Did pink paint cause Chanchal’s death?: जयपुर का ‘पिंक एलिफेंट’ विवाद, हाथी को गुलाबी रंगा, बड़ा हंगामा

Did pink paint cause Chanchal’s death?: जयपुर में एक हाथी के साथ किए गए फोटोशूट को लेकर ‘पिंक एलिफेंट’ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है। यह मामला तब सामने आया जब 65 साल की हथिनी चंचल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनमें उसे गुलाबी रंग में रंगा गया था।

क्या है पूरा मामला?

जयपुर में एक फोटोशूट के दौरान हाथी को गुलाबी रंग से रंग दिया गया था। इन तस्वीरों में एक मॉडल को गुलाबी रंग से रंगे हुए हाथी पर बैठकर अलग-अलग पोज देते हुए दिखाया गया है। यह फोटोशूट बार्सिलोना में रहने वाली रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा द्वारा आयोजित किया गया था, जिन्होंने इसे जयपुर की ‘पिंक सिटी’ पहचान से प्रेरित बताया गया है। फोटोग्राफर ने बताया कि यह फोटोशूट जयपुर के एक सुनसान गणेश मंदिर में किया गया था और चूंकि भगवान गणेश का सिर हाथी जैसा है, इसलिए उन्होंने इस जगह को उपयुक्त माना।

फोटोग्राफर की सफाई

जूलिया बुरुलेवा के अनुसार, फोटो और वीडियोशूट लगभग 10 मिनट तक चला, कच्चा गुलाल लगाया गया था और उसे तुरंत धो दिया गया। यह वही रंग था जिसका इस्तेमाल होली के दौरान किया जाता है। आमेर के हाथी गांव के सदस्यों ने भी कहा कि केवल हर्बल रंगों का इस्तेमाल किया गया था और शूट के 30 मिनट के भीतर ही हाथी को साफ कर दिया गया था।

हथिनी चंचल की मौत और बढ़ता विवाद

विवाद तब और गहरा गया जब पता चला कि फोटोशूट में इस्तेमाल हथिनी की इस साल फरवरी में मौत हो गई थी। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि हथिनी की मौत और फोटोशूट के बीच कोई संबंध नहीं है। हथिनी काफी बूढ़ी थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई मानी जा रही है।

जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया

राजस्थान वन विभाग ने इस मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की कि क्या हाथी के साथ शूट के लिए अनुमति ली गई थी।  अभिनेत्री और भाजपा नेता रूपाली गांगुली ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।

सोशल मीडिया पर गुस्सा

लोगों का कहना है कि “भारत आकर महज इंस्टाग्राम लाइक्स के लिए हाथियों को पेंट करना कोई कला नहीं, बल्कि क्रूरता है।” कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि जब AI और आधुनिक तकनीक मौजूद है, तो किसी असली हाथी को तकलीफ देने की क्या जरूरत थी। यह घटना एक बार फिर पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों में जानवरों के उपयोग को लेकर व्यापक बहस को सामने ले आई है। कला और नैतिकता के बीच की सीमा और पशु संरक्षण कानूनों के सख्त अनुपालन की जरूरत पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।

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