सर्वे कर रही है। इस सर्वे में यह जांचा जा रहा है कि अधिग्रहण के बाद किन-किन लोगों ने नई संरचनाएं खड़ी की हैं या पुराने निर्माण में अवैध विस्तार किया है। सर्वे में सामने आने वाले सभी मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जो आगे की कार्रवाई का आधार बनेगा।

क्या होगी कार्रवाई?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अवैध निर्माण में लिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ऐसे लोगों को भूमाफिया घोषित किया जाएगा और उनका मुआवजा भी रोक दिया जाएगा। प्रशासन का साफ संदेश है कि सरकारी योजनाओं में अनुचित लाभ उठाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई जेवर एयरपोर्ट परियोजना को सुचारु रूप से पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। प्रशासन की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि अधिग्रहित क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

 

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