Trump’s first year of his second term: इंडिया-पाक युद्धविराम का 90 बार श्रेय लेने और ‘सबसे खतरनाक राष्ट्रपति’ बनकर उभरे

Trump’s first year of his second term: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल को ‘आधुनिक इतिहास का सबसे सफल पहला साल’ करार दिया है। व्हाइट हाउस ने ‘365 दिनों में 365 जीतें’ नाम से जारी बयान में इंडिया-पाकिस्तान के बीच 2025 के संक्षिप्त संघर्ष को रोकने को बड़ी उपलब्धि बताया। ट्रंप ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश युद्ध की कगार से बच गए और लाखों-करोड़ों जानें बचीं।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारत और पाकिस्तान बहुत बुरी तरह लड़ रहे थे। आठ विमान गिराए गए। मेरी राय में वे न्यूक्लियर युद्ध की तरफ़ जाने वाले थे।” उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें बताया कि ट्रंप ने 10 मिलियन से ज्यादा लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने यह दावा मई 2025 से अब तक करीब 90 बार दोहराया है। व्हाइट हाउस इसे ‘आठ अजेय युद्धों को खत्म करने’ की सूची में शामिल कर रहा है।

हालांकि, भारत ने इस दावे को लगातार खारिज किया है। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद हुए युद्धविराम में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में स्ट्राइक्स की थीं, जिसके बाद तनाव बढ़ा और फिर विराम हुआ।

दूसरी ओर, ट्रंप की आलोचना भी तेज हो रही है। कुछ ओपिनियन पीस में उन्हें ‘सबसे खतरनाक राष्ट्रपति’ कहा गया है। आलोचक उनके अप्रत्याशित फैसलों, टैरिफ्स की धमकियों और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को खतरनाक बता रहे हैं। ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की कोशिश को लेकर ट्रंप ने कई यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिसे डेनमार्क और यूरोपीय यूनियन द्वारा कड़ा विरोध किया गया है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की हथकड़ी-बेड़ियां लगाकर डिपोर्टेशन, विभिन्न देशों पर टैरिफ्स और सोशल मीडिया पर नीतिगत घोषणाएं ट्रंप के ‘अनप्रेडिक्टेबल’ अंदाज को उजागर कर रही हैं। आलोचक कहते हैं कि ट्रंप कूटनीति की जगह अहंकार और धमकी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ रही है।

ट्रंप का यह कार्यकाल विवादों और बड़े दावों से भरा रहा है। जहां समर्थक इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ की जीत बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में ग्रीनलैंड और टैरिफ्स मुद्दे पर और तनाव बढ़ सकता है।

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