गाजियाबाद रेप-हत्याकांड: गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में सात वर्षीय मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और नृशंस हत्या के मामले ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। इसी कड़ी में पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद में बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ ने मामले में पुलिसिंग के स्तर पर गंभीर लापरवाही पाए जाने पर नंदग्राम थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह और भोजपुर थाना प्रभारी प्रताप बालियान को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। इसके अतिरिक्त ड्यूटी में लापरवाही और अनैतिक आचरण के आरोप में पांच अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित एवं लाइन हाजिर किया गया है।
क्या था पूरा मामला
बीते सप्ताह गाजियाबाद के नंदग्राम थाना क्षेत्र के राजनगर एक्सटेंशन स्थित एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट से सात वर्षीय बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था। बच्ची निर्माणाधीन मॉल में मजदूरी करने वाले बिहार मूल के एक परिवार की बेटी थी, जो मॉल के पास झुग्गी में रहता था। परिजनों के अनुसार शुक्रवार शाम बच्ची घर के बाहर खेलते हुए अचानक गायब हो गई थी। देर रात परिवार और अन्य मजदूरों ने तलाश के दौरान मॉल के बेसमेंट में उसका शव लहूलुहान हालत में पाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जबकि सिर पर लोहे की वस्तु से गंभीर वार किए जाने से उसकी मौत होना सामने आया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी बच्ची को खाने-पीने का लालच देकर मॉल की ऊपरी मंजिल पर ले गए, वहां दुष्कर्म के बाद राज खुलने के डर से उसकी हत्या कर शव को खाली लिफ्ट शाफ्ट से नीचे फेंक दिया गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार भी किया। मामले में अपहरण, दुष्कर्म, हत्या और पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और फॉरेंसिक जांच, चार्जशीट व फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की तैयारी चल रही है।
लापरवाही पर पुलिस कमिश्नर का सख्त एक्शन
इतने संवेदनशील मामले में पुलिसिंग स्तर पर बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ ने नंदग्राम थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने का आदेश दिया। कमिश्नरेट के अनुसार, थाना प्रभारी पर पीड़ितों की शिकायतों और मुकदमों के पंजीकरण में अनावश्यक देरी बरतने के साथ-साथ पुलिस विभाग की गोपनीय सूचनाएं लीक होने जैसी शिकायतें भी लगातार मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इसके साथ ही भोजपुर थाना क्षेत्र के चुड़ियाला गांव में मारपीट के बाद एक युवक की मौत के मामले में भी पुलिस की कार्यशैली पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई। जांच में कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर लापरवाही सामने आने के बाद भोजपुर थाना प्रभारी प्रताप बालियान को भी तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, पीड़ितों की शिकायतों का समय पर निस्तारण करने और संवेदनशील मामलों में तत्परता बरतने में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फीडबैक सेल की शिकायतों पर भी पांच पुलिसकर्मी दंडित
पुलिस कमिश्नरेट की फीडबैक सेल को नागरिकों से मिली शिकायतों के आधार पर भी पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। पुलिस सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बनाई गई इस व्यवस्था के तहत शिकायतों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया। 15 जुलाई को प्राप्त शिकायतों के आधार पर थाना कौशांबी में तैनात मुख्य आरक्षी दिनेश कुमार और थाना शालीमार गार्डन में तैनात मुख्य आरक्षी मकसूद खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं नंदग्राम थाने के उपनिरीक्षक प्रभाकर सिंह और इंदिरापुरम थाने के उपनिरीक्षक सुखवीर सिंह को भी सस्पेंड किया गया है। इसके अलावा एसीपी नंदग्राम कार्यालय में तैनात मुख्य आरक्षी मोहम्मद आदिल को लाइन हाजिर किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का बयान
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस सेवाओं और पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर आम नागरिकों से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार फीडबैक सेल पुलिस की जवाबदेही तय करने में प्रभावी साबित हो रही है और आगे भी लापरवाह तथा अनुशासनहीन कर्मियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे। गौरतलब है कि पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ इससे पहले भी कई मौकों पर जनसुनवाई में लापरवाही, अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण को लेकर थाना प्रभारियों व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन और लाइन हाजिर जैसी सख्त कार्रवाई करते रहे हैं, जिससे कमिश्नरेट में यह संदेश गया है कि संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

