Ghaziabad news केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को इंदिरापुरम के यशोदा मेडिसिटी में रोगी-केंद्रित और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं तहत एआई-सक्षम एआई आईसीयू कमांड सेंटर का शुभारंभ किया।
केंद्रीय मंत्रीय जेपी नड्डा ने कहा कि यशोदा मेडिसिटी की एआई-सक्षम ई-आईसीयू जैसी पहले यह दिखाती है कि तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को किस तरह मजबूत किया जा सकता है। यह सीएसआर पहल गंभीर मरीजों के लिए लगातार विशेषज निगरानी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगी साथ ही अन्य अस्पतालों को भी समाज के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।
यशोदा ग्रुप के चेयरमैन और मैनेंजिंग डायरेक्टर डॉ वीएन अरोड़ा ने कहा कि हमारी हमेशा से यही सोच रही है कि हर मरीज को विश्वस्तरीय इलाज मिले। एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर के जरिये हम आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ देखरेख को अस्पताल की सीमाओं से बाहर तक पहुंचा रहे हैं। इसका उद्द्देश्य जमीनी स्तर पर काम कर रही मेडिकल टीमों को लगातार सहयोग देना है ताकि सहीसमय पर सही इलाज संभव हो सके। मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ उपासना अरोड़ा ने कहा कि आज यशोदा मेडिसिटी ने विश्व स्तरीज इलाज में अपनी पहचान देश ओर विदेशों में भी बनाई है।
एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शुभांग अरोडा ने कहा कि यह एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर हमारी उस सोच को दर्शाती है, जिसमें तकनीक के जरिये बड़े स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
1200 बेड का अस्पताल है यशोदा मेडिसिटी
यशोदा मेडिसिटी दिल्ली एनसीआर में स्थित एक अत्याधुनिक क्वाटरनरी केयर अस्पताल है, यशोदा ग्रुप आॅफ हॉस्पिटल्स 50 बीघार जमीन पर फैले इस परिसर में कुल 1,200 बेड हैं, जिनमें से पहले चरण में 635 बेड कार्यरत हैं। यहां 65 से अधिक विशेषताएं और 12 से अधिक सेंटर आॅफ एक्सीलेंस हैं। यह अस्पताल आधुनिक तकनीक, हरित और डिजिटल डिजाइन तथा रोगी केंद्रित देखभाल के साथ देश के अलग अलग राज्यों और विदेश से आने वाले मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहा है।
मरीज की हालत बिगड़ने से पहले देता हैं चेतावनी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से मरीजों से जुड़े डेटा का रियल-टाइम विश्लेषण किया जाता है। यदि मरीज की स्थिति बिगड़ने की संभावना होती है, तो सिस्टम पहले से चेतावनी देता है। इससे दूर बैठकर विशेषज डॉक्टरों के निगरानी, बेहतर समन्वय और तय चिकित्सा प्रक्रियाओं के अनुसार इलाज संभव हो पाता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर तुरंत अलर्ट भेजता है। इससे आॅक्टरों को त्वरित और सही निर्णय लेने में मदद मिलती है, संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और इलाज की सागत कम करने में भी सहायता मिलती है।

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