Greater Noida Accident: सूरजपुर में खुले नाले में गिरी बाइक, तीन युवक बाल-बाल बचे, प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

Greater Noida Accident: ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर इलाके में एक गंभीर हादसा उस वक्त बड़ी त्रासदी में तब्दील होते-होते बचा जब सड़क पर जमे पानी के बीच खुला नाला दिखाई न देने की वजह से तीन बाइक सवार युवक सीधे नाले में जा गिरे। गुरुद्वारे के पास हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और शहर की बुनियादी ढांचे की खामियों को उजागर कर दिया है।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटनास्थल पर सड़क पर पानी इतना अधिक जमा था कि नाले की सीमा और सड़क में फर्क कर पाना लगभग असंभव हो गया था। नाले का पानी भी किनारे तक भरा हुआ था। इसी दौरान तीन युवक बाइक से उस रास्ते से गुजर रहे थे। अचानक संतुलन बिगड़ा और तीनों बाइक समेत खुले नाले में जा गिरे। किस्मत ने साथ दिया और तीनों युवक बड़े हादसे से बाल-बाल बच गए, किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई।

लोगों ने की मदद, रस्सी से निकाली बाइक

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोग आगे आए और रस्सी की मदद से बाइक को नाले से बाहर निकाला। मौके पर एकत्र भीड़ ने राहत की सांस ली, लेकिन साथ ही प्रशासन के खिलाफ गुस्सा भी फूटा।

स्थानीय लोगों का गुस्सा फूटा

स्थानीय निवासियों ने इस पूरे मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यह खुला नाला और जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्राधिकरण ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अगर नाले को समय रहते ढका होता या जलनिकासी की उचित व्यवस्था होती, तो इस तरह का हादसा कभी न होता।

युवराज मेहता कांड के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

यह घटना इसलिए और भी गंभीर है क्योंकि नोएडा में पहले युवराज मेहता हादसे के बाद प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की चेतावनी दी गई थी। उसके बावजूद सूरजपुर में इस तरह की लापरवाही बरकरार रहना, प्रशासनिक उदासीनता की बड़ी मिसाल है।

लोगों की मांग — तत्काल हो कार्रवाई

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तत्काल इस खुले नाले को बंद करे, जलभराव की स्थायी निकासी की व्यवस्था करे और खतरनाक स्थलों की पहचान कर चेतावनी बोर्ड लगाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम न उठाए गए तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी जान-माल की क्षति हो सकती है। यह पूरी घटना शहरी विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को साफ दर्शाती है, जहाँ एक तरफ करोड़ों की परियोजनाओं की घोषणाएं होती हैं, वहीं दूसरी तरफ खुले नाले जानलेवा साबित हो रहे हैं।​​​​​​​​​​​​​​​​

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