ग्रेटर नोएडा टर्मिनल: बोदाकी में बनेगा दिल्ली-NCR का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन, भूमि अधिग्रहण में तेजी

ग्रेटर नोएडा टर्मिनल: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में एक ऐतिहासिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना आकार ले रही है। ग्रेटर नोएडा के बोदाकी में बन रहे मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब (Bodaki Terminal) के लिए भूमि अधिग्रहण, सर्वे और विस्थापन का काम अगले एक साल में पूरा होने की उम्मीद है।

क्या है यह परियोजना?

बोदाकी में बनने वाला यह स्टेशन, जिसे अब आधिकारिक तौर पर “Greater Noida Terminal” नाम दिया गया है, उत्तर भारत के सबसे आधुनिक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यह टर्मिनल 176 हेक्टेयर के विशाल मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के भीतर 46 हेक्टेयर में फैला होगा, जिसमें 12 प्लेटफॉर्म और 63 यार्ड लाइनें होंगी। यह टर्मिनल NCR का पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार बनेगा और वंदे भारत सहित 100 ट्रेनें संचालित करने में सक्षम होगा।

भूमि अधिग्रहण की स्थिति

सर्वे का काम करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है, लेकिन विस्थापन की प्रक्रिया में अभी समय लगेगा क्योंकि किसानों की सहमति ली जा रही है। इस परियोजना से 7 गाँव प्रभावित होंगे और करीब 47.38 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। हालाँकि ग्रामीणों के आपत्ति जताने के कारण सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया कुछ समय के लिए रोकी भी गई थी।

लागत और विशेष दर्जा

इस परियोजना को दिसंबर 2024 में “विशेष रेलवे परियोजना” का दर्जा दिया गया, जिससे भूमि अधिग्रहण और अनुमोदन की प्रक्रिया में तेजी आई है। शुरुआत में इस परियोजना की लागत 1,850 करोड़ रुपये आँकी गई थी, लेकिन डिज़ाइन में बदलावों के चलते यह दोगुनी होने की संभावना है।

क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी?

मल्टी-मोडल हब में 12.5 एकड़ बस डिपो के लिए, 5.5 एकड़ मेट्रो के लिए और 65 एकड़ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आरक्षित किया गया है। इसमें इंटर-स्टेट बस स्टैंड, लोकल टर्मिनल और डिपो से बोदाकी तक मेट्रो लिंक भी शामिल होगा, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

जेवर एयरपोर्ट से जुड़ाव

यह स्टेशन जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) से सिर्फ 30 मिनट की दूरी पर होगा, जो इसे एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय ट्रांजिट हब बनाएगा।

अगला कदम

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा और निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की ACEO श्रीलक्ष्मी वीएस ने कहा है कि सर्वे और विस्थापन का काम एक साल में पूरा करने पर ध्यान केंद्रित है। यह परियोजना दिल्ली के आनंद विहार जैसे व्यस्त स्टेशनों पर यात्रियों का बोझ कम करने और NCR की कनेक्टिविटी को नई ऊँचाई देने में अहम भूमिका निभाएगी।​​​​​​​​​​​​​​​​

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