Trump Tariff : नई दिल्ली। अमेरिका के साथ 18 प्रतिशत शुल्क पर हुए व्यापार समझौते के लागू होने के बाद भारत के रोजगारपरक क्षेत्रों—टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स व ज्वैलरी—के निर्यात में बड़ा उछाल आने की संभावना है। निर्यातकों का अनुमान है कि इन क्षेत्रों के निर्यात में आगामी महीनों में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
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निर्यातकों के अनुसार, समझौते का वास्तविक लाभ अगले अप्रैल से दिखना शुरू होगा, क्योंकि नई शुल्क दरों पर ऑर्डर मिलने में कुछ समय लगता है। अमेरिका के बाजार में निर्यात बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों के भारत में विनिर्माण के लिए निवेश बढ़ाने की भी उम्मीद है।
50% शुल्क से रुका निवेश, अब 18% पर खुले रास्ते
अमेरिकी कंपनियां आमतौर पर कम श्रम लागत वाले देशों में विनिर्माण कराना पसंद करती हैं। इससे पहले 50 प्रतिशत शुल्क लागू होने के बाद खिलौना, फुटवियर और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निवेश की इच्छुक कई अमेरिकी कंपनियों ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। अब 18 प्रतिशत शुल्क पर व्यापार समझौता होने से भारत दोबारा उनके लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है।
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश है, जबकि उसकी जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी मात्र 9 प्रतिशत है। ऐसे में भारत के लिए वहां निर्यात बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं।
टेक्सटाइल निर्यात में तेजी की उम्मीद
कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज (CITI) के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन के अनुसार, अमेरिका के बाजार में टेक्सटाइल पर शुल्क घटकर 18 प्रतिशत होने से भारत का निर्यात तेजी से बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को चुनौती देने वाले बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन और वियतनाम जैसे देशों पर भारत की तुलना में अधिक शुल्क है, जिससे भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
वर्तमान में अमेरिका के बाजार में भारत का टेक्सटाइल निर्यात करीब 10.6 अरब डॉलर का है, जिसमें गारमेंट्स की हिस्सेदारी लगभग 5.5 अरब डॉलर है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन ए. शक्तिवेल के अनुसार, तत्काल प्रभाव भले ही सीमित हो, लेकिन अगले अप्रैल से टेक्सटाइल निर्यात में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है।
लेदर और फुटवियर में भी राहत
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पूर्व अध्यक्ष आर.के. जालान ने बताया कि 50 प्रतिशत शुल्क के कारण लेदर और फुटवियर निर्यात में आई गिरावट अब पूरी तरह भरपाई की ओर बढ़ेगी। आने वाले तीन से चार महीनों में इस क्षेत्र में 15–20 प्रतिशत तक की वृद्धि की उम्मीद है।
भारत अमेरिका को सालाना लगभग 1.2 अरब डॉलर के लेदर और फुटवियर उत्पाद निर्यात करता है।
जेम्स-ज्वैलरी और समुद्री उत्पादों में सुधार की उम्मीद
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 10 अरब डॉलर के हीरा, जेम्स और ज्वैलरी का निर्यात किया था। हालांकि 50 प्रतिशत शुल्क के बाद इसमें सुस्ती आई और जनवरी में गिरावट दर्ज की गई। व्यापार समझौते के बाद इस क्षेत्र में भी करीब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
समुद्री उत्पादों, खासकर झींगा निर्यातकों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 50 प्रतिशत शुल्क के कारण इस क्षेत्र में निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ था। भारत अमेरिका को सालाना करीब 2.4 अरब डॉलर के झींगा का निर्यात करता है, जिसमें अब फिर से तेजी आने की संभावना है।
कृषि और प्रोसेस्ड फूड को मिलेगा फायदा
पिछले वित्त वर्ष में भारत ने अमेरिका के बाजार में 6 अरब डॉलर के कृषि और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों का निर्यात किया था। अधिक शुल्क के कारण पाकिस्तान, वियतनाम, कीनिया और श्रीलंका जैसे देशों को ऑर्डर मिलने लगे थे। अब शुल्क घटने के बाद भारतीय कृषि और प्रोसेस्ड उत्पादों के निर्यात में फिर से मजबूती आने की उम्मीद है।
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