हरियाणा में भाजपा सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के दो साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री की ओर से रिपोर्ट कार्ड पेश किए जाने के बीच कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने किसानों की समस्याओं, धान की खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), फसल सत्यापन और प्रदेश में बढ़ते अपराध व नशे के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने धान की खरीद में नमी के मानकों में बदलाव करने, मिलर्स की शर्तों पर पुनर्विचार करने और फसल सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग उठाई। इसके साथ ही उन्होंने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करते हुए सरकार पर बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
*मंडियों में धान की खरीद और उठान को लेकर सवाल*
जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और किसानों के हितों की अनदेखी करके देश आगे नहीं बढ़ सकता। उनके मुताबिक, हरियाणा की मंडियों में धान की खरीद और फसल के उठान को लेकर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि मंडियों में उठान की प्रक्रिया प्रभावित है और मिलर्स की संख्या या उनकी भागीदारी में कमी के कारण भी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
उन्होंने सरकार के 24 फसलों पर एमएसपी देने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को हरियाणा में उन सभी 24 फसलों के नाम स्पष्ट करने चाहिए, जिनकी खरीद एमएसपी पर की जा रही है।
पेटवाड़ ने कहा कि सरकार ने धान की खरीद 29 सितंबर से शुरू करने की बात कही थी, लेकिन उनके अनुसार शुरुआती दौर में मंडियों में आढ़ती और मिलर्स खरीद प्रक्रिया में सक्रिय नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी हुई।
*मिलर्स को चावल देने के नियमों में बदलाव की मांग*
कांग्रेस विधायक ने धान की मिलिंग से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मिलर्स को एक क्विंटल धान के बदले 67 किलोग्राम चावल देने की शर्त के कारण परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, इस मात्रा में चावल निकालना मुश्किल होने की वजह से मिलर्स, आढ़तियों और किसानों पर आर्थिक दबाव पड़ता है।
पेटवाड़ ने सुझाव दिया कि एक क्विंटल धान के बदले मिलर्स से 58 से 59 किलोग्राम चावल लेने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे खरीद प्रक्रिया से जुड़े लोगों को राहत मिल सकती है।
उन्होंने धान में नमी की निर्धारित सीमा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। पेटवाड़ के अनुसार, मौजूदा मानकों के तहत 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान खरीदा जाता है। उन्होंने मांग की कि खरीद के लिए नमी की सीमा बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी न हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में नमी के नाम पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, नमी की सीमा में बदलाव के लिए लागू खरीद नियमों और गुणवत्ता संबंधी मानकों पर संबंधित एजेंसियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
*एमएसपी और धान के भाव को लेकर भाजपा पर निशाना*
जस्सी पेटवाड़ ने धान के समर्थन मूल्य को लेकर भाजपा पर चुनावी वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने धान 3,100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया था, जबकि उनके अनुसार मौजूदा खरीद दर 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने भी कई चुनावी जनसभाओं में धान के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देने की बात कही थी। पेटवाड़ ने सरकार से सवाल किया कि किसानों को घोषित वादे के अनुरूप भुगतान क्यों नहीं मिल रहा है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय केंद्र की ओर से गेहूं के समर्थन मूल्य में 250 रुपये की बढ़ोतरी के साथ हरियाणा सरकार ने 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया था। उन्होंने अपने बयान में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान धान के भाव का भी उल्लेख किया।
पेटवाड़ ने कहा कि किसानों की आमदनी के साथ-साथ खेती की लागत को समझना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, किसानों की आय का आकलन करते समय उनकी वास्तविक उत्पादन लागत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
*फसल सत्यापन और पोर्टल की जानकारी पर उठाए सवाल*
कांग्रेस विधायक ने फसल सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विधानसभा के पिछले सत्र में उन्होंने किसानों को मुआवजा देने की मांग उठाई थी, लेकिन अब भी कई किसानों को सत्यापन के नाम पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पेटवाड़ ने आरोप लगाया कि सरकारी पोर्टल पर दर्ज फसल और खेत में बोई गई वास्तविक फसल के बीच अंतर होने से किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने नारनौंद क्षेत्र के खेड़ी चौपटा गांव के एक किसान का उदाहरण देते हुए कहा कि किसान ने बाजरे की फसल बोई है, जबकि पोर्टल पर नरमे की फसल दिखाई जा रही है।
