संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत स्पीकर को हटाने के लिए सदन की कुल सदस्यता (543) के बहुमत यानी कम से कम 272 वोटों की जरूरत होती है। हालांकि, एनडीए की बहुमत वाली स्थिति को देखते हुए इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम है। फिर भी, विपक्ष इसे राजनीतिक बयान के रूप में देख रहा है। स्पीकर ओम बिरला ने फरवरी में प्रस्ताव आने के बाद से सदन की अध्यक्षता नहीं की है, और डिप्टी स्पीकर या अन्य सदस्य इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने स्पीकर पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने विवादास्पद मुद्दों पर सत्ताधारी पार्टी का पक्ष लिया, जो लोकसभा की निष्पक्षता के लिए खतरा है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस कदम पर पछताएगी। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने प्रस्ताव की हार की भविष्यवाणी की है।
यह पहली बार नहीं है जब स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आया हो। इतिहास में जीवी मावलंकर (1954), हुकम सिंह (1966) और बलराम जाखड़ (1987) के खिलाफ भी ऐसे प्रस्ताव आए, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। आज की बहस के बाद सदन को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जो संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकती है।

