उज्जैन में शाही मस्जिद क्यो तोड़ना चाहती है सरकार, विरोध के बीच भारी पुलिस तैनात

उज्जैन। अलग अलग राज्यों में मस्ज़िदों को आखिर निशाना क्यों बनाया जा रहा है इसको लेकर अब जन मानस में भी सवाल खड़े होने लगे हैं यूपी तो मस्जिद तोड़ने में अव्वल आने की कोशिश कर रहा है वहीं मध्य प्रदेश में भी अब मस्जिद को लेकर बवाल को हो रहा है उज्जैन में आकर सरकार मस्जिद क्यों तोड़ना चाहती है ये सवाल उठ रहा है दरअसल सरकार की ओर से दावा किया गया है सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर उज्जैन में विकास और सड़क चैड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। कंठाल चैराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण मार्ग को 15 मीटर चैड़ा करने की योजना पर प्रशासन तेजी से काम कर रहा है। यह रास्ता शाही सवारी और पेशवाई के प्रमुख मार्गों में शामिल है, इसलिए प्रशासन इसे सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहा है। इसी चैड़ीकरण की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई के दौरान अब विवाद और तनाव की स्थिति भी सामने आई है। खास तौर पर शाही मस्जिद और खड़े हनुमान मंदिर के आसपास की कार्रवाई ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।

सड़क चौड़ीकरण के पीछे क्या है योजना?

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि शहर की मौजूदा संकरी सड़कों पर यातायात और पैदल श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से प्रमुख धार्मिक मार्गों को चौड़ा करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाला मार्ग इसी योजना का हिस्सा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने नगर निगम ने भी कहा था कि यह मार्ग पeshवाई और शाही सवारी के दौरान महत्वपूर्ण है तथा सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन के लिए 15 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अगस्त में उज्जैन पहुंचकर सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ की तैयारियों का जायजा ले चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए थे।

धार्मिक स्थलों को हटाने से बढ़ा विवाद

सड़क चौड़ीकरण के लिए कई धार्मिक स्थलों के ऐसे हिस्सों को हटाया जा रहा है जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहे हैं। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में नगर निगम ने बताया था कि संबंधित मार्ग पर कई अवरोधक निर्माण पहले ही हटाए जा चुके हैं।

इसी कार्रवाई में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आया। मस्जिद से जुड़े पक्ष ने कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मस्जिद पुरानी धार्मिक संपत्ति है और इसके हिस्से को हटाने से उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित होंगे।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 9 सितंबर 2026 को शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत के सामने नगर निगम ने दलील दी थी कि 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए संबंधित हिस्सा हटाना आवश्यक है और यह कार्रवाई बड़े सार्वजनिक हित में की जा रही है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए अन्य धार्मिक स्थलों के हिस्सों पर भी कार्रवाई की गई है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निगम की कार्रवाई को भेदभावपूर्ण या असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।

यानी शाही मस्जिद से जुड़ा विवाद केवल सड़क पर प्रशासनिक कार्रवाई का मामला नहीं रहा, बल्कि यह न्यायिक जांच से भी गुजर चुका है।

शाही मस्जिद के बाहर जुटी भीड़, पुलिस बल तैनात

पिछले दिनों शाही मस्जिद के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुटे और प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध किया। प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल तैनात किया गया। RAF और STF के जवानों की मौजूदगी में फ्लैग मार्च भी किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने मशीनों से कार्रवाई का विरोध किया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। रविवार को भी बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास मौजूद रहे और कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी रही।

खड़े हनुमान मंदिर का मामला भी बना चुनौती

इसी सड़क चौड़ीकरण अभियान में खड़े हनुमान मंदिर का मामला भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। मंदिर का ढांचा हटाया जा चुका है, लेकिन करीब आठ फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को हटाना आसान नहीं रहा।

प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिशों के बीच श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई। इसके बाद IIT इंदौर की टीम से प्रतिमा और उसके आसपास की जमीन की तकनीकी जांच कराई गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से किस तरह स्थानांतरित किया जा सकता है।

इस मामले ने यह दिखाया कि सड़क चौड़ीकरण केवल निर्माण और मशीनरी का विषय नहीं है, बल्कि पुराने धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी आस्था के कारण प्रशासन के सामने अलग तरह की चुनौतियां भी हैं।

हुसामी मस्जिद का हिस्सा भी हटाया गया

इसी अभियान में हुसामी मस्जिद के सड़क की ओर आने वाले हिस्से को हटाने की कार्रवाई भी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक बोहरा समाज और मस्जिद प्रबंधन की सहमति से निर्धारित हिस्से को हटाने का काम शुरू किया गया था।

इससे प्रशासन यह तर्क भी दे रहा है कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क की निर्धारित सीमा में आने वाले अलग-अलग धार्मिक और गैर-धार्मिक निर्माणों पर की जा रही है।

कार्रवाई के दौरान तनाव और पथराव का मामला

शाही मस्जिद के आसपास कार्रवाई को लेकर विरोध बढ़ने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हुई। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में विरोध, पुलिस बल और मशीनों को रोकने की कोशिश का उल्लेख है। पथराव और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना में किस पक्ष से पथराव शुरू हुआ और पूरे घटनाक्रम की सटीक परिस्थितियां क्या थीं, इसका निर्धारण आधिकारिक जांच के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।

विवाद अब सिर्फ सड़क का नहीं रहा

उज्जैन का यह मामला अब सड़क चौड़ीकरण से आगे बढ़कर धार्मिक स्थलों, प्रशासनिक कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन का मुद्दा बन गया है। प्रशासन का तर्क है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए समय रहते सड़क और यातायात व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। दूसरी तरफ प्रभावित धार्मिक स्थलों से जुड़े लोग अपने धार्मिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों को लेकर आपत्ति उठा रहे हैं।

हाईकोर्ट ने शाही मस्जिद मामले में प्रशासन की कार्रवाई को फिलहाल कानूनी आधार पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है। इसके बावजूद मौके पर विरोध और तनाव यह दिखाता है कि न्यायिक आदेश के बाद भी जमीन पर कार्रवाई संवेदनशील बनी हुई है।

सिंहस्थ से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

सिंहस्थ 2028 अभी दूर है, लेकिन उज्जैन में तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सड़क चौड़ीकरण, ट्रैफिक प्रबंधन और शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विकास कार्य समय पर पूरे हों और साथ ही संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को कार्रवाई के साथ संवाद और पारदर्शिता पर भी ध्यान देना होगा, क्योंकि किसी भी विवाद का असर केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि सिंहस्थ की तैयारियों और शहर के माहौल पर भी पड़ सकता है। फिलहाल उज्जैन में कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग का चौड़ीकरण प्रशासन की प्राथमिक परियोजनाओं में शामिल है और शाही मस्जिद तथा खड़े हनुमान मंदिर से जुड़े विवाद इस पूरी प्रक्रिया के सबसे संवेदनशील हिस्सों में बने हुए हैं।

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