निवेश के लिए आखिर क्यों पंसद बन रहा यूपी, ये है वजह

यूपी में निवेश के लिए माहौल तैयार कर बड़ी बड़ी कंपनी को स्थापित कराया जा रहा हे। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि यूपी में किन कारणों से निवेश का माहौल बन रहा है।

ये सब हे कारण
उत्तर प्रदेश में भारत का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क (16,000 किमी से अधिक) है तथा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) 8.5 प्रतिशत एवं ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) 57 प्रतिशत का अधिकांश क्षेत्र भी है। दोनों फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन उत्तर प्रदेश के दादरी (ग्रेटर नोएडा) में हैं।

देश के सबसे विस्तृत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में से एक तथा 13 वर्तमान एवं आगामी एक्सप्रेसवेज के प्रोजेक्ट के साथ साथ श्एक्सप्रेसवे राज्य के रूप विश्वस्तरीय रोड कनेक्टिविटी की उपलब्धता है। यह एक्सप्रेस-वे पूरे राज्य में मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं।

लखनऊ, वाराणसी एवं कुशीनगर में मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों तथा जेवर तथा अयोध्या में नए हवाई अड्डों के विकसित होने से उत्तर प्रदेश 05 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का एकमात्र राज्य बनने जा रहा है।
जेवर में 5,000 हेक्टेयर में नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई-अड्डा भारत का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने जा रहा है।

वायुमार्ग की घरेलू कनेक्टिविटी के लिए रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के अंतर्गत 07 एयरपोर्ट्स को संचालित भी कर दिया गया है तथा 08 अन्य एयरपोर्ट पाइपलाइन में हैं। इसके अतिरिक्त, घरेलू एयर कनेक्टिविटी के लिए 20 से अधिक मार्गों को चिन्हित किया गया है।

प्रमुख पूर्वी निर्यात केंद्रों जैसे प्रयागराज, वाराणसी को हल्दिया बंदरगाह से जोड़ने वाला देश का पहला अंतर्देशीय जलमार्ग (इनलैंड वॉटर-वे), विकसित किया जा रहा है। इसका वाराणसी से हल्दिया (लगभग 1,100 किलोमीटर लंबा ) तक का मार्ग राज्य में पहले से ही संचालित है।

समुद्री बंदरगाहों पर निर्यात होने वाले माल के आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए, हमारी सरकार ड्राईपोर्ट्स के विकास को बढ़ावा दे रही है। उत्तर प्रदेश में मौजूदा लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर में मुरादाबाद रेल से जुड़े संयुक्त घरेलू एवं एक्जिम टर्मिनल, कानपुर में रेलमार्ग से जुड़े निजी फ्रेट टर्मिनल तथा अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (इनलैंड कन्टेनर डिपो आईसीडी), दादरी टर्मिनल पर आईसीडी एवं कानपुर आईसीडी सम्मिलित हैं।

वाराणसी में एक मल्टी मोडल टर्मिनल तथा गाजीपुरध् राजघाट, रामनगर (वाराणसी) एवं प्रयागराज टर्मिनल्स पर राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के किनारे विभिन्न फ्लोटिंग टर्मिनल संचालित हैं।

दादरी में एक मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब (एमएमएलएच) एवं बौराकी में मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) भी विकसित किया जा रहा है, जिससे इस सेक्टर को और बढ़ावा मिलेगा।

वाराणसी में 100 एकड़ में भारत का पहला श्फ्रेट विलेजश् विकसित हो रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के निर्यात केंद्रों को पूर्वी भारत के बंदरगाहों से जोड़ने वाला यह गांव इनबाउंड व आउटबाउंड कार्गो के लिए ट्रांस शिपमेंट हब के रूप में कार्य करेगा।

उत्तर प्रदेश भारत के फूड बास्केट के रूप में जाना जाता है। राज्य में कृषि एवं खादय- प्रसंस्करण तथा डेयरी सेक्टर में अपार अवसर हैं। उत्तर प्रदेश भारत में खाद्यान्न, दूध तथा गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश विश्व प्रसिद्ध भदोही कालीन क्लस्टर तथा वाराणसी सिल्क क्लस्टर सहित भारत के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में से एक है।

उत्तर प्रदेश भारत का तीसरा सबसे बड़ा फेब्रिक उत्पादक है तथा फेब्रिक उत्पादन, कताई, बुनाई, परिधान डिजाइन एवं मैन्यूफैक्चरिंग में कई अवसर प्रदान करता है।

पर्यटन एक प्राथमिक सेक्टर है, जिसमें प्रदेश निवेशकों के लिए सहयोग का एक प्रमुख गंतव्य हो सकता है। भारत के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों की उपस्थिति के साथ प्रदेश सरकार आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रामायण सर्किट, महाभारत सर्किट, बौद्ध सर्किट का विकास कर रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, आईटीईएस सेक्टर में उत्तर प्रदेश को भारत के कुल मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग में लगभग 45 प्रतिशत योगदान करने का गौरव प्राप्त है। यहां भारत के मोबाइल कंपोनेंट्स के लगभग 55 प्रतिशत निर्माता हैं। भारत के लगभग 26ः मोबाइल निर्माता उत्तर प्रदेश में क्रियाशील हैं तथा 200 से अधिक ईएसडीएम कंपनियां प्रदेश में स्थित हैं। राज्य सरकार सेमी कंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग तथा फैब-यूनिट के लिए क्लस्टर विकसित कर रही है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश तेजी से भारत में डाटा सेंटर के मुख्य हब के रूप में उभर रहा है।
स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग (2021) के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा राज्य को लीडर स्टेट की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। उत्तर प्रदेश में श्स्टार्टअप इंडियाश् कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 7,600 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत किए गए हैं तथा 06 सेक्टर ऑफ एक्सीलेंस स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश में आईआईटी कानपुर, आई आईआईएम लखनऊ आदि जैसे उच्च गुणवता वाले शैक्षणिक संस्थानों की उपस्थिति, वेंचर कैपिटलिस्ट, इनक्यूबेशन सेंटर डेवलपर्स एवं कौशल विकास (स्किल डवलपमेंट) के लिए अनेक अवसर प्रदान करती है।

तेजी से विकसित होते हुए स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ, उत्तर प्रदेश में एंजेल इन्वेस्टर्स एवं वेंचर कैपिटलिस्ट्स के लिए डिफेंस एवं एयरोस्पेस वैल्यू चैन में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए असीम अवसर उपलब्ध हैं, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टेक्नॉलॉजी ट्रांसफर), अनुसंधान एवं विकास एवं इनोवेशन को बढ़ावा मिलता है।

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