जयपुर: राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) पद पर कार्यरत शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक – ADG) प्रशाखा माथुर और उनके परिवार के सदस्यों की करोड़ों की रियल एस्टेट खरीदारी से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
दैनिक भास्कर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पावर कपल और उनके परिवार के सदस्यों (दो बेटों व रिश्तेदारों) ने लगभग ढाई साल (30 महीने) की अवधि में एक ही कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदे हैं।
पूरा मामला क्या है?
1. खरीदारी का आंकड़ा:
रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर और अलवर सहित कई प्रमुख स्थानों पर इन 40 लग्जरी संपत्तियों को खरीदने में कुल 6.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए। रजिस्ट्री परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम कराई गई।
2. अजीबोगरीब लीज समझौता:
इन संपत्तियों को खरीदने के तुरंत बाद, उसी कंपनी (गोयल फैशंस / अनंत रिजॉर्ट्स ग्रुप) को वापस लीज पर दे दिया गया। इस लीज समझौते से परिवार को हर साल 1.80 करोड़ रुपये की सालाना लीज आय (किराया) प्राप्त हो रही है।
3. पारदर्शिता पर सवाल:
मामले में सबसे बड़ा सवाल संपत्ति के मूल्यांकन (Valuation) और लीज रेंटल के रिटर्न रेट को लेकर उठ रहा है, जहां 6.16 करोड़ की खरीद पर सालाना करीब 30% का लीज रिटर्न मिल रहा है, जो सामान्य बाजार दरों से कहीं अधिक है।
कौन हैं आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर?
IAS शिखर अग्रवाल:
IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद आईएएस बने शिखर अग्रवाल 1993 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वर्तमान में वे अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) पद पर तैनात हैं और उनके पास उद्योग, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC), MSME और निवेश जैसे कई बड़े व महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार है। वे पहले जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के कमिश्नर भी रह चुके हैं।
IPS प्रशाखा माथुर:
शिखर अग्रवाल की पत्नी प्रशाखा माथुर राजस्थान पुलिस में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
IAS अधिकारी की सफाई
इस पूरे मामले और वित्तीय लेन-देन के सामने आने के बाद IAS शिखर अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने और उनके परिवार ने इन सभी संपत्तियों की पूरी जानकारी, कमाई के स्रोत और आईटी रिटर्न नियमानुसार संपत्ति घोषणा (IPR – Immovable Property Return) में दर्ज किए हैं।
हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में एक ही बिल्डर/कंपनी से संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और उससे मिलने वाले भारी-भरकम लीज रिटर्न को लेकर पारदर्शिता और सर्विस रूल्स के तहत स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
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