ये मजदूर कल्पतरु पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (KPTL) कंपनी के प्रोजेक्ट पर नाइजर के तिलाबेरी क्षेत्र में काम कर रहे थे। 25 अप्रैल 2025 को दोपहर के भोजन के बाद लौटते समय मोटरसाइकिल सवार सशस्त्र उग्रवादियों ने कंपनी कैंप के पास गोलीबारी की और इन पांचों को अगवा कर लिया। हमले में एक स्थानीय नागरिक भी अगवा हुआ था, जबकि कई स्थानीय सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।
रिहाई में विदेश मंत्रालय (MEA), भारतीय दूतावास, झारखंड सरकार और कंपनी की संयुक्त कोशिशों की बड़ी भूमिका रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपहरण की सूचना मिलते ही मामले को गंभीरता से लिया और MEA से लगातार समन्वय बनाए रखा। कैद के दौरान राज्य सरकार ने मजदूरों के परिवारों को राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पेंशन, आवास योजनाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं से जोड़ा। कंपनी को भी मजदूरों का वेतन जारी रखने के निर्देश दिए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, मजदूर भारत लौटने के बाद मुंबई में स्वास्थ्य जांच से गुजर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे सुरक्षित गिरिडीह पहुंच चुके हैं या जल्द पहुंच जाएंगे। परिवारों में खुशी का माहौल है और परिजनों ने केंद्र व राज्य सरकार का आभार जताया है।
यह घटना विदेशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर फिर से सवाल उठाती है। नाइजर में उग्रवादी गतिविधियां बढ़ने से कई भारतीय मजदूरों ने पहले वापसी की इच्छा जताई थी।

