ब्लैकबोर्ड पर ‘जुगाड़ू’ स्पेलिंग
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के कोगवार गांव स्थित प्राथमिक शाला मचानडांड में सहायक शिक्षक (एलबी) प्रवीण टोप्पो बच्चों को पढ़ा रहे थे। वीडियो में साफ दिख रहा है कि वे ब्लैकबोर्ड पर अंग्रेजी के सामान्य शब्दों की पूरी तरह गलत स्पेलिंग लिख रहे हैं। उदाहरण के तौर पर:
• शरीर के अंगों के नाम: ‘Nose’ (नाक) को ‘Noge’, ‘Ear’ (कान) को ‘Eare’, और ‘Eye’ (आंख) को ‘Iey’ लिखा गया।
• परिवार के सदस्य: ‘Father’ को ‘Fader’, ‘Mother’ को ‘Mather’ जैसी गलतियां।
• दिनों के नाम: ‘Sunday’ को ‘Sanday’ और ‘Wednesday’ को ‘Wensday’ पढ़ाया जा रहा था।
बच्चे इन गलत स्पेलिंग को कॉपीबुक में नोट कर रहे थे और रट रहे थे। वीडियो किसी ने गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जो रातोंरात वायरल हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में कुल 42 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन सिर्फ दो शिक्षक तैनात हैं। इनमें से एक अन्य शिक्षक कमलेश पंडो पर शराब के नशे में स्कूल आने और क्लास में सो जाने के आरोप भी लगे हैं।
विभाग की त्वरित कार्रवाई
वीडियो वायरल होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एम.आर. यादव ने संज्ञान लिया। उन्होंने तुरंत संकुल समन्वयक को स्कूल निरीक्षण के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसमें पाया गया कि शिक्षक ने अपने कर्तव्य, शिक्षकीय दायित्व और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का गंभीर उल्लंघन किया है। 15 नवंबर को जारी निलंबन आदेश में कहा गया कि प्रवीण टोप्पो को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला शिक्षा कार्यालय बलरामपुर निर्धारित किया गया है, जहां वे जीवन निर्वाह भत्ता के हकदार होंगे।
डीईओ यादव ने बताया, “शिक्षक का व्यवहार सेवा नियमों के विपरीत है। हम ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। आगे विभागीय जांच जारी रहेगी।” अभिभावकों ने प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसी गलतियां बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर सकती हैं। उन्होंने स्कूल में योग्य शिक्षकों की तैनाती और नियमित निरीक्षण की मांग की है।
सोशल मीडिया पर बहस
यह वीडियो एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भी छा गया, जहां यूजर्स ने इसे रीट्वीट कर शिक्षा विभाग की नींद पर तंज कसे। एक यूजर ने लिखा, “ये देखकर अंग्रेज भी माथा पीट लेंगे! ग्रामीण स्कूलों में बेसिक ट्रेनिंग की कमी साफ दिख रही है।” वहीं, कुछ ने पुरानी घटनाओं का जिक्र कर कहा कि बलरामपुर में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जैसे 2024 में एक अन्य शिक्षक द्वारा ‘संडे-मंडे’ की गलत स्पेलिंग सिखाने का वीडियो वायरल हुआ था।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की अंग्रेजी योग्यता पर सवाल उठना आम बात है, लेकिन यह पहली बार नहीं है। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जो बताते हैं कि शिक्षक ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग की कमी से जूझ रहे हैं। एक एनजीओ के प्रतिनिधि ने कहा, “बच्चों को गलत स्पेलिंग रटाने से उनका आत्मविश्वास कम होता है। सरकार को तत्काल डिजिटल ट्रेनिंग और साप्ताहिक निरीक्षण शुरू करने चाहिए।”
यह मामला न सिर्फ बलरामपुर बल्कि पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर एक आईना है। क्या विभाग अब सुधार के ठोस कदम उठाएगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, निलंबन से ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन सवाल वही है—बच्चों का भविष्य सुरक्षित कैसे हो?

