Prayagraj Magh Mela and Shankaracharya controversy: योगी आदित्यनाथ का तीखा पलटवार, ‘कालनेमि’ बताकर सनातन को कमजोर करने वालों पर साधा निशाना

Prayagraj Magh Mela and Shankaracharya controversy: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से चल रहे विवाद पर आज हरियाणा के सोनीपत में कड़ा पलटवार किया। बिना नाम लिए योगी ने कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रचने वाले कई “कालनेमि” सक्रिय हैं, जिनसे सतर्क रहने की जरूरत है।

योगी ने कहा, “एक योगी, संत और सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। उसकी व्यक्तिगत संपत्ति कुछ नहीं होती—धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है। ऐसे तमाम कालनेमि होंगे जो साधु के वेश में सनातन को बदनाम और कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। धर्म के खिलाफ आचरण करने वाला सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं हो सकता।”

यह बयान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के उस आरोप के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने योगी को सनातन धर्म के लिए “औरंगजेब से भी बदतर” बताया था। (कालनेमि रामायण का वह मायावी राक्षस है, जिसने संत का भेष धारण कर हनुमान जी को धोखा देने की कोशिश की थी।)

विवाद की जड़
विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दौरान हुई, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शाही सवारी के साथ संगम स्नान करने निकले। मेला प्रशासन ने उनका काफिला रोक दिया और अन्य अखाड़ों की तरह सामान्य स्नान की सलाह दी। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए उन्हें आधिकारिक रूप से शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया।

इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। मेला प्राधिकरण ने उन्हें दो नोटिस जारी किए—एक में 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया, जबकि दूसरे में मेले में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी गई।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी योगी सरकार का समर्थन किया है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आलोचना की है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य और पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने भी इस मुद्दे पर सरकार के पक्ष में बयान दिए हैं।

अभी भी जारी है गतिरोध
प्रयागराज माघ मेले में तनाव बना हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है, जबकि प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है। विपक्षी दल जैसे समाजवादी पार्टी ने इसे “सनातन का अपमान” करार दिया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से ताजा प्रतिक्रिया का इंतजार है। आगे की अपडेट के लिए नजर रखें।

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