नोएडा/दिल्ली | 9 फरवरी 2026 राजधानी और उससे सटे हाई-टेक शहर नोएडा में सिस्टम की लापरवाही के गड्ढे अब इंसानी जिंदगियों को निगलने वाले डेथ ट्रैप बन गए हैं। एक तरफ नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गठित SIT (विशेष जांच टीम) की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हो रहा, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के जनकपुरी में कमल ध्यानी की मौत ने साबित कर दिया है कि प्रशासन ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया है।
नोएडा: युवराज मेहता केस और SIT की ‘सुस्त’ रफ़्तार
बीते जनवरी महीने में सेक्टर 150 के एक पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय युवराज मेहता की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी।
- अब तक की स्थिति: हादसे के बाद भारी जन आक्रोश को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया और नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटा दिया।
- अधूरी रिपोर्ट: स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार का आरोप है कि SIT की विस्तृत रिपोर्ट और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई अब भी फाइलों में दबी है।
- अथॉरिटी का ‘देर से’ जागना: हाल ही में अथॉरिटी ने सेक्टर 150 की सड़कों पर CCTV और सुरक्षा उपाय करने का फैसला तो लिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कदम युवराज को वापस ला सकते हैं?
दिल्ली: जनकपुरी का ‘खूनी’ गड्ढा और कमल की मौत
नोएडा जैसी ही रूह कंपा देने वाली कहानी दिल्ली के जनकपुरी में दोहराई गई। 25 वर्षीय बैंक कर्मचारी कमल ध्यानी रात के अंधेरे में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा खोदे गए एक 20 फीट गहरे अनमार्क गड्ढे में गिर गए।
- इंसानियत शर्मसार: जांच में खुलासा हुआ है कि हादसे के वक्त वहां मौजूद सब-कॉन्ट्रैक्टर और मजदूरों को पता था कि कोई गड्ढे में गिरा है, लेकिन उन्होंने पुलिस को सूचित करने के बजाय वहां से भागना और घर जाकर सोना बेहतर समझा।
- 8 घंटे का इंतजार: कमल का शव और बाइक सुबह 8 बजे तब मिले जब उनके परिवार ने खुद ढूंढना शुरू किया।
दो शहर, दो मौतें, एक जैसा पैटर्न (तुलनात्मक रिपोर्ट)
| बिंदु | नोएडा (युवराज मेहता) | दिल्ली (कमल ध्यानी) |
|---|---|---|
| हादसे का कारण | अनकवर्ड और पानी से भरा गहरा गड्ढा | बिना बैरिकेडिंग वाला सीवर का गड्ढा |
| प्रशासनिक चूक | 2015 से लंबित जल निकासी प्रोजेक्ट | कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का शून्य होना |
| लापरवाही | रेस्क्यू टीम का 2 घंटे देरी से पहुंचना | चश्मदीद मजदूरों द्वारा मदद न करना |
| कार्रवाई | SIT गठित, बिल्डर्स पर FIR | 3 इंजीनियर सस्पेंड, कॉन्ट्रैक्टर गिरफ्तार |
जनता का सवाल: कागजों में कार्रवाई या धरातल पर बदलाव?
इन दोनों ही मामलों में एक बात सामान्य है—अंधेरा और अनदेखी। नोएडा के सेक्टर 150 को ‘सबसे पॉश सेक्टर’ बताया जाता है और दिल्ली देश की राजधानी है, फिर भी सड़कों पर मौत के ये खुले कुएं किसके आदेश पर छोड़े गए हैं?
“जब तक बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों पर ‘गैर-इरादतन हत्या’ (धारा 105, BNS) के तहत ऐसी मिसाल कायम नहीं की जाती जो दूसरों को डराए, तब तक सड़कों पर युवराज और कमल जैसे युवा अपनी जान गंवाते रहेंगे।” — नागरिक समूह
युवराज मेहता की मौत के बाद बनी SIT की रिपोर्ट में हो रही देरी यह संकेत देती है कि शायद मामला ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है। वहीं दिल्ली का हादसा यह बताता है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी और ठेकेदारों की मनमानी आज भी बेखौफ जारी है।

