UP’s ‘show window’: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में गंदगी-टूटी सड़कें-नाले का पानी, बच्चे तक नशे के कारोबार में, क्या प्रशासन का कंट्रोल निकल गया?

UP’s ‘show window’: उत्तर प्रदेश की ‘शो विंडो’ माने जाने वाले नोएडा-ग्रेटर नोएडा में इन दिनों साफ-सफाई, सड़कें, नाले और अपराध की स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि स्थानीय निवासी खुलेआम पूछ रहे हैं- “क्या प्रशासन के हाथ से शहर निकल गया है?” गंदगी के ढेर, टूटी सड़कें, नालों से बहता गंदा पानी, निर्माण साइटों पर खुली खाइयां और नशे का बढ़ता कारोबार (यहां तक कि नाबालिगों की संलिप्तता) से निवासियों का धैर्य जवाब दे चुका है। हाल ही में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत ने इन समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर कर दिया है।

गंदगी और सफाई की बदहाली
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा सहित कई इलाकों में कूड़ा-कचरा हफ्तों से सड़कों के किनारे पड़ा है। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, डोर-टू-डोर कलेक्शन की गाड़ियां अनियमित हैं और बड़े ट्रक कचरा नहीं उठा रहे है। नोएडा के सेक्टर 71 और 51 में आरडब्ल्यूए ने मीडिया को बताया कि कचरा इकट्ठा होने से आवारा जानवर आ रहे हैं और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गया है। नोएडा अथॉरिटी ने कुछ सोसाइटियों को नोटिस दिए हैं, लेकिन निवासी कहते हैं- “कागजों पर योजनाएं, जमीन पर गंदगी!” एक्स (पूर्व ट्विटर) पर निवासी लगातार पोस्ट कर रहे हैं- “क्लीन नोएडा का दावा, लेकिन सड़कें कूड़े के ढेर!” कुछ अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर सुधार के प्रयास किए, लेकिन बड़े स्तर पर समस्या बनी हुई है।

टूटी सड़कें, नालों से बहता पानी और मौतें
सेक्टर 99 में फुटपाथ टूटे हुए, इंटरलॉकिंग टाइल्स ढीली और सीवर ओवरफ्लो आम बात है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में जनवरी 2026 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक अनमर्क्ड, पानी भरी खुली खाई में गिर गई। बिना बैरिकेडिंग वाली निर्माण साइट पर दो घंटे तक फंसे रहने के बाद उनकी मौत हो गई। इस हादसे में बिल्डरों और अथॉरिटी पर एफआईआर दर्ज हुई, एसआईटी गठित हुई, अभी भी रिपोर्ट का इंतजार ही किया जा रहा, लेकिन निवासी पूछ रहे हैं- “कितनी मौतें हो जाएंगी तब जागेंगे?”

सेक्टर बीटा-1, डेल्टा-1 और 105 में नाले खुलेआम बह रहे हैं, पुरानी पाइपलाइन लीक हो रही हैं। जनवरी में गंदा पानी पीने से कई लोगों को उल्टी-दस्त और बुखार हुआ था। नोएडा अथॉरिटी ने कुछ सड़कों की मरम्मत और ड्रेन कवरिंग का काम शुरू किया है (₹14.6 करोड़ का प्रोजेक्ट), लेकिन निवासी कहते हैं- “पैचवर्क हो रहा है, स्थायी समाधान नहीं!” बच्चे तक नशे के कारोबार में, अपराध बढ़ा
पुलिस के हालिया अभियान में फरवरी 2026 में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 10-16 किलो गांजा बरामद हुआ, कई तस्कर गिरफ्तार हुए। एक्सप्रेसवे थाना और सेक्टर-20 पुलिस ने बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। लेकिन स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि नाबालिग बच्चे भी नशे की सप्लाई और छोटे-मोटे कारोबार में लगे हैं। हालांकि पुलिस डेटा में सीधे “बच्चों द्वारा नशा कारोबार” के बड़े मामले नहीं आए, लेकिन युवाओं और छात्रों में ड्रग्स की सप्लाई की शिकायतें बढ़ी हैं। गुंडा एक्ट के तहत 2024-25 में 274 अपराधियों को बाहर किया गया, फिर भी साइबर फ्रॉड, लूट और छोटे अपराधों में वृद्धि है।

निवासियों का गुस्सा, प्रशासन पर सवाल
एक्स पर ट्रेंडिंग पोस्ट्स में लोग लिख रहे हैं- “नोएडा अथॉरिटी सीईओ कभी सेक्टर नहीं आते, शिकायतें अनसुनी!” एक निवासी ने लिखा- “गवर्नेंस फेलियर की वजह से मौतें हो रही हैं।” नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने सफाई कर्मचारियों की शिफ्टिंग, अतिक्रमण हटाने और ड्रग अभियान चलाए हैं, लेकिन ग्राउंड रियलिटी में सुधार नजर नहीं आ रहा। नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी कहते हैं- “समस्याओं पर काम चल रहा है, जल्द सुधार होगा।” लेकिन निवासी मांग कर रहे हैं- सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप, सख्त मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने की।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शहर की तेज विकास दर के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक क्षमता मेल नहीं खा रही। पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि कचरा जलाना और निर्माण धूल से एयर पॉल्यूशन भी बढ़ रहा है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक बार फिर सुर्खियों में है- लेकिन इस बार ‘शो विंडो’ की बजाय ‘समस्या का केंद्र’ के रूप में। क्या प्रशासन अब भी समय रहते कदम उठाएगा या स्थिति और बिगड़ेगी- यह अगले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा। निवासी इंतजार कर रहे हैं, लेकिन धैर्य खत्म होता जा रहा है।

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