What will happen to Sonam Wangchuk’s release?: केंद्र ने कहा- वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, सुनवाई कल तक स्थगित

What will happen to Sonam Wangchuk’s release?: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को लंबी बहस हुई। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने मामले की सुनवाई की, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वांगचुक के भाषणों का हवाला देते हुए कड़ी दलीलें पेश कीं। सुनवाई दिन भर चली, लेकिन पूरी नहीं हो सकी और इसे मंगलवार (3 फरवरी) को दोपहर 2-2:30 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

वांगचुक की पत्नी गितांजलि जे अंगमो ने उनकी हिरासत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जोधपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया। उनकी गिरफ्तारी लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत और 90 घायल हुए थे। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।

केंद्र की दलीलें: ‘राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वांगचुक के भाषणों के अंश पढ़ते हुए दावा किया कि वे युवा पीढ़ी (जनरेशन Z) को भ्रमित कर रहे हैं और लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं।

मेहता ने कहा:
• वांगचुक ने नेपाल में हुई दंगे जैसी स्थितियों का उदाहरण दिया और युवाओं से इसे दोहराने की अपील की।
• उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे घटनाओं का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि अगर उन्हें जेल भेजा गया तो लद्दाख में वैसी ही स्थिति हो जाएगी।
• ‘अरब स्प्रिंग’ का हवाला देकर वे सिविल वॉर की तरह खूनखराबे की दावत दे रहे हैं, जहां छह देशों में सरकारें उखाड़ फेंकी गईं।
• वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना की मदद नहीं करेंगे, जिससे सीमा क्षेत्र (चीन से सटे संवेदनशील इलाके) में राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
• उन्होंने महात्मा गांधी और राम-सीता की मिसालों का इस्तेमाल किया, लेकिन इसे मेहता ने ‘झूठा मुखौटा’ करार दिया।
• जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हिरासत का आदेश दिया, अन्यथा यह कर्तव्य में लापरवाही होती।
मेहता ने जोर दिया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्र में ऐसे भाषणों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और हिरासत जरूरी है ताकि आगे नुकसान रोका जा सके।

याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (पिछली सुनवाई में) ने कहा था कि हिरासत का आधार पुरानी FIR और वीडियो के चुनिंदा अंश हैं। वांगचुक पर हिंदू देवताओं के खिलाफ टिप्पणी के आरोपों को खारिज किया गया। आज की सुनवाई में सिब्बल की मुख्य दलील का जिक्र बेंच ने किया कि हिरासत ‘उधार सामग्री’ पर आधारित नहीं हो सकती, जिसे मेहता ने खारिज कर दिया।

बेंच की टिप्पणी
बेंच ने सिब्बल की दलील पर गौर किया कि हिरासत की संतुष्टि उधार सामग्री पर नहीं हो सकती, लेकिन मेहता ने इसे गलत बताया। कोई अंतिम फैसला आज नहीं हुआ।

वांगचुक की सेहत को लेकर भी कोर्ट ने पहले मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई थी। मामले में कल फिर बहस होगी। लद्दाख में छठी अनुसूची और राज्य दर्जे की मांग लंबे समय से चल रही है, जिसे लेकर वांगचुक लंबे उपवास और प्रदर्शन कर चुके हैं।

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