फिर खतरे में ताजमहल: दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप की जद में आ गया है। खबर के अनुसार तूफान और बारिश से ताजमहल को नुकसान पहुंचा है। यह कोई पहली बार नहीं है इससे पहले 2018 और 2020 में भी भीषण आंधी-तूफान ने इस ऐतिहासिक स्मारक को क्षति पहुंचाई थी। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 7 और 8 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अलीगढ़ और आगरा समेत 11 जिलों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान आने की आशंका जताई गई है। उत्तर-पश्चिम भारत पर दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिसका असर 7 और 8 अप्रैल को देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव अरब सागर से आने वाली नमी और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण हुआ है।
पहले भी झेला है ताज ने तूफान का कहर
2020 में 124 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने ताजमहल को काफी नुकसान पहुंचाया था। मुख्य स्मारक पर यमुना की ओर लगी लोहे की पाइप से बनी पाड़ गिर पड़ी थी, जिससे संगमरमर की रेलिंग टूट गई थी। पश्चिमी गेट के मुख्य प्रवेश द्वार सहित बरामदे की फॉल सीलिंग को भी नुकसान पहुंचा था और परिसर के कई पेड़ धराशायी हो गए थे। इससे पहले 2018 में आई भयंकर आंधी-तूफान में ताजमहल के एंट्री गेट पर बने दो गुलदस्ता पिलर धाराशायी हो गए थे।
ASI ने शुरू किया नुकसान का आकलन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों ने ताजमहल परिसर में हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य संगमरमरी संरचना सुरक्षित है और क्षतिग्रस्त हिस्सों की जल्द मरम्मत की जाएगी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 7 से 10 अप्रैल तक उत्तर भारत में बारिश और तूफान का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

