नेपाल में ऐतिहासिक बदलाव: नेपाल की राजनीति में आज एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के अनुच्छेद 76 (1) के तहत बालेंद्र शाह (जिन्हें लोकप्रिय नाम बालेन शाह से जाना जाता है) को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त कर दिया है। आज दोपहर या शाम को शीतल निवास में औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह हुआ। वे नेपाल के 40वें प्रधानमंत्री और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनें।
बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने मार्च 2026 के आम चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया। 275 सदस्यीय संसद में RSP को लगभग 182-184 सीटें मिलीं—यह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में किसी एक पार्टी को मिला अब तक का सबसे बड़ा जनादेश है। बालेन ने खुद झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भारी अंतर (लगभग 50,000 वोटों) से हराया।
बालेन शाह कौन हैं?
उम्र और पृष्ठभूमि: 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में जन्मे। मधेसी मूल के, मैथिली भाषा बोलते हैं। स्ट्रक्चरल इंजीनियर—भारत के कर्नाटक से एमटेक किया।
रैपर से नेता तक: राजनीति में आने से पहले प्रसिद्ध रैपर थे। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सामाजिक मुद्दों पर गाने बनाए। उनका गाना ‘बलिदान’ यूट्यूब पर 14 मिलियन व्यूज पार कर चुका है। हाल ही में उन्होंने ‘एकजुट नेपाली’ गाना रिलीज किया, जो कुछ घंटों में 20 लाख व्यूज पार कर गया।
पहला बड़ा कदम: 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर बने—ऐतिहासिक जीत दर्ज की। तीन साल के कार्यकाल में सड़कों की सफाई, अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई और विरासत संरक्षण के लिए चर्चा में रहे।
यह बदलाव कैसे आया?
पिछले साल सितंबर 2025 में Gen-Z युवाओं के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने केपी शर्मा ओली सरकार को गिरा दिया। प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी। युवा भ्रष्टाचार, महंगाई और पुरानी पार्टियों के भाई-भतीजावाद से तंग आ चुके थे। RSP ने खुद को इस क्रांति का उत्तराधिकारी बताया और युवाओं का भारी समर्थन हासिल किया।
चुनौतियां और विवाद
बालेन शाह के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं:
आर्थिक संकट: ईरान युद्ध के कारण पेट्रोल-गैस की कमी और महंगाई।
पड़ोसी संबंध: भारत और चीन के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना। बालेन ने पहले ‘ग्रेटर नेपाल’ मानचित्र प्रदर्शित किया था और सोशल मीडिया पर कुछ विवादित पोस्ट की थीं (जिन्हें बाद में डिलीट कर दिया)।
मेयर काल की आलोचना: सड़क विक्रेताओं और झोपड़ी वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठनों (जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच) ने आपत्ति जताई थी।
उम्मीदों का बोझ: युवा सरकार से तेज सुधार, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और रोजगार की उम्मीद कर रहे हैं। RSP के पास राष्ट्रीय स्तर पर शासन का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि बालेन को अब ‘विरोधी’ से ‘शासक’ की भूमिका में बदलाव करना होगा। वे छोटे कैबिनेट (15-18 मंत्री) बनाने की तैयारी में हैं।
भारत के लिए मायने
नेपाल-भारत संबंध सदियों पुराने हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कुछ तनाव भी रहा है। बालेन शाह की जीत को युवा पीढ़ी के बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों को उम्मीद है कि नई सरकार व्यावहारिक और स्थिर संबंध बनाए रखेगी।
नेपाल में दशकों से कोई पार्टी पूर्ण बहुमत नहीं पा सकी थी। बालेन शाह की यह जीत Gen-Z क्रांति का परिणाम है और देश की राजनीति में ‘पुरानी व्यवस्था’ के अंत का संकेत देती है। अब देखना होगा कि रैपर से प्रधानमंत्री बने इस युवा नेता अपनी लोकप्रियता को ठोस सुधारों में कैसे बदल पाते हैं। शपथ ग्रहण के बाद कैबिनेट गठन और नीतिगत घोषणाएं नेपाल की नई सरकार की दिशा तय करेंगी।।
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