Uproar over Yunus’ safe exit: यूनुस के विदाई भाषण में भारत की ‘सात बहनों’ का जिक्र कर फिर उकसाया, सहयोगियों के ‘सुरक्षित निकास’ की अफवाहें खारिज

Uproar over Yunus’ safe exit: बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। आज ही नवनिर्वाचित बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अगुवाई वाली सरकार को सत्ता सौंपी जाएगी, जिसमें तारिक रहमान शाम को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। सत्ता हस्तांतरण के ठीक पहले यूनुस ने अपने विदाई भाषण में भारत को फिर निशाना बनाया और उनके एक सहायक के जर्मनी रवाना होने से ‘सुरक्षित निकास’ की पुरानी चर्चाएं एक बार फिर गरमा गईं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक सहयोगियों का सामूहिक पलायन नहीं हो रहा है।

यूनुस के भाषण में भारत पर तीखा हमला
25 मिनट के राष्ट्रवादी अंदाज वाले विदाई भाषण में यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों—जिन्हें ‘सात बहनें’ कहा जाता है—का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश अपने खुले समुद्र के जरिए इन राज्यों, नेपाल और भूटान के लिए बड़ी आर्थिक संभावनाएं पैदा कर सकता है। उन्होंने भारत का नाम लिए बिना ‘सात बहनों’ को अलग इकाई की तरह पेश किया, जिसे नई दिल्ली में उकसावे के रूप में देखा जा रहा है।

यूनुस ने कहा, “आज का बांग्लादेश आत्मविश्वास से भरा है और अपनी स्वतंत्र हितों की रक्षा करने में सक्रिय व जिम्मेदार है। बांग्लादेश अब किसी अन्य देश के निर्देशों या सलाह पर निर्भर सबमिसिव विदेश नीति वाला देश नहीं है।” यह बयान भारत की ओर इशारा मानकर देखा जा रहा है। यूनुस के 18 महीने के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। इस दौरान बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं बढ़ीं और यूनुस ने चीन व पाकिस्तान से निकटता बढ़ाई।

भाषण में चीन का खास तौर पर जिक्र करते हुए यूनुस ने तीस्ता नदी परियोजना और नीलफामारी में 1000 बेड वाले अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में हुई प्रगति का उल्लेख किया। भारत इस चीनी परियोजना को सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) की निकटता के कारण संवेदनशील मानता रहा है। भारत में तीखी प्रतिक्रिया वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने यूनुस पर “भारत को बाहरी खलनायक बनाने” का आरोप लगाया। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इसे “खतरनाक सोच” करार दिया। उन्होंने कहा कि यूनुस ने नेपाल और भूटान को स्वतंत्र देश बताते हुए ‘सात बहनों’ का जिक्र भारत का नाम लिए बिना किया, जो उनकी मंशा जाहिर करता है।

सहयोगियों के ‘सुरक्षित निकास’ की अफवाह खारिज
13 फरवरी को चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद यूनुस के विशेष सहायक फैज अहमद तैयब जर्मनी के लिए रवाना हो गए। ढाका के अखबार ‘द डेली स्टार’ ने इसे “आश्चर्यजनक प्रस्थान” बताया, जिससे सोशल मीडिया पर यूनुस के सहयोगियों के सामूहिक पलायन की अटकलें तेज हो गईं।

एनसीपी नेता नसीरुद्दीन पटवारी ने भी कल शाम इस मुद्दे को उठाया और सलाहकारों से अपनी संपत्ति का हिसाब देने की अपील की। हालांकि ढाका के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि तैयब की रवानगी को छोड़कर यूनुस सरकार के अन्य सलाहकार और अधिकारी देश नहीं छोड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अंतरिम व्यवस्था के लोग अब पूरी तरह “मुख्यधारा” में आ चुके हैं और सत्ता हस्तांतरण सुचारु रूप से हो रहा है, इसलिए उन्हें कोई राजनीतिक खतरा नहीं है। पिछले साल अक्टूबर में भी एनसीपी नेताओं ने कुछ सलाहकारों पर “सुरक्षित निकास” की कोशिश का आरोप लगाया था, जिसे सलाहकारों ने खारिज किया था।

यूनुस सरकार का विवादास्पद कार्यकाल
यूनुस को अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद छात्र आंदोलन के नेतृत्व ने अंतरिम प्रमुख बनाया था। संविधान में ऐसी व्यवस्था का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से इसे “असंवैधानिक” कहा गया। उनके कार्यकाल में कई बड़े विदेशी समझौते हुए और जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह कराया गया, जिसे बीएनपी ने भी अंतरिम सरकार का अतिक्रमण बताया था। अब सभी की निगाहें नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर हैं, जिनसे भारत के साथ संबंधों में रीसेट की उम्मीद की जा रही है।

यहां से शेयर करें