उन्होंने नारनौंद क्षेत्र के ही कापड़ो गांव के एक किसान का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक एकड़ में 97 मन धान की पैदावार होने के बावजूद सरकारी खरीद की सीमा के कारण किसान को पूरी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार प्रति एकड़ 21.30 क्विंटल, यानी उनके अनुसार लगभग 52 मन धान की खरीद की सीमा लागू कर रही है।
पेटवाड़ ने कहा कि सरकार ने अधिक पैदावार होने की स्थिति में एसडीएम और तहसीलदार से सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए इस तरह की अतिरिक्त शर्तों और प्रक्रियाओं से क्यों गुजरना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के हजारों किसानों को सत्यापन के नाम पर दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पेटवाड़ ने सरकार से मांग की कि फसल संबंधी रिकॉर्ड की त्रुटियों को दूर किया जाए और खरीद प्रक्रिया को किसान के लिए सरल बनाया जाए।
*हरियाणा में अपराध, नशे और युवाओं के पलायन का मुद्दा उठाया*
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्सी पेटवाड़ ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और रोजगार की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा की पहचान दूध-दही और कृषि संस्कृति से रही है, लेकिन अब प्रदेश में अपराध और नशे की समस्या को लेकर चिंता बढ़ रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के पंजाब दौरे और वहां हरियाणा को नशामुक्त बनाने संबंधी बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध के आंकड़ों और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने हरियाणा को असुरक्षित बताते हुए भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की।
पेटवाड़ ने दावा किया कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण पढ़े-लिखे युवा हरियाणा से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े गोलीबारी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा के एक शूटर को इस वारदात के लिए 15 हजार रुपये मिलने की बात सामने आई थी। उनके अनुसार, यह घटना युवाओं के सामने रोजगार और अपराध से जुड़े सवाल खड़े करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की स्थिति बिगड़ी है। ये टिप्पणियां कांग्रेस विधायक के राजनीतिक आरोप हैं; अपराध, नशे और रोजगार की स्थिति का समग्र आकलन करने के लिए संबंधित सरकारी आंकड़ों और स्वतंत्र अध्ययनों को देखना आवश्यक होगा।
*पंजाब सरकार को क्लीन चिट देने के सवाल पर दी सफाई*
पंजाब में हरियाणा के मुख्यमंत्री के दौरे और वहां नशे के मुद्दे पर दिए जा रहे बयानों के संदर्भ में जब जस्सी पेटवाड़ से पूछा गया कि क्या वह पंजाब सरकार को क्लीन चिट दे रहे हैं, तो उन्होंने इससे इनकार किया।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी सरकार को क्लीन चिट नहीं दे रहे, बल्कि हरियाणा के हालात पर सवाल उठा रहे हैं। पेटवाड़ ने कहा कि प्रदेश की वास्तविक स्थिति को अपराध और अन्य संबंधित आंकड़ों के आधार पर समझा जाना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि हरियाणा में नशे और अपराध की समस्या के साथ-साथ युवाओं के पलायन और रोजगार की कमी जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
*बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन*
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्सी पेटवाड़ ने कर्मचारियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार व्यापारिक घरानों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियां अपना रही है और बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देना चाहती है।
पेटवाड़ ने कहा कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण आम लोगों के हित में नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का पूरा समर्थन करते हैं।
उन्होंने हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज के बयानों का भी उल्लेख किया। पेटवाड़ के अनुसार, विज अपनी ही सरकार के कुछ फैसलों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण से जुड़े मामले को अदालत में ले जाने की प्रक्रिया के जरिए लंबित रखा जा रहा है, जबकि सरकार निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

*सरकार से किसानों की समस्याओं का समाधान करने की मांग*
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्सी पेटवाड़ ने धान की खरीद में नमी की सीमा बढ़ाने, मिलिंग से जुड़े नियमों की समीक्षा करने, एमएसपी के चुनावी वादों पर स्थिति स्पष्ट करने और फसल सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि किसानों को मंडियों में अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से अपराध, नशे और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी जवाब देने की मांग की।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन के साथ उन्होंने बिजली क्षेत्र में निजीकरण को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। इन सभी मुद्दों पर राज्य सरकार और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।


